MEA: 'न कोई प्लान, न कोई खतरा, सिर्फ अफवाहें फैलाई गईं'; यूएई से भारतीयों की निकासी की खबरों को किया खारिज
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यूएई या फुजैरा से भारतीय नागरिकों की निकासी की कोई योजना नहीं है। विदेश मंत्रालय ने मीडिया रिपोर्ट को फर्जी बताते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
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विदेश मंत्रालय (MEA) ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया गया था कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) मिलकर फुजैरा पोर्ट के जरिए भारतीय श्रमिकों को निकालने की योजना बना रहे हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट कहा कि इस तरह की किसी भी योजना का कोई आधार नहीं है और न ही यूएई या फुजैरा से भारतीय नागरिकों की निकासी को लेकर कोई निर्णय लिया गया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संबंधित खबर पूरी तरह गलत और भ्रामक है। उन्होंने मीडिया से अपील की कि वे ऐसी खबरों की पुष्टि MEA के फैक्ट चेक प्लेटफॉर्म से जरूर करें।
MEA Fact Check ने बताया फर्जी खबर
विदेश मंत्रालय की फैक्ट चेक टीम ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर भी इस खबर को खारिज करते हुए इसे फेक न्यूज करार दिया। पोस्ट में कहा गया "इस खबर का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है। किसी भी प्रकार की निकासी योजना नहीं बनाई जा रही है। नागरिकों से अपील है कि वे ऐसी झूठी और भ्रामक खबरों से सावधान रहें।"
पश्चिम एशिया स्थिति पर भारत का रुख
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भारत के रुख को दोहराते हुए कहा कि क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए बातचीत और कूटनीति ही सबसे सही रास्ता है। इसके अलावा BRICS विदेश मंत्रियों की आगामी बैठक को लेकर भी जानकारी दी गई, जो भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी। उन्होंने बताया कि इसमें ब्रिक्स देशों के साथ-साथ साझेदार देशों के विदेश मंत्री भी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस बैठक में शामिल होने वाले नेताओं की जानकारी साझा की जाएगी। जायसवाल ने पश्चिम एशिया के हालात पर भारत का रुख दोहराते हुए कहा कि इस क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए बातचीत और कूटनीति ही सबसे सही रास्ता है।
'कई देशों से हो रही ऊर्जा की आपूर्ति'
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भारत का लगातार प्रयास रहा है कि ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों को अलग-अलग देशों में बढ़ाया जाए। उन्होंने बताया कि यह भारत की स्थायी नीति और तरीका रहा है। उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में कई देशों से ऊर्जा खरीद रहा है और यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
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