DGTR: चीन से सस्ते आयात पर एक्शन में वाणिज्य मंत्रालय; सोलर कंपोनेंट-मोबाइल कवर पर एंटी डंपिंग जांच शुरू
भारत ने चीन से आने वाले सोलर एन्कैप्सुलेंट्स (ईवीए को छोड़कर) और मोबाइल कवर पर एंटी-डंपिंग जांच शुरू की है। रिन्यूसस इंडिया और ऑल इंडिया मोबाइल कवर मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन की शिकायत पर डीजीटीआर ने यह कदम उठाया है। अगर सस्ती दरों पर आयात से घरेलू उद्योग को नुकसान साबित हुआ, तो इन पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा।
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चीन से आने वाले कुछ सामनों को लेकर भारत सरकार ने सख्त कदम उठाया है। इसके तहत भारतीय वाणिज्य मंत्रालय की इकाई महानिदेशालय व्यापार उपचार (डीजीटीआर) ने चीन से आयातित सोलर कंपोनेंट और मोबाइल कवर पर एंटी-डंपिंग जांच शुरू कर दी है।
यह कार्रवाई रिन्यूसस इंडिया और ऑल इंडिया मोबाइल कवर मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन की शिकायत पर की गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि चीन से आने वाला सोलर एन्कैप्सुलेंट्स (ईवीए एन्कैप्सुलेंट्स को छोड़कर) बहुत कम दामों पर भारत में बेचा जा रहा है, जिससे देश की घरेलू कंपनियों को नुकसान हो रहा है। यह सामान सोलर पैनल बनाने में इस्तेमाल होता है।
डीजीटीआर ने बताया क्यों हो रही है जांच?
मामले में बढ़चे चर्चाओं के बीच डीजीटीआर ने अपनी अधिसूचना में कहा अब एंटी-डंपिंग जांच शुरू की जाती है ताकि यह पता लगाया जा सके कि चीन से सस्ती दरों पर माल आ रहा है या नहीं, और इससे घरेलू उद्योग को कितना नुकसान हो रहा है। अगर जांच में यह साबित होता है कि घरेलू उद्योग को वाकई नुकसान हो रहा है, तो डीजीटीआर आयात पर अतिरिक्त शुल्क (एंटी-डंपिंग ड्यूटी) लगाने की सिफारिश करेगा। हालांकि मामले में अंतिम फैसला वित्त मंत्रालय लेगा।
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क्या होता है एंटी डंपिंग?
बता दें कि एंटी डंपिंग का मतलब होता है जब कोई देश किसी उत्पाद को बहुत सस्ती कीमत पर दूसरे देश में बेचता है, जिससे उस देश के स्थानीय उद्योगों को नुकसान होता है। इस पर लगने वाला एंटी-डंपिंग टैक्स विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के तहत लगाया जाता है, जिसमें भारत और चीन दोनों सदस्य हैं। भारत पहले भी कई चीनी उत्पादों पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगा चुका है।
मलेशिया और इंडोनेशिया से आयात पर भी निशाना
इतना ही नहीं एक अलग नोटिफिकेशन में डीजीटीआर ने यह भी बताया किमलेशिया और इंडोनेशिया से आने वाले क्लियर फ्लोट ग्लास पर सब्सिडी की जांच शुरू की गई है। यह शिकायत सिसेकैम फ्लैट ग्लास इंडिया, गोल्ड प्लस ग्लास इंडस्ट्री, गोल्ड प्लस फ्लोट ग्लास और सेंट-गोबेन इंडिया जैसी कंपनियों ने मिलकर की है।
इसको लेकर डीजीटीआर ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह पाया गया है कि इन देशों की सरकारें कांच उत्पादकों को सब्सिडी दे रही हैं, जिससे भारत में कांच की कीमतें बहुत कम हो गई हैं और घरेलू उद्योग को नुकसान हो रहा है। इसलिए अब यह जांच की जाएगी कि सब्सिडी कितनी है, उसका असर क्या है, और क्या इस पर एंटी-सब्सिडी टैक्स लगाया जाए ताकि घरेलू उद्योग की सुरक्षा हो सके।
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