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CJI Ramana: सीजेआई रमण बोले- स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतंत्र की रीढ़, सही तथ्य सामने रखें मीडिया घराने
Tue, 26 Jul 2022 11:02 PM IST
Amit Mandal
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 26 Jul 2022 11:02 PM IST
सार
चीफ जस्टिस ने मीडिया को अपने प्रभाव और व्यावसायिक हितों का विस्तार करने के लिए एक उपकरण के रूप में उपयोग किए बिना ईमानदार पत्रकारिता करने की सलाह दी।
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CJI NV Ramana
- फोटो : ANI
विस्तार
चीफ जस्टिस एनवी रमण ने साफ व निष्पक्ष पत्रकारिता की वकालत करते हुए मीडिया घरानों द्वारा सही तथ्यों को लोगों के सामने रखने की बात कही है। जस्टिस रमण ने दिल्ली में एक कार्यक्रम में कहा कि स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतंत्र की रीढ़ है। पत्रकार जनता के आंख-कान होते हैं। विशेष रूप से भारतीय सामाजिक परिदृश्य में तथ्यों को प्रस्तुत करना मीडिया घरानों की जिम्मेदारी है। लोग अब भी मानते हैं कि जो कुछ भी छपा है वह सच है।
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उन्होंने कहा, मैं केवल इतना कहना चाहता हूं कि मीडिया को अपने प्रभाव और व्यावसायिक हितों का विस्तार करने के लिए एक उपकरण के रूप में उपयोग किए बिना खुद को ईमानदार पत्रकारिता तक सीमित रखना चाहिए।
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चीफ जस्टिस ने कहा कि केवल बिना व्यावसायिक दृष्टिकोण वाले मीडिया घराने आपातकाल के काले दिनों में लोकतंत्र के लिए लड़ने में सक्षम थे। मीडिया घरानों की वास्तविक प्रकृति का निश्चित रूप से समय-समय पर आकलन किया जाएगा और परीक्षण के समय उनके आचरण से उचित निष्कर्ष निकाला जाएगा।
पिछले हफ्ते भी प्रधान न्यायाधीश ने कहा था कि मीडिया द्वारा एजेंडा आधारित बहसें और कंगारू कोर्ट चलाए जा रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए हानिकारक हैं। सीजेआईने मंगलवार को कहा कि जब किसी मीडिया हाउस के अन्य व्यावसायिक हित होते हैं, तो वह बाहरी दबावों के प्रति संवेदनशील हो जाता है। अक्सर व्यावसायिक हित स्वतंत्र पत्रकारिता की भावना पर हावी हो जाते हैं। नतीजतन लोकतंत्र से समझौता हो जाता है।
उन्होंने कहा कि पत्रकार जनता की आंख और कान होते हैं। तथ्यों को पेश करना मीडिया घरानों की जिम्मेदारी है। विशेष रूप से भारतीय सामाजिक परिदृश्य में, लोग अब भी मानते हैं कि जो कुछ भी छपा है वह सच है। मैं केवल इतना कहना चाहता हूं कि मीडिया को अपने प्रभाव और व्यावसायिक हितों का विस्तार करने के लिए पत्रकारिता को एक साधन के रूप में उपयोग किए बिना खुद को ईमानदार पत्रकारिता तक ही सीमित रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि व्यावसायिक हितों के बिना भी मीडिया घराने, आपातकाल के काले दिनों में लोकतंत्र के लिए लड़ने में सक्षम थे। अपनी भाषाओं को वह सम्मान देकर जिसकी वे हकदार हैं और युवाओं को ऐसी भाषाओं में सीखने व सोचने के लिए प्रोत्साहित करके राष्ट्र को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना उनके दिल के बेहद करीब है।
हम आंख मूंदकर हस्ताक्षर नहीं कर सकते: रिजिजू
इस बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में कहा कि सरकार न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति में कोई विलंब नहीं करती, लेकिन जब कोई नाम हमारे पास आता है, तब हम आंख बंद करके उस पर हस्ताक्षर नहीं कर सकते। निचले सदन में कुटुम्ब न्यायालय (संशोधन) विधेयक, 2022 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए विधि एवं न्याय मंत्री ने कहा कि सरकार के पास जांच परख करने का एक तंत्र है जो सुप्रीम कोर्ट के पास नहीं है। इस तंत्र से पृष्ठभूमि के बारे में पता लगाया जाता है।
उन्होंने कहा कि कोई नाम आने पर हम आंख बंद करके हस्ताक्षर नहीं कर सकते। अगर हमने किसी नियुक्ति के मामले में हस्ताक्षर नहीं किया तब इसका वाजिब कारण होता है। उन्होंने कहा कि सरकार न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति में कोई विलंब नहीं करती और हमारा मन साफ है।