बॉर्डर पर इस मिलन के लिए 365 दिन इंतजार करते हैं दो देशों के लोग

जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Wed, 24 Jul 2019 08:25 PM IST
भारत-बांग्लादेश बॉर्डर
भारत-बांग्लादेश बॉर्डर - फोटो : Amar Ujala
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यह एक ऐसा बॉर्डर है, जहां पर दोनों देशों के लोगों को साल में एक बार मिलने का मौका मिलता है। इसे मिलन समारोह का नाम दिया गया है। भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर यह मिलन समारोह उस जगह आयोजित होता है, जहां दोनों देशों की फैंसिंग यानी कंटीली तार लगी होती है। इस मिलन का दिन भी तय होता है। जिस भी तिथि को बैसाखी होती है, उसी दिन यह मिलन होता है। बीएसएफ ने बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के साथ मिलकर यह मिलन उन लोगों के लिए शुरू किया है, जो सामान्य श्रेणी में आते हैं। मतलब, इनके पास वीजा या पासपोर्ट लेने का पैसा नहीं है। दोनों देशों के ऐसे लोग साल में एक बार बॉर्डर पर आकर अपने रिश्तेदारों को देख लेते हैं। मिठाई का आदान प्रदान हो जाता है। चार-पांच मीटर दूर खड़े होकर एक दूसरे का हालचाल जान लेते हैं। अब दोनों तरफ के लोगों की मांग है कि मिलन समारोह साल में कम से कम दो बार आयोजित किया जाए। 
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बता दें कि भारत-बांग्लादेश सीमा को जब से दोस्ताना बॉर्डर घोषित किया गया है, वहां पर सुरक्षा बलों ने कई तरह के सिविक एक्शन प्रोग्राम शुरू किए हैं। बीएसएफ द्वारा इस बॉर्डर पर नॉन लीथल पॉलिसी अपनाई गई है। यानी घातक हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले सामान्य जन, जिनके पास संसाधनों की कमी होती है, उन्हें बॉर्डर के पार रहने वाले अपने रिश्तेदारों या जानकारों से मिलाने के लिए बीएसएफ के अधिकारियों ने बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) के साथ बातचीत की थी।


मिलन की यह बेचैनी बांग्लादेश की तरफ भी देखी गई। कई साल पहले पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर जिले की मकरहाट बॉर्डर आउट पोस्ट और दक्षिण दिनाजपुर जिले की खूंटागाह इलाके में मिलन शुरू हो गया। बीएसएफ द्वारा मिलन की सूचना स्थानीय प्रशासन को पहले ही दे दी जाती है। कई जगह पर पुलिस का इंतजाम हो जाता है तो कहीं पर बीएसएफ अपने स्तर पर ही मिलन को आयोजित करती है।

कंटीले तारों के ऊपर से फेंके जाते हैं कोल्ड ड्रिंक, बिस्कुट, मिठाई और कपड़े

मिलन के दिन जब लोग फैंसिंग पर पहुंचते हैं तो वे अपने साथ कुछ सामान भी लाते हैं। यहां दिक्कत यह होती है कि वे उस सामान को व्यक्तिगत तौर पर एक दूसरे से मिलकर नहीं दे पाते। वजह, बीच में कंटीली तार होती है। ऐसे में वे सामान को तारों के ऊपर से फेंकते हैं। इससे कुछ सामान तारों में अटक भी जाता है। कोल्ड ड्रिंक या जूस की बोतलें फैंसिंग के बीच में गिर जाती हैं। इसे निकालने के लिए उन्हें कड़ी मशक्कत का सामना करना पड़ता है। मिठाई का डिब्बा तारों में उलझ कर फट जाता है।

इन सब दिक्कतों के बावजूद मिलन के लिए आए लोगों का जोश किसी भी तरह से कम नहीं होता है। वे कई घंटे तक वहीं पर एक दूसरे को देखते रहते हैं, बातचीत करते हैं, लेकिन हाथ नहीं मिला सकते, गले नहीं लग सकते। दोपहर को जब ये लोग वापस जाते हैं तो वे बीएसएफ को थैंक्स कहना नहीं भूलते।

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बॉर्डर पर बांग्लादेश के ठाकुरगांव जिले में नागर नदी के निकट स्थित गांव धर्मगढ़ के लोगों से जब मिलन के बारे में बातचीत की गई तो उन्होंने कहा, यह दोनों देशों के बीच संबंध मधुर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। मोहम्मद अनरुल, मो. इब्राहिम, निशिकांत सिंह, जमाल शाही और लुकमान हसन का कहना है कि मिलन का इंतजार लंबा होता है, मगर यह सही है। हमारे पास वीजा या पासपोर्ट लेने के लिए पैसे नहीं हैं। ऐसे में हम सीमा पार रह रहे अपने रिश्तेदारों से कैसे मिल सकते हैं। मिलन बहुत अच्छी योजना है, इससे हम अपने लोगों को देख पाते हैं, उनके साथ बातचीत कर सकते हैं।

बीएसएफ के अधिकारियों का कहना है कि मिलन समारोह से बॉर्डर इलाके में रह रहे लोगों को बहुत फायदा हुआ है। भविष्य में ऐसे कुछ नए प्वाइंट शुरू हो सकते हैं। बशर्ते इसके लिए स्थानीय प्रशासन और बीजीबी तैयार हो। बीजीबी के सेक्टर कमांडर एरेफिन कहते हैं कि हमें भी मिलन से कोई एतराज नहीं है। अगर दोनों देशों के बीच सहमति बनती है तो लोगों की सुविधा के लिए कई दूसरी जगहों पर मिलन समारोह आयोजित किया जा सकता है।

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