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INDIA: चीन का विरोध दरकिनार; भारत ने सीमा पर रिकॉर्ड समय में बनाया हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट
सार
प्रोजेक्ट से जुड़े एक उच्चाधिकारी ने बताया कि जब इसे शुरू किया जाने लगा तो चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने इसका विरोध शुरू कर दिया। वे ऊपर पहाड़ी पर आकर इसे बंद करने की धमकी देते। जिला प्रशासन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया और उनके विरोध के बावजूद काम जारी रखा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ जिले के भारत-चीन सीमा पर बसे गांवों में बिजली नहीं होने से विकास की गति धीमी पड़ रही थी। केंद्र सरकार, अरुणाचल प्रदेश सरकार और भारतीय सेना ने महसूस किया कि वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सबसे पहले गांवों के लोगों तक बिजली पहुंचानी होगी।
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केंद्र सरकार ने प्रथम गांव काहो से करीब तीन किमी ऊपर जंगलों में समुद्र तल से करीब 9,000 हजार फुट से भी ऊपर दिचु नाले से पानी लेकर एक 100 किलोवाट का दिचु नाला माइक्रो हाइड्रो प्रोजेक्ट बनाने का फैसला किया। चीन को यह मंजूर नहीं था। भारत ने उसकी गीदड़ भभकी को दरकिनार करते हुए सात महीने के रिकॉर्ड समय में दिचु हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट का निर्माण कर दिया। इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से वॉलोंग और किबिथू सर्कल के करीब 30 से अधिक गांवों को 24 घंटे रोशनी मिल रही है। इस प्रोजेक्ट का इसी वर्ष अप्रैल में केंद्रीय गृह मंत्री अंमित शाह ने उद्घाटन किया था।
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चीन को हटना पड़ा पीछे
प्रोजेक्ट से जुड़े एक उच्चाधिकारी ने बताया कि जब इसे शुरू किया जाने लगा तो चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने इसका विरोध शुरू कर दिया। वे ऊपर पहाड़ी पर आकर इसे बंद करने की धमकी देते। जिला प्रशासन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया और उनके विरोध के बावजूद काम जारी रखा। भारतीय सेना ने इसके लिए चीनी सेना के अधिकारियों के साथ कई बॉर्डर पर्सनल मीटिंग (बीपीएम) की। भारत ने चीन को सख्त लहजे में संदेश दिया कि यह प्रोजेक्ट बनकर रहेगा, उसका विरोध बेकार है। इसके बाद चीन पीछे हटा।
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17 परियोजनाएं शुरू
अरुणाचल प्रदेश सरकार गोल्डन जुबली बॉर्डर विलेज इल्यूमिनेशन प्रोग्राम के तहत, सीमा पर करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से 10-100 किलोवाट क्षमता की 50 सूक्ष्म, लघु और लघु जलविद्युत परियोजनाएं बना रही है। 50 परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से कार्यान्वित किया जा रहा है और चरण-1 के तहत 50 करोड़ की अनुमानित लागत वाली 1255 किलोवाट की क्षमता वाली 17 परियोजनाएं शुरू की गई हैं। ये 11 जिलों में स्थित, 17 परियोजनाएं 123 सीमावर्ती गांवों को कवर करेंगी, जिससे 10,185 लोगों को लाभ होगा। इन 17 परियोजनाओं के तहत विद्युतीकृत किया जाएगा। इनमें से एक परियोजना दिचू नाला (100 किलोवाट), अंजॉ जिले में प्रथम गांव काहो के पास, वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बनाया गया है।
रिकॉर्ड समय में पूरा हुआ प्रोजेक्ट
इस प्रोजेक्ट को सात महीने के रिकॉर्ड समय में बनाया गया है। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में कुल लागत 3.8 करोड़ रुपये आई।