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गलवां घाटी में आसमान शांत, लेकिन जमीन पर तनाव चरम पर

Fri, 19 Jun 2020 08:25 AM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी Updated Fri, 19 Jun 2020 08:25 AM IST
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India-China stand-off: Galwan valley skies go quiet, tension simmers on the ground
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : लूजीना खान

भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख की गलवां घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों ने वहां से अपने सैनिकों के पीछे हटने पर रोक लगा दी है। गलवां सेक्टर में दोनों पक्षों के डिवीजनल मिलिट्री कमांडर्स बातचीत कर रहे हैं, लेकिन खुफिया सूचनाओं से पता चलता है कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) छह जून को दोनों पक्षों में कोर कमांडरों द्वारा निर्धारित डी-एस्केलेशन मैट्रिक्स के अनुसार शायद ही पीछे हटी हो।

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यह पूरी तरह से स्पष्ट हो चुका है और विशेषज्ञ भी कह रहे हैं कि पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 (गलवां),  पेट्रोलिंग प्वाइंट 15 (कोंगका ला) और पेट्रोलिंग प्वाइंट 17 (हॉट स्प्रिंग्स) पर चल रहे भारत-चीन गतिरोध को विचार-विमर्श के बाद भी हल होने में सप्ताह लग सकते हैं। पैंगोंग त्सो पर चल रहा विवाद तो सुलझने में इससे भी ज्यादा समय ले सकता है। 
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हालांकि, पूर्वी लद्दाख में कुछ सकारात्मक संकेत सामने आ रहे हैं, जैसे कि चीनी पीएलए वायु सेना ने गुरुवार रात कोई भी फाइटर प्लेन अभियान नहीं किया। साथ ही दोनों सेनाओं ने सीमा के नियमों का पालन किया। दोनों सेनाओं द्वारा सैन्य प्रोटोकॉल निर्धारित करने के सख्त पालन से किसी भी विवाद की संभावना कम हो गई है। 
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यह भी पढ़ें: ‘बायकॉट चाइना’ की अपील के बावजूद भी चाइनीज स्मार्टफोन की भारत में हो रही बंपर बिक्री 

15 जून को हुई हिंसक झड़प के बाद स्थिति सामान्य नजर आ रही है, लेकिन पीएलए ने फिर भी पूरी तैयारी की हुई है। उसने जिनजियांग और तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (टीएआर) में लड़ाकू विमानों, हथियार और मिसाइल सपोर्ट सिस्टम तैनात किया है। 

पीएलए वायु सेना ने अपने जिनजियांग और टीएआर बेस को सक्रिय कर दिया है, जहां से अक्साई चिन इलाके में रात में उसके लड़ाकू विमान उड़ते हुए दिखाई दिए। पीएलए की मूलभूत योजना भारतीय सेना को पूर्वी लद्दाख में पीछे धकेलने की है। 


भारतीय सेना प्रतिष्ठान का एक हिस्सा तनाव को कम करने के लिए छह जून को हुई बातचीत को लेकर उत्साहित था, लेकिन भारतीय राजनयिकों और खुफिया अधिकारियों ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण यह है कि पीएलए इसका जमीन पर पालन करे। मामले से परिचित लोगों ने बताया कि चीन अपने राजनीतिक उद्देश्यों को प्राप्त किए बिना गतिरोध को समाप्त करने के लिए कोई भी संकेत नहीं दिखा रहा था। 

दोनों देशों के बीच मई में बढ़ते तनाव को देखते हुए पैंगोंग त्सो झील के पास भारतीय वायु सेना के एस-30 एमकेआई विमानों के उड़ान भरने के बाद चीनी सेना ने अपने आक्रामक इरादे स्पष्ट कर दिए थे। पीएलए ने सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की बैटरी और सशस्त्र ड्रोन को अक्साई चिन क्षेत्र में तैनात करना शुरू कर दिया था। 

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