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भारत-चीन तनाव: ‘चाइना स्टडी ग्रुप’ की बैठक में एलएसी पर तैयारियों को लेकर व्यापक समीक्षा

Sat, 19 Sep 2020 02:34 AM IST
संजीव कुमार झा पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Sat, 19 Sep 2020 02:34 AM IST
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India china News, Government China study group meeting,  Reviewed The Overall Preparedness Of The operation In East Ladakh
Rajnath singh, Bipin rawat, Ajit doval - फोटो : social media

पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच हालात सामान्य करने के लिए संभावित बातचीत से पहले शुक्रवार को सरकार की उच्चाधिकार प्राप्त चाइना स्टडी ग्रुप ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के संपूर्ण स्थिति की व्यापक समीक्षा की। करीब 90 मिनट चली बैठक में तय हुआ कि भारत वार्ता में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर दोनों सेनाओं के अप्रैल की स्थिति में लौटने पर जोर देगा। सैन्य कमांडर स्तर की बातचीत अगले तीन-चार दिन में हो सकती है।

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बैठक में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुख शामिल हुए। इस दौरान अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम समेत 3500 किलोमीटर लंबी एलएसी के करीब निगरानी और बढ़ाने पर चर्चा हुई। सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने पूर्वी लद्दाख के हालात की जानकारी दी।
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सूत्रों के मुताबिक , चीन को बातचीत के लिए सारी औपचारिकताएं भेज दी गई हैं और उसके जवाब का इंतजार है। पैंगोंग के उत्तरी और दक्षिणी इलाके में स्थिति तनावपूर्ण है, लेकिन दोनों देशों की सेना संयम बरतते हुए अगले संदेश का इंतजार कर रही हैं।
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10 सितंबर को दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच मॉस्को में हुई वार्ता
10 सितंबर को दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच मॉस्को में हुई बातचीत में पांच सूत्रीय करार के पालन के लिए दोनों देशों के प्रतिनिधि काम कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि पैंगोंग पर भारत की मजबूत सैन्य स्थिति के मद्देनजर चीन बातचीत पर टालमटोल के मूड में है।

उन्होंने बताया कि बैठक में पूर्वी लद्दाख और अत्यधिक ऊंचाई वाले अन्य संवेदनशील सेक्टरों में सर्दियों में भी सभी अग्रिम इलाकों में बलों और हथियारों का मौजूदा स्तर बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रबंधों पर भी विचार-विमर्श किया गया। इन इलाकों में सर्दियों में तापमान शून्य से भी 25 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता हैं

सूत्रों ने बताया कि बैठक में इस बात पर भी थोड़ी चर्चा की गई कि कोर कमांडर स्तर की अगली वार्ता में भारतीय पक्ष को किन मुख्य बिंदुओं को उठाना है। इस वार्ता में 10 सितंबर को मॉस्को में भारत एवं चीन के विदेश मंत्रियों के बीच हुए समझौते के क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित किए जाने की संभावना है।

सूत्र के अनुसार भारत टकराव के सभी बिंदुओं से चीनी बलों को शीघ्र एवं पूरी तरह पीछे हटाने पर जोर देगा। यह सीमा पर शांति स्थापित रखने की दिशा में पहला कदम है। सूत्रों ने बताया कि चीन की ‘पीपल्स लिबरेशन आर्मी’ (पीएलए) ने कोर कमांडर स्तर की वार्ता का अगला दौर आयोजित करने के संबंध में भारतीय सेना को अभी कोई जवाब नहीं दिया है।

बता दें कि दोनों पक्षों के बीच कोर कमांडर स्तर की अब तक पांच दौर की वार्ता हो चुकी है। सूत्रों ने बताया कि पैंगोंग झील के उत्तर एवं दक्षिण किनारे समेत पूर्वी लद्दाख में टकराव वाले अन्य बिंदुओं पर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।

चीनी ‘पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ’ (पीएलए) ने पैंगोंग झील क्षेत्र के उत्तरी और दक्षिणी तटों पर पिछले तीन सप्ताह में भारतीय सैनिकों को भयभीत करने की कम से कम तीन कोशिशें की हैं। यहां तक कि 45 साल में पहली बार एलएसी पर हवा में गोलियां चलाई गईं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने गुरुवार को कहा था कि चीन को पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील क्षेत्र सहित टकराव वाले सभी इलाकों से सैनिकों को पूर्ण रूप से हटाने के लिए प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने चीन से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर यथास्थिति को बदलने की एकतरफा कोशिशें नहीं करने को भी कहा।

उन्होंने कहा था कि दोनों देशों को तनाव बढ़ा सकने वाली गतिविधियों से दूर रहते हुए टकराव वाले इलाकों में तनाव घटाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी किये गये एक बयान के मद्देनजर श्रीवास्तव की यह टिप्पणी आई।

मॉस्को में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक से अलग 10 सितंबर को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ एक बैठक की थी, जिसमें सीमा विवाद के हल के लिये पांच सूत्री एक समझौते पर सहमति बनी।

15 जून को गलवान घाटी में हुई थी झड़प
उल्लेखनीय है कि 15 जून को गलवान घाटी में हुई झड़प में 20 भारतीय सैन्य कर्मियों के शहीद होने के बाद पूर्वी लद्दाख में तनाव कई गुना बढ़ गया। चीनी सैनिक भी इसमें हताहत हुए लेकिन चीन ने अब तक कोई आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है।

पैंगोंग झील के दक्षिणी तट पर 29 और 30 अगस्त की दरम्यानी रात भारतीय भूभाग पर कब्जा करने की चीन की नाकाम कोशिश के बाद स्थिति एक बार फिर से बिगड़ गई। भारत ने पैंगोंग झील के दक्षिणी तट पर कई पर्वत चोटियों पर तैनाती की और किसी भी चीनी गतिविधि को नाकाम करने के लिये क्षेत्र में फिंगर 2 तथा फिंगर 3 इलाकों में अपनी मौजूदगी मजबूत की है।


चीन फिंगर 4 और फिंगर 8 के बीच के इलाकों पर कब्जा कर रहा है। इस इलाके में फैले पर्वतों को फिंगर कहा जाता है। चीन ने भारत के कदम का पुरजोर विरोध किया है। हालांकि, भारत यह कहता रहा है कि ये चोटियां एलएसी के इस ओर हैं।

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