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प्रचंड के समर्थन में चीन की मुहिम से भारत सतर्क, नेपाली कांग्रेस और सुप्रीम कोर्ट पर टिकी उम्मीदें
Tue, 29 Dec 2020 04:26 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 29 Dec 2020 04:26 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Social media
नेपाल में पकड़ मजबूत करने के लिए चीन की बदली रणनीति से भारत सतर्क हो गया है। चीन ने अचानक पाला बदलते हुए प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से किनारा कर लिया है। ड्रैगन की कोशिश है कि वहां नए चुनाव न हों और ओली की जगह पुष्प कमल दहल प्रचंड पीएम बन जाएं। वहीं, भारत चाहता है कि नए सिरे से चुनाव हो, जिससे भारत विरोधी ताकतों से छुटकारा मिले। इस मामले में भारत की उम्मीदें सुप्रीम कोर्ट और नेपाली कांग्रेस पर टिकी हैं।
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दरअसल, पहले चीन ने ओली को पीएम बनाए रखने के लिए ताकत झोंक दी थी। मगर नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के दो फाड़ होने और ओली के अलग-थलग पड़ने के बाद उसने रणनीति बदल ली। चीन अब नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के दूसरे सबसे बड़े नेता प्रचंड के समर्थन में आ गया है। नेपाल की प्रतिनिधि सभा भंग होने से बचाने और ओली की जगह प्रचंड को सरकार की कमान दिलाने के लिए चीनी राजदूत होऊ यांकी लगातार कोशिश कर रही हैं।
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इस बीच, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने वरिष्ठ नेता गुओ येझोऊ के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल नेपाल भेजा है। इस प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी से मुलाकात की है। जबकि सोमवार को प्रचंड, माधव नेपाल, उपराष्ट्रपति नंदकिशोर पुन, झालनाथ खनल और बामदेव गौतम से मुलाकात की है। इन्हें चीनी राजदूत ने पहले ही मना लिया है। चीनी राजदूत ने इस दौरान जनता समाजवादी पार्टी को प्रतिनिधि सभा को भंग न करने और प्रचंड को नया पीएम बनाने की मांग करने के लिए भी मना लिया है।
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भारत चाहता है नया चुनाव
भारत चाहता है कि प्रतिनिधि सभा भंग हो और नए चुनाव के बाद सरकार गठित हो। भारत को उम्मीद है कि ऐसा होने पर सरकार की कमान चीन के बदले भारत समर्थक ताकतों के हाथ में आ सकती है। फिलहाल नेपाली कांग्रेस प्रतिनिधि सभा को भंग कर नया जनादेश हासिल करने को ही समस्या का हल बता रही है। इसके अलावा सब कुछ सुप्रीम कोर्ट पर निर्भर है। गौरतलब है कि प्रतिनिधि सभा भंग करने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
क्वात्रा ने पीएम को किया ब्रीफ
पिछले हफ्ते नेपाल स्थिति भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा नई दिल्ली आए थे। सूत्रों का कहना है कि क्वात्रा ने नेपाल की स्थिति के संबंध में प्रधानमंत्री मोदी को जानकारी दी है। सूत्रों का यह भी कहना है कि क्वात्रा ने पीएम को उनके नेपाली समकक्ष ओली का संदेश दिया। इस संदेश में ओली ने प्रतिनिधि सभा को भंग करने के कारण बताए थे।