प्रोन्यूटिवा प्रोग्राम: मूंगफली की खेती से खाद्य तेल मिशन में आत्मनिर्भर बन सकता है भारत
यूपीएल लिमिटेड के प्रमुख (भारत फील्ड मार्केटिंग) सर्वेश कुमार ने बताया कि गुजरात के अमरेली स्थित रिकाडिया गांव में प्रोन्यूटिवा सदा समृद्धि मूंगफली प्रोग्राम चलाया गया, जिसमें करीब 750 किसानों, सरपंचों और कृषि अधिकारियों ने हिस्सा लिया। पहला पायलट प्रोग्राम 8,500 किसानों के साथ लागू किया गया था। इससे मूंगफली की पैदावार में कुल 50-60 फीसदी की वृद्धि हुई है और उससे निकाले जाने वाले तेल की मात्रा भी बढ़ी है...
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देश में मूंगफली की आधुनिक खेती खाद्य तेल आयात से काफी हद तक छुटकारा दिला सकती है और थोड़े दिनों में देश को खाद्य तेल मिशन में आत्मनिर्भर बना जा सकता है। टिकाऊ कृषि उत्पादों के लिए मशहूर यूपीएल लिमिटेड की प्रोन्यूटिवा सदा समृद्धि मूंगफली प्रोग्राम से यह उम्मीद जगी है, जिससे न केवल मूंगफली की पैदावार आश्चयर्जनक रूप से बढ़ी है बल्कि किसानों की आय और पशुओं के चारे में भी 35 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है।
यूपीएल लिमिटेड के प्रमुख (भारत फील्ड मार्केटिंग) सर्वेश कुमार ने बताया कि गुजरात के अमरेली स्थित रिकाडिया गांव में प्रोन्यूटिवा सदा समृद्धि मूंगफली प्रोग्राम चलाया गया, जिसमें करीब 750 किसानों, सरपंचों और कृषि अधिकारियों ने हिस्सा लिया। पहला पायलट प्रोग्राम 8,500 किसानों के साथ लागू किया गया था। इससे मूंगफली की पैदावार में कुल 50-60 फीसदी की वृद्धि हुई है और उससे निकाले जाने वाले तेल की मात्रा भी बढ़ी है। इसके अलावा, 35 फीसदी चारा उपज में भी बढोत्तरी हुई। कुमार ने कहा, हम उम्मीद करते हैं कि पैदावार में वृद्धि जारी रहेगी और इस तरह किसानों की आजीविका में सुधार होगा और तेल आयात में भी कमी आएगी। बता दें कि भारत विश्व में तेल का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। भारत अपनी कुल तेल ज़रूरतों का 70 फीसदी आयात करता है। अमरेली, दाहिदा के किसान हंसराज भाई हप्पानी कहते हैं कि मैंने अपने मूंगफली के खेत में प्रोन्यूटिवा के प्रभावों के परिणाम देखे हैं। यदि यह परियोजना पूरे भारत में लागू की जाती है, तो हम जल्द ही तेल में आत्मानिर्भर बन सकेंगे जो हमारी विदेशी आय को बचाएगा।
इस तरह बढ़ी मूंगफली की पैदावार
यूपीएल के क्षेत्रीय प्रमुख आशीष डोभाल बताते हैं कि प्रोन्यूटिवा सदा समृद्धि परियोजना के अंतर्गत मूंगफली किसानों को एकीकृत कृषि सेवाएं जैसे आईपीएम किट, मृदा परीक्षण, मौसम सेवाएं, फसल परामर्श और उच्च तकनीक सक्षम किसान मशीनीकरण सेवाएं उपलब्ध कराई गयीं ताकि मूंगफली की पैदावार और आय में वृद्धि हो सके। वहीं, यूपीएल के उत्पाद ज़ेबा का भी इस्तेमाल किया गया जो पानी और पोषक तत्वों को अवशोषित करता है और पौधे को इसकी आवश्यकता के अनुसार पानी छोड़ता है। जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय के अध्ययन में तेल में 1.45 फीसदी, नट्स के प्रोटीन में 1.68 और कुल कार्बोहाईड्रेट में 0.72 फीसदी की वृद्धि का संकेत मिला।