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Antarctica Day: भारत का पहला अंटार्कटिका मिशन था टॉप सीक्रेट, सदस्य बोले- जेम्स बॉन्ड फिल्म जैसा था
Fri, 01 Dec 2023 03:07 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी
Published by: नितिन गौतम
Updated Fri, 01 Dec 2023 03:07 PM IST
सार
भारतीय वैज्ञानिकों ने गोवा से अपने मिशन की शुरुआत की थी और साल 1983 में भारत का पहला वैज्ञानिक बेस स्टेशन अंटार्कटिका में स्थापित किया गया था। इसे दक्षिण गंगोत्री नाम दिया गया।
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अंटार्कटिका में मौजूद भारतीय बेस
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
भारत को अंटार्कटिका पर अपना वैज्ञानिक बेस स्थापित किए हुए 40 साल हो गए हैं। उस मिशन में शामिल सदस्यों ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम में याद करते हुए बताया कि भारत के इस मिशन को टॉप सीक्रेट रखा गया था और यहां तक कि मिशन में शामिल लोगों को परिजनों को भी इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी। साथ ही मिशन में शामिल लोगों को ट्रेनिंग देने वाले लोगों को भी इसकी कोई जानकारी नहीं थी।
पूरी तरह गुप्त रखा गया था भारत का पहला अंटार्कटिका मिशन
बता दें कि भारत का पहला अंटार्कटिका मिशन साल 1981 में शुरू किया गया था। जिसमें 21 लोग शामिल थे। अंटार्कटिका मिशन पर जाने वाली टीम का नेतृत्व डॉ. एस जेड कासिम ने किया था। भारतीय वैज्ञानिकों ने गोवा से अपने मिशन की शुरुआत की थी और साल 1983 में भारत का पहला वैज्ञानिक बेस स्टेशन अंटार्कटिका में स्थापित किया गया था। इसे दक्षिण गंगोत्री नाम दिया गया। 1 दिसंबर का दिन दुनियाभर में अंटार्कटिका दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इस मौके पर गोवा में नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओसीन रिसर्च (NCPOR) ने एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इसी कार्यक्रम में भारत के अंटार्कटिका मिशन में शामिल लोगों ने मिशन से जुड़ी यादें साझा की।
मिशन में शामिल रहे अमित्व सेन गुप्ता ने बताया कि 'मिशन को लेकर बैठकें बंद दरवाजों के पीछे होती थी। इन बैठकों में कैबिनेट सचिव, नेवी चीफ स्तर के अधिकारी शामिल होते थे। हमें ऐसा लगता था कि हम किसी जेम्स बॉन्ड सरीखी फिल्म में हैं।' उन्होंने बताया कि मिशन में शामिल रहे लोगों को अपने परिवार को भी इसके बारे में ना बताने के निर्देश दिए थे। मिशन में शामिल रहे एसजी प्रभु मातोंडकर ने बताया कि उनमें मिशन को लेकर ऐसा भाव था कि वह देश के लिए कुछ कर रहे हैं।
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सोवियत संघ के मिशन के साथ भी जा चुके थे भारतीय वैज्ञानिक
बता दें कि भारत के पहले अंटार्कटिका मिशन से पहले भी भारतीय वैज्ञानिक सोवियत संघ के मिशन के तहत 1971 में भी अंटार्कटिका जा चुके थे। इस दल में डॉ. परमजीत सिंह शेरा शामिल थे। शेरा ने कार्यक्रम के दौरान बताया कि भारत के महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई ने उन्हें सोवियत मिशन पर जाने के लिए प्रेरित किया था। अंटार्कटिका में भारतीय बेस बनाने वाली टीम के प्रमुख रहे डॉ. हर्ष के गुप्ता ने बताया कि तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने भी बेस बनाने में काफी मदद की थी।
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पूरी तरह गुप्त रखा गया था भारत का पहला अंटार्कटिका मिशन
बता दें कि भारत का पहला अंटार्कटिका मिशन साल 1981 में शुरू किया गया था। जिसमें 21 लोग शामिल थे। अंटार्कटिका मिशन पर जाने वाली टीम का नेतृत्व डॉ. एस जेड कासिम ने किया था। भारतीय वैज्ञानिकों ने गोवा से अपने मिशन की शुरुआत की थी और साल 1983 में भारत का पहला वैज्ञानिक बेस स्टेशन अंटार्कटिका में स्थापित किया गया था। इसे दक्षिण गंगोत्री नाम दिया गया। 1 दिसंबर का दिन दुनियाभर में अंटार्कटिका दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इस मौके पर गोवा में नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओसीन रिसर्च (NCPOR) ने एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इसी कार्यक्रम में भारत के अंटार्कटिका मिशन में शामिल लोगों ने मिशन से जुड़ी यादें साझा की।
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मिशन में शामिल रहे अमित्व सेन गुप्ता ने बताया कि 'मिशन को लेकर बैठकें बंद दरवाजों के पीछे होती थी। इन बैठकों में कैबिनेट सचिव, नेवी चीफ स्तर के अधिकारी शामिल होते थे। हमें ऐसा लगता था कि हम किसी जेम्स बॉन्ड सरीखी फिल्म में हैं।' उन्होंने बताया कि मिशन में शामिल रहे लोगों को अपने परिवार को भी इसके बारे में ना बताने के निर्देश दिए थे। मिशन में शामिल रहे एसजी प्रभु मातोंडकर ने बताया कि उनमें मिशन को लेकर ऐसा भाव था कि वह देश के लिए कुछ कर रहे हैं।
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सोवियत संघ के मिशन के साथ भी जा चुके थे भारतीय वैज्ञानिक
बता दें कि भारत के पहले अंटार्कटिका मिशन से पहले भी भारतीय वैज्ञानिक सोवियत संघ के मिशन के तहत 1971 में भी अंटार्कटिका जा चुके थे। इस दल में डॉ. परमजीत सिंह शेरा शामिल थे। शेरा ने कार्यक्रम के दौरान बताया कि भारत के महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई ने उन्हें सोवियत मिशन पर जाने के लिए प्रेरित किया था। अंटार्कटिका में भारतीय बेस बनाने वाली टीम के प्रमुख रहे डॉ. हर्ष के गुप्ता ने बताया कि तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने भी बेस बनाने में काफी मदद की थी।