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चिंताजनक: पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में दिल की बीमारी का प्रतिशत 2-3 गुना
Fri, 03 Jun 2022 05:51 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 03 Jun 2022 05:51 AM IST
सार
दिल का दौरा पड़ने के वजहों पर उन्होंने कहा कि लोग जेनेटिक कारणों के चलते कोरोनरी आर्टिलरी बीमारी से ग्रस्त हो सकते हैं। इसके अलावा गतिहीन लाइफस्टाइल और व्यायाम की कमी का भी इस बीमारी में अहम भूमिका है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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विस्तार
प्रसिद्ध गायक केके के दिल का दौरा पड़ने से निधन से पूरा देश सकते में है। शीर्ष डॉक्टरों ने देश में दिल की बीमारियों को लेकर आगाह किया है। देश में पश्चिमी देशों की तुलना में इसका प्रतिशत 2-3 गुना अधिक है।
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मेदांता अस्पताल के चेयरमैन और एमडी डॉ. नरेश त्रेहन ने कहा कि केके जैसा 50 या इससे अधिक उम्र का युवा व्यक्ति, जिसे कोई बड़ी समस्या नहीं थी, अचानक मर जाता है। ऐसे कई उदाहरण है जिसमें एक स्वस्थ व्यक्ति सोने जाता है लेकिन जागता नहीं है। यह सब कोरोनरी आर्टिलरी बीमारी और उच्च रक्तचाप के कारण होता है। ये साइलेंट किलर हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम दुनिया के लोगों की तुलना में भारतीयों में दिल की बीमारी होने का खतरा 2 से 3 गुना अधिक रहता है।
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साथ ही उन्होंने दिल की बीमारी समेत कई अन्य बीमारियों की एक वजह जेनेटिक भी बताई। कहा कि यदि परिवार में किसी को दिल की बीमारी है तो आपको अपने जींस को पहचानना चाहिए। इससे आपको पता चल सकता है कि आपको इसका खतरा हो सकता है। यदि परिवार में डायबिटीज है तो बच्चों को डायबिटीज होने का दोगुना खतरा होता है।
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25 की उम्र में पहली जांच कराएं
दिल का दौरा पड़ने के वजहों पर उन्होंने कहा कि लोग जेनेटिक कारणों के चलते कोरोनरी आर्टिलरी बीमारी से ग्रस्त हो सकते हैं। इसके अलावा गतिहीन लाइफस्टाइल और व्यायाम की कमी का भी इस बीमारी में अहम भूमिका है। यदि परिवार में किसी को दिल की बीमारी या डायबिटीज या फिर दोनों थे तो आपको 25 साल की उम्र में पहली जांच करानी चाहिए।