{"_id":"6a9505bce6a38a1f1e04bafb","slug":"india-defence-news-naval-ship-ins-nipun-diving-support-vessel-commissioned-indian-navy-features-explained-news-2026-08-31","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"एक्सप्लेनर: नौसेना से जुड़ा 80% स्वदेशी तकनीक से बना INS निपुण, हिंद महासागर में कैसे बढ़ाएगा भारत का दबदबा?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
एक्सप्लेनर: नौसेना से जुड़ा 80% स्वदेशी तकनीक से बना INS निपुण, हिंद महासागर में कैसे बढ़ाएगा भारत का दबदबा?
Mon, 31 Aug 2026 10:10 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 31 Aug 2026 10:10 AM IST
सार
भारतीय नौसेना में डाइविंग सपोर्ट वेसल आईएनएस निपुण आज शामिल हो गया। जानिए सैचुरेशन डाइविंग, डीएसआरवी मदर शिप और गहरे समुद्र में पनडुब्बी बचाव की इसकी बेजोड़ तकनीक और खासियतें।
विज्ञापन
आईएनएस निपुण।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारतीय नौसेना के बेड़े में एक नया और बेहद शक्तिशाली सदस्य शामिल हो गया है, जिससे भारत की समुद्री सुरक्षा और गहरे समुद्र में पनडुब्बी बचाव अभियानों को एक नया आयाम मिलने वाला है। भारतीय नौसेना के स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल (डीएसवी) आईएनएस निपुण को आज (31 अगस्त 2026) को मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में आयोजित होने वाले एक औपचारिक समारोह में कमीशन (सेवा में शामिल) किया गया।
आइये जानते हैं कि यह आईएनएस निपुण क्या है? यह नौसेना के लिए इतना खास क्यों है? इसकी बनावट और विशेषताओं को लेकर अब तक क्या-क्या सामने आया है? इसके अलावा निपुण की खासियतें क्या-क्या हैं? आइये जानते हैं...
विज्ञापन
आइये जानते हैं कि यह आईएनएस निपुण क्या है? यह नौसेना के लिए इतना खास क्यों है? इसकी बनावट और विशेषताओं को लेकर अब तक क्या-क्या सामने आया है? इसके अलावा निपुण की खासियतें क्या-क्या हैं? आइये जानते हैं...
विज्ञापन
पहले जानें- क्या है आईएनएस निपुण?
आईएनएस निपुण भारतीय नौसेना का निस्तार-क्लास का डाइविंग सपोर्ट जहाज है, जिसका निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनी हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल), विशाखापत्तनम की ओर से किया गया है और इसे 30 जुलाई 2026 को भारतीय नौसेना को सौंपा गया था, जिसके बाद से ही इसका परीक्षण और इसे नौसेना में शामिल करने की अंतिम तैयारियां जारी थीं।आईएनएस निपुण का कमीशन होना रक्षा क्षेत्र में भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत घरेलू जहाज निर्माण क्षमता में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर है। संस्कृत शब्द निपुण का अर्थ होता है- 'किसी कठिन कार्य में बेहद कुशल या पारंगत' और यह पोत अपनी क्षमताओं से इस नाम को पूरी तरह सार्थक करेगा।
अब जानें- कैसी है आईएनएस निपुण की बनावट, क्या हैं तकनीकी विशेषताएं?
आईएनएस निपुण की बनावट और खासियत।
- फोटो : अमर उजाला
- इस जटिल और विशेष रूप से डिजाइन किए गए पोत के निर्माण में 75% से 80% तक स्वदेशी कल-पुर्जों और प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया है। इसका डिजाइन और निर्माण इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (आईआरएस) के वर्गीकरण नियमों के तहत किया गया है।
- नौसेना की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इस पोत की असली ताकत इसकी गति नहीं, बल्कि समुद्र में अत्यधिक लंबे समय तक टिके रहने का इसका असाधारण धैर्य है, जो इसे गहरे समुद्र के जटिल अभियानों को पूरा करने में सक्षम बनाता है।
क्या हैं आईएनएस निपुण की सबसे बड़ी ताकत और क्षमताएं?
