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भारत-चीन सीमा गतिरोध पर एक और दौर की वार्ता, विदेश मंत्रालय ने कहा- राजनयिक और सैन्य स्तर पर परामर्श जारी रखने के लिए सहमत

Wed, 30 Sep 2020 06:47 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 30 Sep 2020 06:47 PM IST
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India china standoff MEA says India and China reviewed current situation along Line of Actual Control
एलएसी को लेकर अधिकारियों ने की बैठक (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में करीब पांच महीने से जारी सीमा गतिरोध दूर करने के लिए दोनों देशों के बीच बनी पांच सूत्री सहमति के क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित करते हुए बुधवार को एक और दौर की वार्ता की। सीमा मामलों पर परामर्श एवं समन्वय के लिए कार्यकारी तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) के ढांचे के तहत यह डिजिटल वार्ता हुई।

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विदेश मंत्रालय ने बताया कि 'भारत और चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ वर्तमान स्थिति की समीक्षा की और 20 अगस्त को अंतिम परामर्श और समन्वय के लिए कार्यकारी तंत्र (Working Mechanism for Consultation and Coordination) बैठक के बाद से घटनाक्रमों पर विस्तृत चर्चा की। दोनों पक्षों ने इस महीने की शुरुआत में दोनों रक्षा मंत्रियों और विदेश मंत्रियों के बीच बैठकों को महत्व दिया।
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विदेश मंत्रालय ने कहा कि 'भारत और चीन राजनयिक और सैन्य स्तर पर परामर्श जारी रखने के लिए सहमत हुए हैं। वे इस बात पर सहमत हुए हैं कि वरिष्ठ कमांडरों की बैठक का अगला (7वां) दौर एक शुरुआती तारीख में आयोजित किया जाना चाहिए ताकि दोनों पक्ष सैनिकों के शीघ्र और पूर्ण विघटन की दिशा में काम कर सकें।'
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घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि वार्ता के केंद्र में तनाव घटाने का विषय रहा। भारत और चीन ने 10 सितंबर को मॉस्को में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच बनी पांच सूत्री सहमति के क्रियान्वयन के तरीकों पर चर्चा की। बीजिंग में, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने संवाददाताओं से कहा कि दोनों देश चीन-भारत सीमा मामलों पर डब्ल्यूएमसीसी की 19 वीं बैठक कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि जमीन पर लंबित मुद्दों के हल के लिए दोनों विदेश मंत्रियों के बीच मॉस्को में बनी पांच सूत्री सहमति के क्रियान्वयन और सीमा पर तनाव घटाने के विषय पर वार्ता में मुख्य रूप से चर्चा की गई। उल्लेखनीय है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में मॉस्को में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक से अलग अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी।

दोनों देशों के सैनिकों के बीच टकराव की ताजा घटनाओं से पूर्वी लद्दाख में स्थिति बिगड़ने के मद्देनजर यह बैठक हुई थी। बैठक में दोनों पक्ष पांच सूत्री सहमति पर पहुंचे थे, जिनमें सैनिकों को शीघ्रता से पीछे हटाना, तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियों से दूर रहना, सीमा प्रबंधन पर सभी समझौतों एवं प्रोटोकॉल का पालन करना तथा वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति बहाल करने के लिए कदम उठाना शामिल हैं।

बुधवार की वार्ता एलएसी की अवधारणा पर दोनों पक्षों के बीच जुबानी जंग के बीच हुई। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने हाल ही में जोर देते हुए कहा था कि चीन तत्कालीन प्रधानमंत्री चाउ एनलाई द्वारा भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को सात नवंबर 1959 के एक पत्र में प्रस्ताव किए गए एलएसी का पालन करता है।

वहीं, भारत ने मंगलवार को कहा था कि उसने 1959 में एकतरफा रूप से परिभाषित तथाकथित वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को कभी स्वीकार नहीं किया है और चीनी पक्ष सहित सभी इस बारे में जानते हैं। विदेश मंत्रालय ने यह उम्मीद भी व्यक्त की थी कि पड़ोसी देश तथाकथित सीमा की ‘अपुष्ट एकतरफा’ व्याख्या करने से बचेगा।


मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने मुद्दे पर मीडिया के एक सवाल के जवाब में कहा था कि ‘भारत ने कभी भी 1959 में एकतरफा रूप से परिभाषित तथाकथित वास्तविक नियंत्रण रेखा को स्वीकार नहीं किया है। यही स्थिति बरकरार रही है और चीनी पक्ष सहित सभी इस बारे में जानते हैं।’

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