सीमा विवाद: 27 साल के समझौते, मोदी-जिनपिंग की 18 मुलाकातों के बाद मिला ये सिला
- 1993 के बाद से सीमा पर शांति-स्थिरता को लेकर हुए कई बार दस्तखत
- पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से लेकर पीएम नरेंद्र मोदी तक के कार्यकाल में शांति के प्रयास आगे बढ़े
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गलवां घाटी में चीन के छल से दोनों देशों के बीच 27 साल में सीमा शांति को लेकर हुई कोशिशों को तगड़ा झटका लगा है। 1993 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव से लेकर मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी तक कई द्विपक्षीय समझौते और वार्ताएं हुई हैं। पीएम मोदी तो छह साल में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से 18 मुलाकातें कर चुके हैं। वह पांच बार चीन भी गए। लेकिन जवानों की शहादत ने द्विपक्षीय समझौतों-मुलाकातों को बेपटरी कर दिया।
- 1988 : तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की चीन यात्रा के दौरान भारत-चीन संबंधों के पुनर्निर्माण को लेकर सीमा शांति पर समझौते करने की बात हुई।
- 1993 : सीमा शांति के लिए पहला समझौता पीएम पीवी नरसिंह राव की चीन यात्रा के दौरान हुआ। तब राव ने चीनी पीएम ली पेंग के साथ ‘सीमाई इलाकों में एलएसी पर शांति व स्थिरता बनाने’ के समझौते पर दस्तखत किए।
- 1996 : चीनी राष्ट्रपति जिआंग जेमिन ने भारत दौरे पर तत्कालीन पीएम एचडी देवेगौड़ा के साथ ‘एलएसी पर सैन्य क्षेत्र में भरोसा बनाने’ के समझौते पर दस्तखत किए।
- 2003 : तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के चीन दौरे पर सीमा विवाद हल करने के लिए एक विशेष प्रतिनिधि स्तर की व्यवस्था स्थापित की गई।
- 2005-13 : तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह के 10 साल के कार्यकाल में तीन समझौते हुए। 2005 में ‘एलएसी पर सैन्य क्षेत्र में विश्वास निर्माण उपायों के क्रियान्वयन के लिए प्रोटोकॉल बनाने’, 2012 में सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्यप्रणाली की स्थापना और 2013 में ‘सीमा सुरक्षा सहयोग समझौता’ इनमें से दो समझौते चीन में तत्कालीन भारतीय राजदूत (वर्तमान विदेश मंत्री) एस जयशंकर के कार्यकाल में हुए थे।
मोदी और जिनपिंग की 18 मुलाकातें
पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग में छह साल में 18 मुलाकातें हुईं। 15 जुलाई 2014 को ब्राजील में पहली मुलाकात में ही सीमा विवाद सुलझाने पर सहमति बनी। अप्रैल 2018 दोनों नेता वुहान में मिले। तय हुआ कि आपसी मतभेदों को विवाद नहीं बनने देंगे और बातचीत से हल करेंगे। पिछले साल जिनपिंग भारत आए और फिर मतभेदों पर बातचीत का संकल्प दोहराया गया, लेकिन सीमा विवाद अब भी कायम है।