1. सैचुरेशन डाइविंग सिस्टमगहरे समुद्र में सामान्य गोताखोरी गोताखोरों के शरीर पर भारी दबाव डालती है और बार-बार ऊपर-नीचे आने से उन्हें जानलेवा बीमारी- 'डीकंप्रेशन सिकनेस' या जिसे 'द बेंड्स' भी कहते हैं, हो सकती है। आईएनएस निपुण पर गोताखोरों के रहने के लिए एक विशेष दबावयुक्त चेंबर बनाया गया है, जो समुद्र की गहराई जितना दबाव अंदर बनाए रखता है। गोताखोर इस चेंबर में रहकर बिना किसी शारीरिक नुकसान के कई दिनों या हफ्तों तक गहराई में लगातार मरम्मत, खोज और अन्य जटिल काम के लिए तैयार रह सकते हैं। इसके साथ ही यह पोत हीलियम-ऑक्सीजन (हीलियॉक्स) मिश्रित गैस के माहौल में भी गोताखोरों को तैयार करता है।
आईएनएस निपुण कैसे गहरे समुद्र में काम करता है।
- फोटो : अमर उजाला
2. पनडुब्बी बचाव के लिए 'मदर शिप'
अगर समुद्र की गहराई में कोई पनडुब्बी दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है, तो उसमें फंसे नाविकों की जान बचाने के लिए यह पोत गहन जलमग्नता बचाव वाहन (डीएसआरवी) के लिए एक मदर शिप यानी मुख्य जहाज की भूमिका निभाएगा। यह डीएसआरवी समुद्र के नीचे फंसे नाविकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए निपुण से ही लॉन्च और नियंत्रित किया जाएगा।
3. डायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टम
गहरे पानी में गोताखोरी या बचाव कार्य के समय जहाज का बिना हिले-डुले एक ही जगह पर बने रहना बेहद जरूरी है। आईएनएस निपुण आधुनिक कंप्यूटर, सैटेलाइट नेविगेशन, सेंसर और विशेष थ्रस्टर्स की मदद से बहती लहरों और हवा के बीच भी खुद को एक ही स्थान पर बिल्कुल स्थिर रख सकता है।
अगर समुद्र की गहराई में कोई पनडुब्बी दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है, तो उसमें फंसे नाविकों की जान बचाने के लिए यह पोत गहन जलमग्नता बचाव वाहन (डीएसआरवी) के लिए एक मदर शिप यानी मुख्य जहाज की भूमिका निभाएगा। यह डीएसआरवी समुद्र के नीचे फंसे नाविकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए निपुण से ही लॉन्च और नियंत्रित किया जाएगा।
3. डायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टम
गहरे पानी में गोताखोरी या बचाव कार्य के समय जहाज का बिना हिले-डुले एक ही जगह पर बने रहना बेहद जरूरी है। आईएनएस निपुण आधुनिक कंप्यूटर, सैटेलाइट नेविगेशन, सेंसर और विशेष थ्रस्टर्स की मदद से बहती लहरों और हवा के बीच भी खुद को एक ही स्थान पर बिल्कुल स्थिर रख सकता है।
4. रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स सिस्टम से लैस
गहरे पानी में जहां गोताखोरों के लिए खतरा ज्यादा होता है, वहां निपुण से नियंत्रित होने वाले रिमोट ऑपरेटेड व्हीकल (आरओवी) भेजे जाते हैं। यह वह तकनीक है, जिनमें समुद्र-महासागर की गहराइयों में इंसान की जगह एक रोबोट को उतारा जाता है। कैमरों और उपकरणों से लैस ये रोबोट गहरे समुद्र से लाइव तस्वीरें भेजते हैं और गोताखोरों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
5. लाइफ सपोर्ट और मेडिकल अस्पताल
गहरे समुद्र में काम करने के दौरान दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है। इसके अलावा समुद्र में अगर पनडुब्बी के साथ कोई हादसा हो जाता है तो उसमें नौसैनिकों को भारी नुकसान हो सकता है। ऐसे में बचाए गए नौसैनिकों को सही उपचार मुहैया कराने के लिए आईएनएस निपुण पर आठ बिस्तरों वाला एक आधुनिक अस्पताल, आईसीयू, एक ऑपरेशन थिएटर और टेलीमेडिसिन जैसी उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा पोत पर आपातकालीन परिवहन और राहत कार्यों के लिए एक समर्पित हेलीकॉप्टर डेक भी मौजूद है।
