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अगर भारत न देता ये 7 चीजें तो दुनिया अधूरी सी रह जाती
बीबीसी / हिन्दी
Updated Sun, 17 Sep 2017 04:09 PM IST
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भारत दुनिया भर में अपनी संस्कृति, पाक शैली और विविधता के लिए जाना जाता है। भारत आबादी के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। इस देश ने कई महान हस्तियों को जन्म दिया। इसके साथ ही भारत ने दुनिया को कई ऐसी चीजें दीं जिससे लोगों का जीवन सुगम बना।
योग
आज की तारीख में दुनिया भर में योग काफी लोकप्रिय है। संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को विश्व योग दिवस घोषित किया है। आप किसी भी अच्छे जिम में जाइए तो वहां योग विशेषज्ञ मिल जाएंगे। योग के बारे कहा जाता है कि यह भारतीय इतिहास के पूर्व-वैदिक काल से ही प्रचलन में था। इसकी जड़ें हिन्दू, बौद्ध और जैन संस्कृति से है। अब खुद को फिट रखने के लिए दुनिया भर में योग प्रचलन में आ गया है। पश्चिम में योग को स्वामी विवेकानंद (1863-1903) ने फैलाया था।
रेडियो प्रसारण
सामान्य तौर पर नोबेल पुरस्कार विजेता इंजीनियर और खोजकर्ता गुलइलमो मार्कोनी को रेडियो प्रसारण का जनक माना जाता है। हालांकि भारतीय वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बोस ने इससे पहले मिलीमीटर रेंज रेडियो तरंग माइक्रोवेव्स का इस्तेमाल बारूद को सुलगाने और घंटी बजाने में किया था। इसके चार साल बाद लोहा-पारा-लोहा कोहिरर टेलिफोन डिटेक्टर के तौर पर आया और यह वायरलेस रेडियो प्रसारण के आविष्कार का अग्रदूत बना। 1978 में भौतिकी के नोबेल विजेता सर नेविल मोट ने कहा था कि बोस अपने समय से 60 साल आगे थे।
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फाइबर ऑप्टिक्स
क्या आप ऐसी दुनिया की कल्पना कर सकते हैं जहां आप अपने दोस्त की बिल्ली का प्यारा वीडियो या अपने ईमेल के इनबॉक्स में मर्दानगी बढ़ाने वाले उत्पादों के लेटेस्ट ऑफर न देख सकें? जाहिर है जब इंटरनेट की दुनिया नहीं थी तो ये सारी चीजें संभव नहीं थीं। लेकिन फाइबर ऑप्टिक्स के आने बाद वेब, ट्रांसपोर्ट, टेलिफोन संचार और मेडिकल की दुनिया में क्रांतिकारी परिवर्तन आए।
नरिंदर सिंह कपानी पंजाब के मोगा में जन्मे एक भौतिक विज्ञानी थे। दुनिया भर में इन्हें ऑप्टिक्स फाइबर का जनक माना जाता है। 1955 से 1965 के बीच नरिंदर सिंह ने कई टेक्निकल पेपर लिखे। इनमें से एक पेपर 1960 में साइंटिफिक अमरीकन में प्रकाशित हुआ था। इस पेपर ने फाइबर ऑप्टिक्स को स्थापित करने में मदद की थी।
नरिंदर सिंह कपानी पंजाब के मोगा में जन्मे एक भौतिक विज्ञानी थे। दुनिया भर में इन्हें ऑप्टिक्स फाइबर का जनक माना जाता है। 1955 से 1965 के बीच नरिंदर सिंह ने कई टेक्निकल पेपर लिखे। इनमें से एक पेपर 1960 में साइंटिफिक अमरीकन में प्रकाशित हुआ था। इस पेपर ने फाइबर ऑप्टिक्स को स्थापित करने में मदद की थी।
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सांप सीढ़ी
आज के आधुनिक कंप्यूटर गेम्स को भारत के सांप-सीढ़ी खेल से प्रेरित कहा जाता है। भारत का यह खेल इंग्लैंड में काफी लोकप्रिय हुआ। इस खेल की उत्पति का संबंध हिन्दू बच्चों में मूल्यों को सिखाने के तौर पर देखा जाता है। यहां सीढ़ियों को सदाचार और सांप को शैतान के रूप में देखा जाता है।
ऐतिहासिक रूप से इसे मोक्ष के रूप में देखा जाता है जिसका संबंध वैकुंठ यानी स्वर्ग से है। हालांकि 19वीं शताब्दी में जब यह औपनिवेशिक भारत में आया तो ब्रिटिश बाजार में इससे नैतिकता वाले पक्षों को हटा दिया गया था।
ऐतिहासिक रूप से इसे मोक्ष के रूप में देखा जाता है जिसका संबंध वैकुंठ यानी स्वर्ग से है। हालांकि 19वीं शताब्दी में जब यह औपनिवेशिक भारत में आया तो ब्रिटिश बाजार में इससे नैतिकता वाले पक्षों को हटा दिया गया था।