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दो दिन में चीन ने हटाए करीब 200 टैंक, तेजी से खाली कर रहा पैंगोंग त्सो का इलाका: रिपोर्ट

Fri, 12 Feb 2021 08:31 AM IST
स्नेहा बलूनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्नेहा बलूनी Updated Fri, 12 Feb 2021 08:31 AM IST
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india china standoff after pangong lake talk will take place to discuss other friction areas rajnath singh indian army rajyasabha
सीमा पर तैनात टैंक (फाइल फोटो) - फोटो : indian Army

लद्दाख में एलएसी पर भारत-चीन के बीच करीब नौ महीने से जारी तनाव अब कम होने लगा है। इस दौरान चीन ने एक बार फिर चौंकाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, समझौता वार्ता होने के बाद चीन ने महज दो दिन में 200 से अधिक टैंक हटा लिए हैं। माना जा रहा है कि अगले 15 दिन में चीन पैंगोंग त्सो के इलाके को पूरी तरह खाली कर देगा। इसके बाद भारत सरकार अन्य इलाकों को खाली कराने पर जोर देगी। 

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गौरतलब है कि संसद के ऊपरी सदन में गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि चीनी सेना फिंगर आठ से पीछे हटने को तैयार हो गई है। अब अधिकारियों का कहना है कि भारतीय और चीनी सैनिकों का प्रारंभिक विघटन पैंगोंग झील तक सीमित है और दोनों सेनाओं को अपनी असल तैनाती पर वापस आने में और दो हफ्ते का समय लग सकता है।
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एक बार ये प्रक्रिया खत्म हो जाएगी तो 48 घंटों के अंदर एक कॉर्प्स कमांडर-स्तरीय बैठक होगी जिसमें गतिरोध वाले अन्य स्थान जैसे हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और 900 वर्ग किमी डेपसांग मैदान पर चर्चा की जाएगी। रक्षा मंत्री ने राज्यसभा में कहा, 'पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ कुछ अन्य बिंदुओं पर तैनाती और गश्त के संबंध में अभी भी कुछ बकाया मुद्दे हैं। ये चीनी पक्ष के साथ आगे की चर्चा का फोकस होंगे।'

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बेशक डेपसांग में बिल्ड-अप को मौजूदा गतिरोध का हिस्सा नहीं माना जाता है जिसकी शुरुआत पिछले साल मई में हुई थी। भारत ने हालिया सैन्य कमांडर बैठकों के दौरान पूर्वी लद्दाख के सभी मुद्दों को हल करने पर जोर दिया है। इससे पहले 2013 मे यहां भारतीय और चीनी सेना के बीच गतिरोध हुआ था। पैंगोंग झील के दोनों किनारों पर कई स्थानों पर सैनिकों की अत्यधिक निकटता थी, इसने दोनों देशों को गतिरोध खत्म करने की योजना पर काम करने के लिए बढ़ावा दिया।

घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने कहा, 'कई स्थानों पर, सेनाएं लंबे समय तक 50-75 मीटर की निकटता में तैनात थीं। इस स्थिति को खत्म करने के लिए और यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई झड़प न हो, यह निर्णय महत्वपूर्ण था।' भारतीय सेना ने उत्तर में चीनी कार्रवाईयों का जवाब देने के लिए दक्षिणी किनारे की ऊंचाइयों पर कब्जा किया हुआ था। वहीं सितंबर से चीन भारतीय जवानों को वहां से हटाने की कोशिश कर रहा था।

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