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India-China disengagement: विपक्ष की भाषा बोल कर अपनी ही सरकार को क्यों घेर रहे हैं भाजपा सांसद

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 15 Sep 2022 11:07 PM IST
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सार
India-China disengagement: कांग्रेस पार्टी की नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, ये डिसइंगेजमेंट एक समझौता तो नहीं है। क्या सरकार इस मामले में पीछे हट रही है। ये कैसा समझौता है, जहां पर भारत अपनी ही जमीन से पेट्रोलिंग के अधिकार को त्याग रहा है...
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India-China disengagement: Why the BJP MPs are accusing their own government
India-China disengagement: भारत और चीन की सेना - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

भारत और चीन ने 13 सितंबर को पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के हॉट स्प्रिंग पेट्रोलिंग प्वाइंट-15 पर डिसइंगेजमेंट की घोषणा की है। राजनीतिक नेताओं और सैन्य विशेषज्ञों ने इस पर सवाल उठाया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रमणयम स्वामी ने ट्विटर पर लिखा, चीन उस रिपोर्ट पर हंस रहा है, जो मीडिया ने भारत सरकार के हवाले से लिखी है कि दोनों पक्ष एलएसी से हट रहे हैं। सच्चाई ये है कि चीन ने तो भारतीय जमीन से अपने सैनिक हटाए हैं, जबकि भारत अपनी ही जमीन से और पीछे हट गया। अब चीन दावा कर रहा है, जो मेरा है वह तो मेरा है ही और जो तुम्हारा है, वह भी मेरा है।



कांग्रेस पार्टी ने भी आरोप लगाया है कि क्या भारत अपनी ही जमीन से पीछे 'हटा' है। 'बॉर्डर' पर क्या कुछ छिपाया गया है। क्या बार-बार अपने पेट्रोलिंग प्वाइंट्स के अधिकार को छोड़कर उनको बफर जोन में डाल देना, इस वजह से भारत करीब एक हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक के क्षेत्र पर अपना नियंत्रण खो चुका है। कांग्रेस पार्टी ने सवाल करते हुए कहा कि बॉर्डर पर अप्रैल-2020 से पहले की स्थिति कब बहाल होगी।

पूर्व सेनाध्यक्ष बोले, डिसइंगेजमेंट की जरूरत नहीं

कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस बाबत ट्वीट करते हुए लिखा, 'अप्रैल 2020 की यथास्थिति को बनाए रखने की भारत की मांग को मानने से चीन ने इनकार कर दिया है। प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) ने बिना एक लड़ाई के 1000 वर्ग किलोमीटर का इलाका चीन को दे दिया है। क्या भारत सरकार बता सकती है कि इस इलाके को कैसे वापस लिया जाएगा'। पूर्व थलसेना अध्यक्ष वीपी मलिक ने ट्विटर पर लिखा, 'एलएसी' के गोगरा-हॉट स्प्रिंग में पीपी-15 से ज्यादा डिसइंगेजमेंट करने की जरुरत नहीं है। अप्रैल 2020 के बाद पीएलए के अतिक्रमण का छोटा कदम देखने को मिला। इस तरह के डिसइंगेजमेंट में लंबा समय लग जाता है। टकराव के प्रमुख क्षेत्र जैसे डेपसांग और डेमचोक, जहां पांच पेट्रोलिंग प्वाइंट अवरुद्ध हैं, अभी तक उनका हल नहीं किया गया है। चीन अभी तक अपनी इसी बात पर अड़िग है कि एलएसी को 'भारत ने अवैध रूप से पार किया था'। बफर जोन इस बात की गारंटी नहीं है कि चीन की सेना, इसके बाद सीमा का उल्लंघन नहीं करेगी। चीन ने 1987 में असफिला और बीसा में इसी तरह की स्थितियों का फायदा उठाया था। सीमा पर गैर-भौतिक निगरानी जारी रहनी अनिवार्य है। चीन को उम्मीद है कि बॉर्डर पर डिसइंगेजमेंट जैसे छोटे-छोटे कदम, भारत-चीन संबंधों को पुराने ट्रैक पर वापस लाने में सक्षम होंगे। व्यापार और अन्य मुद्दों पर चीन के साथ कोई भी ठोस वार्ता करने से पहले भारत को एलएसी पर यथास्थिति की मांग रखनी चाहिए।