गहरे पानी में जहां गोताखोरों के लिए खतरा ज्यादा होता है, वहां निपुण से नियंत्रित होने वाले रिमोट ऑपरेटेड व्हीकल (आरओवी) भेजे जाते हैं। यह वह तकनीक है, जिनमें समुद्र-महासागर की गहराइयों में इंसान की जगह एक रोबोट को उतारा जाता है। कैमरों और उपकरणों से लैस ये रोबोट गहरे समुद्र से लाइव तस्वीरें भेजते हैं और गोताखोरों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
5. लाइफ सपोर्ट और मेडिकल अस्पताल
गहरे समुद्र में काम करने के दौरान दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है। इसके अलावा समुद्र में अगर पनडुब्बी के साथ कोई हादसा हो जाता है तो उसमें नौसैनिकों को भारी नुकसान हो सकता है। ऐसे में बचाए गए नौसैनिकों को सही उपचार मुहैया कराने के लिए आईएनएस निपुण पर आठ बिस्तरों वाला एक आधुनिक अस्पताल, आईसीयू, एक ऑपरेशन थिएटर और टेलीमेडिसिन जैसी उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा पोत पर आपातकालीन परिवहन और राहत कार्यों के लिए एक समर्पित हेलीकॉप्टर डेक भी मौजूद है।
भारत के लिए रणनीतिक रूप से क्यों अहम है यह पोत?
दोनों तटों पर अभेद्य सुरक्षा कवच: भारत की तटरेखा लगभग 7,500 किलोमीटर लंबी है। इस श्रेणी का पहला डाइविंग सपोर्ट वेसल आईएनएस निस्तार जुलाई 2025 में कमीशन होकर विशाखापत्तनम में पूर्वी समुद्री तट पर तैनात है। अब आईएनएस निपुण के मुंबई में पश्चिमी समुद्री तट पर तैनात होने से भारत के दोनों तटों पर एक समान और अभेद्य सुरक्षा चक्र पूरा हो जाएगा।ये भी पढ़ें: नौसेना के बेड़े में शामिल होगा 'निपुण': समुद्र में गोताखोरी से पनडुब्बी बचाव तक करेगा मदद, जानें क्यों है खास
आईएनएस निपुण की खासियतें।
- फोटो : अमर उजाला
साल 2026 में 8वीं बड़ी स्वदेशी उपलब्धि: आईएनएस निपुण इस साल (2026) भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होने वाला आठवां स्वदेशी प्लेटफार्म है। इससे पहले आईएनएस अंजदीप, आईएनएस तारागिरी, आईएनएस दुनागिरी, आईएनएस संशोधक, आईएनएस अग्रे, आईएनएस महेंद्रगिरी और आईएनएस मालवन जैसे युद्धपोत व पोत इस वर्ष नौसेना का हिस्सा बन चुके हैं।
हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ता दबदबा: भारत ने कई अन्य देशों के साथ पनडुब्बी बचाव विशेषज्ञता साझा करने के द्विपक्षीय समझौते किए हैं। आईएनएस निपुण के आने से भारत हिंद महासागर में आपात स्थितियों के दौरान एक विश्वसनीय फर्स्ट रिस्पॉन्डर यानी सबसे पहले मदद पहुंचाने वाला देश बनकर अपनी स्थिति और मजबूत करेगा, जिससे क्षेत्र में देश की सॉफ्ट पावर का भी विस्तार होगा।
हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ता दबदबा: भारत ने कई अन्य देशों के साथ पनडुब्बी बचाव विशेषज्ञता साझा करने के द्विपक्षीय समझौते किए हैं। आईएनएस निपुण के आने से भारत हिंद महासागर में आपात स्थितियों के दौरान एक विश्वसनीय फर्स्ट रिस्पॉन्डर यानी सबसे पहले मदद पहुंचाने वाला देश बनकर अपनी स्थिति और मजबूत करेगा, जिससे क्षेत्र में देश की सॉफ्ट पावर का भी विस्तार होगा।