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अडानी की मदद से चीन से मुकाबले की तैयारी, भारत बना रहा है नए बंदरगाह

Thu, 28 Jul 2016 04:37 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 28 Jul 2016 04:37 PM IST
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India doubles down on container hub ports with eye on China

अडानी ग्रुप की मदद से भारत सरकार केरल में कंटेनर बंदरगाहों की संख्या दो गुनी करने जा रही है। इन बंदरगाहों से देश के हित जुड़े हैं, लेकिन माना जा रहा है कि ऐसा चीन को जवाब देने के लिए किया जा रहा। फिलहाल केरल के विझिनजैम में अडानी ग्रुप ने पहले बंदरगाह को बनाने की शुरुआत कर दी है। भारत सरकार के लिए यहा योजना बीते 25 साल से कल्पना सरीखी थी, जो अब पूरी होगी।

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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक इस क्षेत्र में सरकार 4 बिलियन डॉलर खर्च कर चीन के जवाब में एक और शिपिंग हब बनाएगी। 
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विझिनजैम में बंदरगाह के लिए सरकार अडानी ग्रुप को 16 बिलियन रुपए देगी। जहां से एशिया भर में समंदर के रास्ते कारोबार किया जाएगा।

2021 तक समंदर के रास्ते पर होगा भारत का दबदबा

India doubles down on container hub ports with eye on China

नया बंदरगाह जिस इलाके में बनाया जा रहा है वह करीब साढ़े सात हजार किलोमीटर का मुख्य समुद्री मार्ग है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मार्ग पर बंदरगाह बनाकर कारोबार में इजाफा करना चाहते है, इसलिए कंटेनर बंदरगाह बनाए जा रहे हैं।

मोदी सरकार 2021 तक चाहती है कि उसके बनाए बंदरगाहों से श्रीलंका, दुबई और सिंगापुर की तरह कारोबार किया जा सके।

हाल फिलहाल घरेलू ट्रांस शिपमेंट बंदरगाह न होने से कंटेनरों को लाने-लेजाने में भारी मशक्कत की सामना करना पड़ता है।

चीन भी लगा है कोशिशों में

India doubles down on container hub ports with eye on China

सरकार को उम्मीद है कि नए बंदरगाह बनने से कंपनियों को करोड़ों रुपए फायदा होगा, क्योंकि अभी कंपनियों को माल को लाने-लेजाने के लिए भारी मालभाड़ा चुकाना पड़ता है। अभी इन कंरपनियों को दक्षिण एशिया, चीन, श्रीलंका के कोलंबो और हंबनतोता पर निर्भर करना पड़ता है।

अडानी ग्रुप की मानें तो 2018 तक विझिनजैम का बंदरगाह शुरू हो जाएगा। जानकारों की मानें तो नए बंदरगाहों के लिए विदेशी क्लाइंट जुटाना मुश्किल होगा, उन्हें उनके सामने शुरू में डिस्काउंट रखना होगा।

चीन भी पहले से विझिनजैम में एक भारतीय कंपनी से मिलकर बंदरगाह बनाने की कोशिशों में लगा है, लेकिन सुरक्षा कारणों से भारत सरकार ने उसे यह अनुमति नहीं दी है। चीन ने चीन-पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरीडोर के तहत पाकिस्तान के ग्वादर के बंदरगाह में पैसे लगाए हैं।

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