क्या ये डिसइंगेजमेंट न होकर एक समझौता है

कांग्रेस पार्टी की नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, ये डिसइंगेजमेंट एक समझौता तो नहीं है। क्या सरकार इस मामले में पीछे हट रही है। ये कैसा समझौता है, जहां पर भारत अपनी ही जमीन से पेट्रोलिंग के अधिकार को त्याग रहा है। अभी तक भारतीय जवान, प्वाइंट-15 तक पेट्रोलिंग करते थे। अब उसे बफर जोन बना दिया गया। बार-बार डिसइंगेजमेंट कर भारत के ही पेट्रोलिंग क्षेत्र को बफर जोन में शामिल कर दिया जाता है। ये अप्रैल 2020 से पहले वाली स्थिति नहीं है। पेट्रोलिंग प्वाइंट्स को बफर जोन में डाल देना, इससे करीब 1 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक के क्षेत्र पर भारत अपना नियंत्रण खो चुका है। जो ताजा डिसइंगेजमेंट है, वह दोनों देशों के कोर कमांडरों के बीच हुई 16 राउंड की बातचीत के बाद संभव हो सका है।

कांग्रेस नेता ने कहा, क्या इसे इत्तेफाक कहेंगे कि ये डिसइंगेजमेंट, एससीओ की उस मीटिंग से महज दो दिन पहले हो रहा है, जहां पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात तय है। ड्रैगन, मोदी सरकार की कमजोरी को समझ चुका है। इसी के चलते वो ऐसी रणनीति बना रहा है। पहले वो अतिक्रमण करता है, उसके बाद अतिक्रमण वाले हिस्से को बफर जोन घोषित कर देता है। हम प्वाइंट-'ए' तक पेट्रोलिंग कर रहे थे, अब वही प्वाइंट बफर जोन में आ गया। हमारे सैनिक वहां नहीं जा सकेंगे।

भारतीय सैनिकों को ब्लैक टॉप से हटाया गया

सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, भारतीय सैनिकों ने ब्लैक टॉप पर कब्जा किया था। वहां से सेना को पीछे हटा दिया गया। हमारी सेना ने अपने पराक्रम और शौर्य से उस हिस्से को कब्जे में लिया था। भारतीय सैनिक, गलवान और पैंगोंग झील पर पेट्रोलिंग करते थे, लेकिन मोदी सरकार ने उन पेट्रोलिंग प्वाइंट से हमारे सैनिकों को पीछे कर दिया है। जहां पर हम गश्त करते रहे हैं, वह बफर जोन बन गया। जहां तक हम गश्त करते थे, वहां भी हमारा हक नहीं रहा। डेपसांग और डेमचोक के बारे में बहुत लोग चिंता कर रहे हैं। डेपसांग एक वाई जंक्शन है, जो हमारी सप्लाई चेन है, चीन वहां घुसपैठ कर चुका है। अब सवाल उठता है कि उसे वहां से वापस कैसे धकेला जाएगा। चीन के साथ मोदी सरकार, कारोबार बढ़ा रही है। चीन के साथ सबसे ज्यादा आयात हो रहा है। मोदी सरकार, चीन पर हमारी निर्भरता को बढ़ाने का काम कर रही है। लोगों की आंखों में धूल झोंक कर चीन के एप बैन किए जा रहे हैं।

कांग्रेस ने मोदी सरकार से पूछे ये सवाल

क्या भारतीय सेना पेट्रोलिंग प्वाइंट-14 गलवान घाटी में, पेट्रोलिंग प्वाइंट-15 हॉट स्प्रिंग्स में, पेट्रोलिंग प्वाइंट-17 गोगरा में, आज गश्त कर सकती है। अप्रैल 2020 के पहले तक यहां पर भारत की फौज गश्त कर रही थी। डेपसांग और डेमचोक को लेकर सरकार की क्या नीति है। डोकलाम में फ्रिक्शन प्वाइंट से चीन पीछे हुआ, लेकिन सारे प्लैटो पर चीन ने फोर्टिफिकेशन किया। वहां पर अतिक्रमण किया गया। वह अतिक्रमण आज भी मौजूद है। आखिर एक हजार वर्ग किलोमीटर की जमीन किस तरह से चीन के कब्जे में आ गई। पेट्रोलिंग प्वाइंट, जहां पर हम गश्त करते थे, वहां से पीछे क्यों हट गए। आखिर क्यों हमारा हिस्सा बफर जोन बन जाता है। पीएम मोदी को चीनी प्रेम छोड़ना होगा। गलवान में 20 वीर सपूतों को इस देश ने शहीद होते हुए देखा है। आज हम पूछना चाहते हैं, उनकी शहादत का क्या बदला लिया है। सेना के अधिकारी क्या कह रहे हैं, इस पर गौर करना होगा। पूर्व सेना प्रमुख क्या कह रहे हैं कि ये सिर्फ आंख में धूल झोंकने वाली बात है। जब तक अप्रैल 2020 के पूर्व की यथास्थिति नहीं बनती, तब तक ये सब बातें बेमानी हैं। भारतीय सैनिक, क्यों अपने गश्त किए हुए इलाकों को छोड़कर पीछे हट रहे हैं।

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