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मिसाइल की दुनिया के सबसे ताकतवर ग्रुप में शामिल हुआ भारत, जानें क्या होंगे फायदे

Mon, 27 Jun 2016 04:08 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 27 Jun 2016 04:08 PM IST
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india got official entry in MTCR, it will increase missile power of india
- फोटो : ANI

परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में शामिल होने से वंचित रहने के तीन दिन बाद आज सोमवार को भारत मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर) का सदस्य बन गया है। विदेश सचिव एस जयशंकर फ्रांस, नीदरलैंड और लक्जमबर्ग के राजदूतों की मौजूदगी में एमटीसीआर में शामिल होने के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए।

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विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारत आज सुबह एमटीसीआर में शामिल हो गया, इस समूह के 35वें सदस्य के रूप में भारत का प्रवेश अंतरराष्ट्रीय अप्रसार के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में परस्पर लाभकारी होगा। एमटीसीआर दुनिया के चार महत्वपूर्ण परमाणु प्रौद्योगिकी निर्यात करने वाले महत्वपूर्ण देशों के समूह में से एक है।
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चीन और कुछ अन्‍य देशों के कड़े विरोध की वजह से एनएसजी में जगह बना पाने में नाकाम भारत को एमटीसीआर से कई फायदे होंगे। अमेरिका के साथ हुई न्‍यूक्लियर डील के बाद से ही भारत निर्यात कंट्रोल करने वाली संस्‍थाओं जैसे एनएसजी, एमटीसीआर, द ऑस्‍ट्रेलिया ग्रुप और द वासेनार अरेंजमेंट का हिस्‍सा बनने की कोशिश में था।
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आप को बता दें कि यह समूह परंपरागत, न्‍यूक्लियर, बायालॉजिकल एंड केमिकल वेपंस तथा तकनीक को रेगुलेट करते हैं। एमटीसीआर की सदस्‍यता मिलने के बाद भारत हाई-एंड मिसाइल टेक्‍नोलॉजी खरीद पाएगा तथा रूस के साथ अपने संयुक्‍त उपक्रमों को भी बढ़ावा दे सकेगा। 

पूर्ण रॉकेट सिस्‍टम, मानव रहित हवाई वाहन टेक्‍नोलॉजी के प्रसार पर रोक लगाता है एमटीसीआर

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एमटीसीआर उन मिसाइलों, पूर्ण रॉकेट सिस्‍टम, मानव रहित हवाई वाहन और संबंधित टेक्‍नोलॉजी के प्रसार पर रोक लगाता है तो 500 किलोग्राम के पेलोड को कम से कम 300 किलोमीटर तक ले जाने में सक्षम हैं। साथ ही यह सामूहिक विनाश वाले हथियारों के नियंत्रण के लिए भी काम करता है।

भारत के एमटीसीआर में शामिल होने की कोशिशों को तब बल मिला, जब देश ने हेग कोड ऑफ कंडक्‍ट में शामिल होने की हामी भरी। यह बैलिस्टिक मिसाइलों के अप्रसार से जुड़ा समूह है। 2015 तक भारत की सदस्‍यता में इटली ने इटैलियन मरीन को भारत में हिरासत में लिए जाने की वजह से अडंगा लगा रखा था।

जब 29 मई को दूसरा मरीन, सल्‍वाटोर गिरोन रोम वापस लौटा, तब इटली ने सदस्‍यता को हरी झंडी दिखाई। 

चीन-पाकिस्तान से पहले एमटीसीआर में शामिल हुआ भारत

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एमटीसीआर का उद्देश्य मिसाइलों के प्रसार को प्रतिबंधित करना, रॉकेट सिस्टम को पूरा करने के अलावा मानव रहित जंगी जहाजों पर 500 किलोग्राम भार के प्रक्षेपास्त्र को 300 किलोमीटर तक ले जाने की क्षमता वाली तकनीक को बढ़ावा देना है।

व्यापक विनाश वाले हथियारों और तकनीक पर पाबंदी लगाना इस समूह का उद्देश्य है। एमटीसीआर में 34 देश शामिल हैं। यह सभी देश प्रमुख मिसाइल निर्माता हैं। आप को बता दें कि भारत ने एमटीसीआर सदस्यता के लिए पिछले वर्ष आवेदन किया था।

एमटीसीआर की स्थापना 1987 में हुई थी। फ्रांस, जर्मनी, जापान, ब्रिटेन, अमेरिका, इटली और कनाडा इसके संस्थापक सदस्य थे। हालांकि चीन और पाकिस्तान इस समूह के सदस्य नहीं हैं।
 

Published by- Amit kumar

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