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Tigers: भारत में दुनियाभर के 70 प्रतिशत बाघ, वन अधिकारी ने कहा- टाइगरों को 100% सुरक्षित नहीं कर सकते

Wed, 05 Apr 2023 09:20 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Wed, 05 Apr 2023 09:20 PM IST
सार

टाइगरों के संरक्षण के लिए 1 अप्रैल 1973 को प्रोजेक्ट टाइगर लॉन्च किया गया था। शुरुआत में प्रोजेक्ट के तहत 18,278 वर्ग किलोमीटर के दायरे में नौ टाइगर रिजर्व ही आते थे। लेकिन आज की स्थिति में प्रोजेक्ट में 53 टाइगर रिजर्व शामिल हैं, जो 75,000 वर्ग किलोमीटर तक फैला है।

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India have 70% tigers of whole world, read interesting facts about tigers and reserves
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के जंगल के खितौली जोन में दिखा शावक। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

एक अप्रैल को टाइगर प्रोजेक्ट के 50 साल पूरे हुए। बुधवार को प्रोजेक्ट के प्रमुख ने कहा कि भारत वैज्ञानिक रूप से गणना की गई बाघों की आबादी को बनाए रखना चाहता है। विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना भारत का लक्ष्य है। अतिरिक्त वन महानिदेशक एसपी यादव ने कहा अच्छी टेक्नोलॉजी और सुरक्षा उपकरणों के कारण भारत में टाइगर के शिकार में भी कमी आई है। हालांकि, टाइगर्स के लिए जंगलों की कटाई सबसे बड़ी समस्या है।

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6 प्रतिशत के दर से बढ़ रही है आबादी

टाइगरों के संरक्षण के लिए 1 अप्रैल 1973 को प्रोजेक्ट टाइगर लॉन्च किया गया था। शुरुआत में प्रोजेक्ट के तहत 18,278 वर्ग किलोमीटर के दायरे में नौ टाइगर रिजर्व ही आते थे। लेकिन आज की स्थिति में प्रोजेक्ट में 53 टाइगर रिजर्व शामिल हैं, जो 75,000 वर्ग किलोमीटर तक फैला है। भारत में विश्व भर के 70 प्रतिशत टाइगर हैं। इनकी आबादी करीब तीन हजार है, जो 6 प्रतिशत के दर से बढ़ रही हैं।

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प्रोजेक्ट के 50 साल पूरे होने की खुशी में नौ अप्रैल को एक बड़े आयोजन की तैयारी की जा रही है। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे। इसमें वे टाइगर्स के ताजे आंकड़े भी दुनिया के सामने पेश करेंगे। कर्नाटक के मैसूर में होने वाले कार्यक्रम में टाइगर के संरक्षण के लिए सरकार अमृत काल का विजन भी जारी करेगी।

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इन रिजर्व में कम हैं टाइगर

यादव ने कहा कि सरकार बाघों के आवासों को संरक्षण कार्यक्रम के तहत लाने और उनकी वहन क्षमता के आधार पर टाइगर रिजर्वों के एक्टिव मैनेजमेंट पर ध्यान केंद्रित कर रही है। कई रिजर्व में बाघों की संख्या बहुत कम है। इनमें पश्चिम बंगाल का बक्सा टाइगर रिजर्व, ओडिशा का सतकोसिया और सिमिलिपाल और मध्य प्रदेश का सतपुड़ा शामिल है। जिन रिजर्व में टाइगर की आबादी कम या अधिक है, वहां काम करने की आवश्यकता है। यादव ने कहा कि बाघों के लिए जहां अच्छा शिकार हो, जहां जीवित रहने की बेहतर संभावना हो उस क्षेत्र में टाइगर को भेजा जाना चाहिए। 

सरकार बफर जोन की योजनाओं के लिए करती है परामर्श

यादव भारत में बाघों के आवास के प्रबंधन के लिए काम करने वाली संस्था राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के सदस्य सचिव भी हैं।  उन्होंने विकास और संरक्षण गतिविधियों में संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि हम एक विकासशील देश हैं। हम विकास से इनकार नहीं कर सकते, हमें रोजगार की आवश्यकता है। इसी के साथ हमें वन्यजीव और बाघों पर भी ध्यान होगा। बाघों के आवास और बफर क्षेत्रों की परियोजनाओं के सभी प्रस्तावों को नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ की सिफारिश के बाद ही लागू किया जाता है।

एनटीसीए के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने 2012 से 2020 के बीच 857 बाघ खो दिए हैं। 193 बाघ शिकार के कारण मारे गए। ऐसी घटनाएं 2018 में 34 से घटकर 2020 में केवल सात रह गई। जंगल की कटाई और अवैध शिकार अब भी समस्या है। यादव ने बताया कि भारत में इसलिए शिकार नहीं होता कि हमारे देश में उसकी मांग है, बल्कि बाहरी देशों की मांग के कारण भारत में बाघों का शिकार होता है। हालांकि, टेक्नोलॉजी, निगरानी और गश्त के कारण भारत में बाघों के शिकार में काफी गिरावट आई है।

100 प्रतिशत बाघ सुरक्षित होंगे यह कहना मुश्किल है

यादव ने बताया कि हम यह नहीं कह सकते कि शिकार शून्य कर दिया जाएगा। ऐसा काफी मुश्किल है। विश्व भर के 70 प्रतिशत बाघ भारत में हैं। इतने सारे बाघों के साथ यह कहना मुश्किल है कि हमारे सभी क्षेत्र 100 प्रतिशत सुरक्षित हैं। वरिष्ठ वन अधिकारी ने कहा कि प्रोजेक्ट टाइगर सालाना 45 लाख स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का साधन है। प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलीफैंट के फंड मर्ज करने के सरकार के फैसले के सवाल पर अधिकारियों ने कहा कि दोनों योजनाओं में 80 प्रतिशत क्षेत्र आम है, इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा।

 

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