{"_id":"5bb83863867a5507af1cb068","slug":"india-and-russia-inks-s-400-deal-but-the-main-challenge-is-transferring-the-contract-money","type":"story","status":"publish","title_hn":"एस-400 डील हुई सील, अब भारत-रूस के सामने हैं ये चुनौतियां","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
एस-400 डील हुई सील, अब भारत-रूस के सामने हैं ये चुनौतियां
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 06 Oct 2018 09:51 AM IST
विज्ञापन
नरेंद्र मोदी- व्लादिमीर पुतिन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत और रूस ने अपने दो दशकों के सबसे बड़े रक्षा सौदे पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। दोनों देशों के बीच शुक्रवार को 8 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए थे। जिसमें एस-400 सर्फेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम भी शामिल है। लेकिन अब दोनों देशों के बीच पैसों के हस्तांतरण को लेकर बड़ी चुनौती सामने खड़ी है। अमेरिका द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। जिसकी वजह से सौदे की 5.43 बिलियन डॉलर की राशि के हस्तांतरण को लेकर परेशानी बनी हुई है।
विज्ञापन
बताया जा रहा है कि एस-400 का उत्पादन करने वाली कंपनी भी अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रही है। ऐसे में बेशक सौदे के लिए भारत को अमेरिका की तरफ से छूट मिल जाए लेकिन उत्पादन कंपनी पर लगे प्रतिबंध के कारण बैंकिंग लेन-देन में मुश्किलें आएंगी। भारत और रूस के बीच यह सौदा लंबे समय से प्रस्तावित था। जिसपर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को हस्ताक्षर किए। इसके बाद दोनों ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस की।
विज्ञापन
अमेरिका द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंध और भारत को लगातार अमेरिका से मिल रही चेतावनी के बावजूद इस सौदे पर मुहर लगने को अहम माना जा रहा है। एस-400 चीन और पाकिस्तानी सीमा पर भारतीय सेना की ताकत बढ़ाएगा। इस सौदे को इसलिए भी काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि चीन ने जनवरी में 6 एस-400 मिसाइल तैनात की थी। चीन और रूस के बीच 2014 में यह सौदा हुआ था।
विज्ञापन
रूस से एस-400 खरीदने की वजह से अमेरिका ने चीन पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। मगर भारत को उम्मीद है कि उसे ट्रंप प्रशासन से छूट मिल सकती है। उम्मीद है कि भारत में 2020 तक इन मिसाइल सिस्टमों की डिलीवरी होगी। चीन को पहले ही इसकी डिलीवरी की जा चुकी है। लंबी बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच यह सौदा फाइनल हो चुका है। लेकिन अब भारत के सामने रूस को पैसा हस्तांतरित करने की सबसे बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सौदे पर हस्ताक्षर होने के बाद निर्माण करने वाली कंपनी को 15 प्रतिशत राशि एडवांस में दी जाएगी ताकि वह उत्पादन शुरू कर सके।
एस-400 की बात करें तो इसका निर्माण करने वाली कंपनी अलमाज-एंटी अमेरिकी प्रतिबंधों की लिस्ट में है। जिसकी वजह से इसके बैंकिंग लेनदेन पर रोक लगी हुई है। भले ही भारत को इस सौदे में अमेरिका की तरफ से छूट मिल जाए, लेकिन इसके बावजूद भी निर्माता कंपनी पर लगा प्रतिबंध सौदे के पूरा होने में रोड़ा अटकाएगा। यहां तक कि रूस के साथ पूर्व में किए गए सौदे का भी फिलहाल भुगतान रुका हुआ है।