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सात अक्तूबर को जुटेंगे इंडिया ब्लॉक के नेता: चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर करेंगे प्रदर्शन, क्या है पूरा मामला?

Sun, 04 Oct 2026 06:57 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sun, 04 Oct 2026 06:57 PM IST
सार

एसआईआर को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। अब इंडिया गठबंधन के कई दल सात अक्तूबर को दिल्ली में चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर संयुक्त प्रदर्शन करेंगे। दल एसआईआर वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करेंगे। आखिर विपक्ष एसआईआर का विरोध क्यों कर रहा है? मतदाता सूची को लेकर उसकी सबसे बड़ी चिंता क्या है? क्या प्रदर्शन के बाद विवाद और बढ़ेगा? आइए, विस्तार से पूरे मामले को समझते हैं...

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INDIA Bloc Leaders Protest Outside Election Commission Office on October 7 What Is SIR Controversy
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर एकजुट हुआ इंडिया गठबंधन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों और चुनाव आयोग के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। अब दिल्ली में इंडिया गठबंधन में शामिल कई दल एक साथ प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं। कांग्रेस, माकपा, भाकपा, राजद, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी समेत कई दल सात अक्तूबर को दिल्ली स्थित चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करेंगे। दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।

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विपक्षी दलों का कहना है कि एसआईआर की मौजूदा प्रक्रिया में ऐसी कमियां हैं, जिनसे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। दिल्ली कांग्रेस की ओर से बताया गया कि इस मुद्दे पर हुई बैठक में सभी दलों ने मिलकर विरोध करने का फैसला किया। दल एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल वापस लेने की मांग करेंगे। उनका कहना है कि मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद है। इसलिए सूची में किसी भी बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और संविधान तथा मतदाताओं के अधिकारों के अनुसार चलनी चाहिए।
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7 अक्तूबर के प्रदर्शन में कौन-कौन से दल होंगे शामिल?
दिल्ली में होने वाले संयुक्त प्रदर्शन में कांग्रेस के साथ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), राष्ट्रीय जनता दल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक में कांग्रेस की ओर से दिल्ली के नेता भी मौजूद रहे। इसके अलावा भाकपा के सचिव दिनेश सी वर्शनाय, माकपा के महासचिव अनुराग सक्सेना और राजद के नवल किशोर समेत अन्य नेताओं ने हिस्सा लिया। दलों ने एसआईआर के खिलाफ एक साथ आवाज उठाने का फैसला किया है।
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विपक्ष एसआईआर को लेकर क्या सवाल उठा रहा है?
दिल्ली कांग्रेस महासचिव अनिल भारद्वाज ने कहा कि गठबंधन एसआईआर की प्रक्रिया का संयुक्त रूप से विरोध करेगा। विपक्षी दल इसे खामियों वाली प्रक्रिया बता रहे हैं और इसे तुरंत वापस लेने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की किसी भी प्रक्रिया का सीधा असर नागरिकों के मतदान के अधिकार पर पड़ सकता है। इसलिए चुनावी सूची में बदलाव की प्रक्रिया साफ और समझने योग्य होनी चाहिए। दलों ने यह भी मांग की है कि पूरी प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों और मतदाताओं के अधिकारों के अनुसार हो।

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मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग क्यों उठी?
प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी प्रमुख मुद्दा रहेगी। विपक्षी दल एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं। हाल के दिनों में दिल्ली में एसआईआर को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ी हैं।


विपक्षी दल इस प्रदर्शन से क्या संदेश देना चाहते हैं?
इंडिया गठबंधन में शामिल दलों का कहना है कि 7 अक्तूबर का प्रदर्शन दिल्ली के मतदाताओं के अधिकार, निष्पक्ष चुनाव और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए होगा। विपक्षी दल एसआईआर प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी बदलाव से पहले यह सुनिश्चित होना चाहिए कि किसी योग्य मतदाता का अधिकार प्रभावित न हो। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने एसआईआर को लेकर अपनी प्रक्रिया में बदलाव भी किए हैं। ऐसे में 7 अक्तूबर का प्रदर्शन इस मुद्दे पर विपक्ष के दबाव और राजनीतिक विरोध का अगला बड़ा चरण होगा।

क्या एसआईआर को लेकर विरोध और बढ़ सकता है?
एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को लेकर दिल्ली में पहले भी प्रदर्शन हो चुके हैं। ऐसे प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई है और कुछ मामलों में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया है। अब इंडिया गठबंधन के कई दलों के एक साथ सड़क पर उतरने से यह मुद्दा फिर केंद्र में आ गया है। 7 अक्तूबर को चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर होने वाला प्रदर्शन इस पूरे विवाद में विपक्ष की संयुक्त रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, प्रदर्शन के आगे की स्थिति और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर तस्वीर बाद में साफ होगी।

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