कोरोना: कुंभ और चुनावी रैलियों से हालात बेकाबू, जानें भीड़-भाड़ से दुनिया को कैसे हुआ नुकसान
भारत में कोरोना की दूसरी लहर तेजी से फैल रही है और हर दिन लाखों लोग इस खतरनाक वायरस की चपेट में आ रहे हैं। इसके बाद भी कई हिस्सों में हजारों लोगों की भीड़ जुटती नजर आ रही है। दुनिया में कई ऐसे मामले सामने आए, जहां भीड़ कोरोना वायरस संक्रमण का जरिया बनी।
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देश में कोरोना की दूसरी लहर ने कहर बरपा हुआ है और उत्तराखंड के हरिद्वार में लाखों श्रद्धालू गंगा में डूबकी लगाने के लिए इकट्ठा हुए। बुधवार को महाकुंभ के 13वें दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालू वहां इकट्ठे हुए। चाहे ये धार्मिक आयोजन हो या सम्मेलन या फिर रैली, देश में कोरोना वायरस हर रोज लाखों लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है।
इसे लेकर जानकारों ने चिंता व्यक्त की है। वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट फॉर डिसीज मॉडलिंग के रिसर्च साइंटिस्ट बेंजामिन एल्टोज का कहना है कि कोरोना वायरस अभी और अधिक चरम पर हो सकता है। क्योंकि भविष्य में ऐसा देखा जा सकता है कि 90 फीसदी संभावित मामले 10 फीसदी वाहक से आ रहे हैं। भारत के अलावा दुनिया में कई ऐसी घटनाएं सामने आईं, जहां ज्यादा भीड-भाड़ वाले कार्यक्रमों से कोरोना वायरस तेजी से फैला हो।
1. मुलहाउस, फ्रांस
18 फरवरी 2020 के शुरू होते ही जर्मनी और स्विट्जरलैंड के साथ फ्रांस की सीमाओं पर एक लाख की आबादी वाले शहर मुलहाउस में क्रिश्चियन ओपन डोर चर्च ने सप्ताह भर चलने वाले वार्षिक उत्सव की मेजबानी की। इस उत्सव में हजारों लोग दुनियाभर से आए। उस समय विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, फ्रांस में 12 सक्रिय मामले थे और मुलहाउस में कोई मामला नहीं था।
हालांकि इस कार्यक्रम के बाद फ्रांस में तेजी से कोरोना वायरस फैला। इस कार्यक्रम से संबंधित ढाई हजार मामले सामने आए। इसके बाद 20 मार्च तक फ्रांस में दस हजार मामले और सामने आए।
2. सैन सिरो, इटली
उस समय अटलांटा के इतिहास का सबसे बड़ा सॉकर गेम था और बर्गामो की एक तिहाई जनसंख्या मिलान के प्रसिद्ध सैन सिरो स्टेडियम पहुंच गई। उस समय स्टेडियम में चालीस हजार से ज्यादा मौजूद थे। एक महीने के बाद, जानकारों ने बर्गामो को कोरोना वायरस का एपिसेंटर बताना शुरू कर दिया क्योंकि 19 फरवरी को हुए खेल में कोई संक्रमित आ पहुंचा था। जिसके बाद बर्गामो में कोरोना के काफी मामले निकले।
बर्गामो प्रांत की 70 फीसदी आबादी कोरोना संक्रमित पाई गई और एक हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई।
3. कुआला लंपर, मलेशिया
मलेशिया की राजधानी कुआला लंपर के बाहर एक मस्जिद में पिछले साल 27 फरवरी से एक मार्च के बीच आयोजित एक कार्यक्रम में तब्लीगी जमात दक्षिण एशिया के कई देशों में कोरोना फैलाने का एक अहम स्रोत बनकर उभरा। इस कार्यक्रम में 16 हजार लोग शामिल थे, जिसमें से डेढ़ हजार लोग विदेशी थे। मलेशिया के 673 संक्रमित मामलों में दो तिहाई केस इस चार दिवसीय कार्यक्रम से संबंधित थे।
4. वॉशिंगटन डीसी, अमेरिका
अमेरिका में छह जनवरी को कैपिटल हिल पर जो हमला हुआ, उसके सभी साक्षी हैं। तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन में जुटे बिना मास्क पहने सैकड़ों लोगों ने जो बाइडेन की जीत के विरोध में कैपिटल हिल पर हमला किया था। बिना मास्क पहनी उस भीड़ को देखकर अमेरिका के एक जानकार ने कहा कि ये लोग बिना मास्क पहनकर ट्रेन, कार और प्लेन में सफर कर अपने घर जाएंगे। इसलिए मुझे ऐसा लगता है कि इसके बाद अमेरिका में कोरोना के मामलों में तेजी देखी जाएगी।
इसके बाद 150 राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के कर्मचारी, 38 पुलिस अधिकारी और कांग्रेस के चार सदस्य कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। वहीं जानकारों का मानना है कि ट्रंप की रैली की वजह से भी अमेरिका में तीस हजार कोरोना के अतिरिक्त मामले सामने आए थे।