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India-China Border: अब नहीं टकराते 'कंधे-कोहनी', 80 शब्दों से टल रहा टकराव, ITBP दे रही 'मंदारिन' में जवाब

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 09 Sep 2022 11:21 PM IST
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सार
India-China Border: आईटीबीपी ने अब चीन की भाषा 'मंदारिन' को अपने बेसिक कोर्स में शामिल कर लिया है। बल के पास लगभग पौने दो सौ मास्टर ट्रेनर हैं। इन्होंने जेएनयू, विदेशी भाषा संस्थान, तेजपुर एवं सांची यूनिवर्सिटी आदि संस्थानों से कोर्स किया है...
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India-China Border: ITBP mandatory learn Chinese language Mandarin for everyone
India-China Border: ITBP and PLA - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

भारत-चीन बॉर्डर पर गश्त के दौरान अब दोनों राष्ट्रों के जवानों के बीच कंधे-कोहनी टकराने की नौबत नहीं आती। 80 शब्दों के जरिए आईटीबीपी, ड्रैगन की फौज को अच्छे से समझा देती है। चीन के सैनिकों को उन्हीं की भाषा मंदारिन में जवाब मिल जाता है। आईटीबीपी ने अपने जवानों से लेकर शीर्ष अफसरों तक, सभी के लिए चीनी भाषा यानी मंदारिन सीखना अनिवार्य कर दिया है। मंदारिन बोलने व लिखने के मामले में चीन की यह भाषा, दुनिया की सबसे ज्यादा मुश्किल भाषा में शामिल है। इसके बावजूद आईटीबीपी ने अथक मेहनत व सार्थक प्रयासों के बलबूते 'मंदारिन' पर अपनी पकड़ बनाने में सफलता हासिल की है।

उस वक्त तकरार, टकराव में बदल जाता था

पहले एलएसी पर तैनात, दोनों देशों के जवानों के बीच तकरार होती रहती थी। आपसी संवाद ठीक से न हो पाने के कारण, कई बार वह तकरार, टकराव में बदल जाती थी। दोनों देशों के सैनिक, एक दूसरे को कंधे व कोहनी के इस्तेमाल से धकेलने की कोशिश करते थे। हालांकि ऐसे अवसरों पर आईटीबीपी, अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर डिफेंस के नियमों के तहत ही चीन के सैनिकों से निपटती रही है। पेट्रोलिंग के दौरान आईटीबीपी और चीन के सैनिक तकरीबन साथ-साथ चलते हैं। कई बार चीन के सैनिकों की ओर से कहा जाता कि भारतीय जवान, उनके सीमा क्षेत्र में आ गए हैं। आईटीबीपी जवान, गर्दन हिलाकर या किसी दूसरे इशारे से उन्हें 'नहीं' में जवाब दे देते थे। चीन के सैनिक जोर-जोर से चिल्लाने लगते। आईटीबीपी, उन्हें समझाने का प्रयास करती। उस वक्त देखा गया कि चीन की भाषा को ठीक से न समझ पाने के कारण विवाद बढ़ जाता है।  

सामान्य बोलचाल के '80' शब्दों का कमाल

सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के जवानों के बीच सही तरीके से संवाद हो और किसी बात पर उलझन या भ्रांति न रहे, आईटीबीपी ने इसके लिए अपने जवानों को चीन की भाषा यानी 'मंदारिन' सिखाना शुरू कर दिया। हालांकि बल में यह प्रयास करीब दो दशक से चल रहा था, लेकिन तब सभी के लिए 'मंदारिन' बोलना सीखना अनिवार्य नहीं था। आईटीबीपी में 2018 के बाद मंदारिन भाषा को बल के सभी ट्रेनिंग सेंटरों पर सिखाया जाने लगा। अगर नियमित कोर्स की बात करें तो इस भाषा को सीखने में दो-तीन वर्ष लग जाते हैं।

आईटीबीपी ने इसका तोड़ भी निकाल लिया। बॉर्डर पर पेट्रोलिंग के दौरान दोनों देशों के जवानों के बीच जब कहासुनी होती है तो उसमें बहुत सामान्य सा विषय होता है। जैसे, आप हमारी सीमा में घुस आए हो। यहां से बाहर चले जाएं। ये सीमा हमारी है। ये इलाका तुम्हारा नहीं है। नमस्कार, आप ठीक हैं, तेज हवा चल रही है, अपने कमांडर से बात कराओ, बेवजह विवाद मत बढ़ाओ, दोनों देश मित्र हैं, सीमा पर विवाद ठीक नहीं है। संयम से काम लें। धक्कामुक्की की जगह बातचीत का व्यवहार रखें। इस तरह के करीब 80 शब्द पेट्रोलिंग पर गए हर जवान को सिखा दिए गए। इसका सार्थक नतीजा भी देखने को मिला।

आईटीबीपी की बेसिक ट्रेनिंग में शामिल हुई मंदारिन

आईटीबीपी ने अब चीन की भाषा 'मंदारिन' को अपने बेसिक कोर्स में शामिल कर लिया है। बल के पास लगभग पौने दो सौ मास्टर ट्रेनर हैं। इन्होंने जेएनयू, विदेशी भाषा संस्थान, तेजपुर एवं सांची यूनिवर्सिटी आदि संस्थानों से कोर्स किया है। इस कोर्स की अवधि एक साल से ज्यादा रही है। इन मास्टर ट्रेनरों द्वारा सभी जवानों और अफसरों को बेसिक स्तर पर मंदारिन भाषा सिखाई जा रही है। अभी तक आईटीबीपी ने लगभग 6500 जवानों और अफसरों को 'मंदारिन' का ज्ञान करा दिया है। ट्रेनिंग के दौरान जवानों को, जिस तरह से ड्रिल, शारीरिक अभ्यास, बॉर्डर गार्डिंग नॉलेज या नेचर ऑफ जॉब से जुड़ा अध्ययन कराया जाता है, वैसे ही उन्हें चीनी भाषा पढ़ाई जाती है। भाषा सिखाने के दौरान इस बात का खास ध्यान रखा जाता है कि जल्दबाजी में कोई ऐसा शब्द न निकल जाए, जिससे किसी शब्द का उल्टा अर्थ निकल जाए। यही वजह है कि जवानों को बार-बार अभ्यास कराया जाता है। इसके लिए संचार के ऑडियो-वीडियो माध्यमों की मदद लेते हैं।

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