SCO: पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल और रक्षा मंत्री आसिफ को न्योता पाक से नरमी नहीं, सिर्फ शिष्टाचार
एससीओ सम्मेलन में पाकिस्तानी मंत्रियों को आमंत्रित किए जाने पर चर्चाओं का दौर शुरू होने पर सरकारी सूत्र ने कहा कि भारत इस साल एससीओ की अध्यक्षता कर रहा है और पाकिस्तान इसका सदस्य देश है। ऐसे में बतौर मेजबान भारत औपचारिकता निभा रहा है।
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शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन में पहले पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो के बाद अब रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को भारत की ओर से दिए गए न्योते पर चर्चाओं का बाजार गर्म है। एक पक्ष इसे पाकिस्तान के प्रति भारत की नरमी की शुरुआत के रूप में देख रहा है। हालांकि सच्चाई यह है कि बतौर मेजबान भारत पाकिस्तान के विदेश और रक्षा मंत्री को निमंत्रित कर महज औपचारिकता और बहुपक्षीय प्रतिबद्धता प्रदर्शित कर रहा है।
एससीओ सम्मेलन में पाकिस्तानी मंत्रियों को आमंत्रित किए जाने पर चर्चाओं का दौर शुरू होने पर सरकारी सूत्र ने कहा कि भारत इस साल एससीओ की अध्यक्षता कर रहा है और पाकिस्तान इसका सदस्य देश है। ऐसे में बतौर मेजबान भारत औपचारिकता निभा रहा है। जहां तक पाकिस्तान से नरमी बरतने का संकेत है तो पड़ोसी देश के प्रति भारत के पुराने रुख में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।
पहल करनी होती तो जी-20 के लिए देते न्योता
सरकारी सूत्र ने कहा कि अगर संबंध सुधारने की पहल करनी होती तो भारत पाकिस्तान को जी-20 में विशेष अतिथि के तौर पर आमंत्रित करता। भारत इस साल एससीओ की तरह जी-20 की भी मेजबानी कर रहा है। बतौर मेजबान भारत ने इस समूह के गैरसदस्य देशों बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र, नीदरलैंड, मॉरिशस, ओमान, नाइजीरिया, सिंगापुर, स्पेन को विशेष अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया है। सूची में पाकिस्तान नहीं है।
विदेश मंत्री-रक्षा मंत्री से नहीं बनेगी बात
सरकारी सूत्र ने यह भी कहा कि संबंध सुधारने की पहल के लिए बिलावल और ख्वाजा आसिफ उपयुक्त व्यक्ति नहीं हैं। भारत को पता है कि इसकी पहल कहां से करनी होगी। चूंकि एससीओ सम्मेलन में सदस्य देशों के रक्षा और विदेश मंत्रियों की बैठक होनी है और भारत मेजबान देश है।
- ऐसे में उसके साथ बतौर मेजबान इसके सदस्य देशों के प्रति प्रतिबद्धताएं जुड़ी हुई हैं। दोनों मंत्रियों को निमंत्रण महज शिष्टाचार और भारत की बहुपक्षीय प्रतिबद्धता है।
अरसे से ठंडे हैं द्विपक्षीय रिश्ते
भारत और पाकिस्तान के द्विपक्षीय रिश्ते मुंबई में आतंकी हमले के बाद से ठंडे बस्ते में हैं। साल 2011 में पाकिस्तान की तत्कालीन विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार भारत आई थीं। साल 2015 में तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और इसी साल पीएम मोदी बिना किसी कार्यक्रम के पाकिस्तान गए। इसी बीच पहले पठानकोट एयरबेस और इसके बाद उरी में सेना के उपमुख्यालय पर हुए आतंकी हमले ने रिश्ते बेहतर होने की संभावनाओं पर पानी फेर दिया।