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भारत का बुलेट ट्रेन का सपना जल्द होगा साकार, रेलवे ने शुरू की तैयारी

Thu, 30 Aug 2018 06:52 PM IST
नवनीत शरण, अमर उजाला, अहमदाबाद
नवनीत शरण, अमर उजाला, अहमदाबाद Updated Thu, 30 Aug 2018 06:52 PM IST
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India dream of bullet train will soon be ready, railway ready to start

बुलेट रेल प्रोजेक्ट अब रफ्तार पकड़ने को तैयार है। रेलवे अपनी तरफ से पूरे तरीके से तैयारी में जुट गई है, हालांकि अभी जापान से पहली रकस्त आने का इंतजार है। इस प्रोजेक्ट के फिसिबिलिटी रिपोर्ट की माने तो प्रतिदिन 18 हजार यात्री सफ़र का आनंद ले सकेंगे जो आने वाले सालो में बढ़ कर प्रतिदिन 1 लाख तक बढ़ाने की योजना है। 

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इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत है की इसका हर स्टेशन एक मल्टीमोडेल ट्रांजिट हब होगा। यानि यातयात के हर साधन को स्टेशन से जोड़ा जायेगा। स्टेशन पर पहुचने के लिए बस, मेट्रो, ऑटो, रेलवे स्टेशन को जोड़ा जायेगा। इसका फायदा यह होगा की स्टेशन पर पहुंचाने के लिए ट्रैफिक जाम में यात्री नहीं फसेंगे। यह सहर के बीचोबीच होगा लिहाजा एअरपोर्ट की तरह शहर से लंबी दूरी में वक़्त जाया नहीं होगा। 
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इसी तरह का पहला ट्रांजिट हब साबरमती में तैयार किया जा रहा है। ग्रीन बिल्डिंग तैयार करने के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। इस हब को कॉमर्शियल रूप से भी विकसित किया जा रहा है। हब के को 7 मंजिल बनाया जा रहा है जिसमे होटल व कार्यालय भी बनेगा। नेशनल हाई स्पीड कॉरिडोर के अधिकारियों के अनुसार नवंबर से इसका काम शुरू कर दिया जायेगा। 
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हालांकि जमीनी हकीकत को देखा जाये तो यह प्रोजेक्ट एक साल लेट हो सकता है। पिछले दिनों दावा किया गया था की 2022 में प्रोजेक्ट का काम पूरा कर लिया जायेगा लेकिन अब बुलेट ट्रेन को 2023 तक ट्रैक पर उतारने की बात की जा रही है। 

प्रतिदिन 35 फेरे लगाएगी बुलेट ट्रेन 

फिसिबिलिटी रिपोर्ट के अनुसार साबरमती से मुम्बई के बीच बुलेट ट्रेन प्रतिदिन 70 फेरे लगाएगी। 20 मीनट के अंतराल पर ट्रेन मिलेगी। योजना है कि प्रति 8 मिनट में यात्रियों को स्टेशन से यह ट्रेन मिले। 
 
भूकंप रोधी व्यवस्था 

कछ के क्षेत्र में भूकंप व तेज रफ़्तार हवा से बचाने के लिए इस प्रोजेक्ट पर ध्यान दिया जा रहा है। इसके कॉरिडोर को ऑटोमैटिक पॉवर शट डाउन तकनीक पर तैयार किया जायेगा। भूकंप का अहसास होते ही ट्रेन ट्रैक पर ही रुक जायेगी। तेज हवा में टैन चलाने में परेशानी न हो इसके लिए ऐरो डायनामिक डिजाइन से हवा के दबाव को कम किया जायेगा। 


पर्यावरण का रखा जा रहा है ख्याल 

बुलेट रेल ट्रैक के बीच में भूमि अधग्रहन की तरह ही आड़े आ रहे पेड़ का खास ख्याल रखा जा रहा है। अहमदाबाद से साबरमती के बीच करीब ढाई हजार पेड़ को आधुनिक मशीन से एक जगह से दुसरे जगह प्रत्यारोपित किया जा रहा है। 

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