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भारत के कड़े कानूनों पर स्विस सरकार को भरोसा, मिलेगी धनकुबेरों की लिस्ट

Sun, 06 Aug 2017 10:17 PM IST
एजेंसी नई दिल्ली/बर्न
एजेंसी नई दिल्ली/बर्न Updated Sun, 06 Aug 2017 10:17 PM IST
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India can get information about Black Money From Switzerland
swiss bank

स्विट्जरलैंड के बैंकों में भारतीयों के जमा काला धन का पता लगाने की दिशा में मोदी सरकार को एक और कामयाबी मिली है। स्विट्जरलैंड ने कहा है कि भारत में डाटा सिक्योरिटी और गोपनीयता कानून पर्याप्त हैं। लिहाजा भात के साथ वित्तीय सूचनाओं के ऑटोमैटिक आदान-प्रदान के समझौते में शामिल हुआ जा सकता है।

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इस समझौते की वजह से स्विस बैंकों में काला धन जमा रखने वालों से जुड़ी सूचनाएं को भारत को खुद ब खुद मिलने लगेंगी। इससे मोदी सरकार को काले धन पर नकेल कसने की दिशा में बेहद मदद मिलेगी। भारत के साथ ऑटोमैटिक सूचनाओं के आदान-प्रदान से जुड़े समझौते को लेकर गजट में जारी अधिूसचना और फैक्टशीट में स्विस सरकार ने भारत के साथ समझौते का औचित्य साबित करने के लिए लिचटेन्सिटिन और बहामाज जैसे वित्तीय केंद्रों के साथ की गई ऐसी ही व्यवस्था का हवाला दिया है।
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स्विटजरलैंड ने डाटा को पर्याप्त सुरक्षा देने वाले देशों को मान्यता देने के लिए अमेरिकी टैक्स अथॉरिटी, इंटरनल रेवेन्यू सर्विस का संज्ञान लिया है। जर्मन में छपे फैक्टशीट और अधिसूचना में इस बात का भी जिक्र है है कि स्विट्जरलैंड बीमा और वित्तीय सेवाओं सहित भारतीय बाजार में अधिक पहुंच बनाने की संभावनाएं तलाश रहा है। 
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गौरतलब है कि स्विट्जरलैंड ने भारत और 40 अन्य देशों के साथ वित्तीय जानकारी के स्वत: आदान-प्रदान के सिस्टम से जुड़े समझौते को इस साल जून में मंजूरी दी थी। हालांकि उसने इन सूचनाओं के आदान-प्रदान में गोपनीयता भंग नहीं करने की शर्त रखी है। 

2019 से मिलने लगेगी रियल टाइम जानकारी
स्विस सरकार के साथ भारत का समझौता 2018 में लागू हो जाएगा और 2019 से रियल टाइम जानकारी मिलने लगेगी। दरअसल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्लैक मनी को नियंत्रित करने के लिए भारत और कुछ विकसित देशों के समूहों की ओर से स्विस सरकार पर दबाव की वजह से ऑटोमैटिक सूचनाएं आदान-प्रदान से जुड़ा समझौता लागू हुआ है। जी 20 और ओईसीडी के साथ अन्य ग्लोबल संगठनों ने भी इस समझौते को लागू करने में अहम भूमिका निभाई है। 


भारत की तारीफ
फैक्टशीट में इस समझौते को लागू करने के लिए भारत की तारीफ में कहा गया है कि भारत ने इस समझौते को लागू करने में प्रतिबद्धता दिखाई है।  भारत ने इस समझौते को लागू करने के लिए घरेलू और टैक्स कानून में बदलाव किए हैं।

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