आजादी के 74 साल: स्वास्थ्य सुविधाओं में शीर्ष पर नहीं लेकिन कोरोना से जंग में आगे रहे हम
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जल्द ही 15 अगस्त आने वाली है, ये कोई मामूली तारीख नहीं है जो आएगी और चली जाएगी। हर साल ये तारीख आती है और हर साल इसे धूमधाम से मनाया जाता है, क्यों? क्योंकि इसी दिन हम यानि भारत ब्रिटिश राज से आजाद हुआ था।
हर साल 15 अगस्त के दिन स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है लेकिन इस साल कोरोना ने लगभग सभी त्यौहारों की रौनक छीन ली है। कोविड-19 की वजह से इस बार का स्वतंत्रता दिवस सेलिब्रेशन वो रोमांच, उत्साह और धूमधाम नहीं होगी जो हर साल होती है।
इस 15 अगस्त हमें आजाद हुए 73 साल पूरे हो जाएंगे लेकिन हम भारत के लोग आज भी कई सुविधाओं से वंचित है। स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें तो देश के सर्वोच्चतम अस्पताल और उच्च शिक्षा के सार्वजनिक संस्थानों का समूह एम्स यानि कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के 73 साल में अब तक नौ ही कार्यात्मक संस्थान उपलब्ध है।
ये नौ संस्थान दिल्ली, ऋषिकेश, भोपाल, भुवनेश्वर, जोधपुर, पटना, रायपुर, गुंटूर और नागपुर में स्थित हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार ने जून 2018 में 11 एम्स को मंजूरी दे दी है जो देश के अलग-अलग जगहों पर स्थापित किए जाएंगे।
वहीं अमेरिका पिछले 30 सालों से यूनाइटेड हेल्थ फाउंडेशन के तहत स्वास्थ्य सुविधाओं और सुधारों की सालाना रिपोर्ट जारी करता है। जिसमें बताया जाता है कि अमेरिका में स्वास्थ्य सुविधाओं के स्तर पर कितना सुधार आ रहा है और कहां सुधार करने की जरुरत है।
लेकिन बावजूद इसके दुनिया में अमेरिका इकलौता देश हैं जहां कोरोना के आंकड़े 50 लाख को पार कर गए हैं। भारत में भले ही स्वास्थ्य सुविधाएं शीर्ष पर नहीं है लेकिन यहां कोरोना को काफी हद तक काबू किया गया है।
अमेरिका जैसे विकसित देश में कोरोना ने ली ज्यादा जान
कोरोना का कहर सबसे ज्यादा अमेरिका में देखने को मिला। शुरुआती समय में अमेरिका की ओर से सीमा पर पाबंदी ना लगाने की वजह से केस बहुत तेजी से बढ़े। अमेरिका में अब तक कोरोना के 53 लाख से ज्यादा मामले हैं और 1.60 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
अमेरिका में कुल जनसंख्या 33.12 करोड़ से ज्यादा है। अमेरिका में स्वास्थ्य सुविधा की बेहतर उपलब्धता के बाद भी वहां कोरोना से इतने लोगों की जानें गई। अमेरिका में प्रति दस लाख की आबादी पर 2,02,106 कोरोना के टेस्ट किए जा रहे हैं।
अमेरिका में प्रति दस लाख की आबादी पर 502 मौतें हो रही हैं। अमेरिका में कोविड-19 से होने वाली मौत के आंकड़ों को लेकर जानकार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर आरोप लगाते हैं कि चेतावनी देने के बाद भी उन्होंने उचित कदम नहीं उठाए।
इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय तक मास्क ना पहनने का समर्थन करते रहे लेकिन पिछले महीने ट्रंप पहली बार सार्वजनिक जगह पर मास्क पहनते हुए दिखाई दिए। इसके अलावा अमेरिका में शुरुआती समय में लॉकडाउन का उचित तरीके से पालन नहीं किया गया।
जॉर्ज फ्लॉएड की मौत के बाद अमेरिका में जो हिंसक प्रदर्शन हुए थे, उसे सभी ने देखा है। इस पर वहां के वैज्ञानिकों ने कोरोना की दूसरी लहर आने की भी चेतावनी दी थी। हालांकि इसके बाद भी अमेरिका में कई लोग मास्क ना पहनने की पैरवी करते दिखाई दिए।
लेकिन भारत में जैसे ही कोरोना के मामले बढ़ने लगे, सरकार ने पूरे देश में सख्त लॉकडाउन लगा दिया और आवाजाही पर पूरी रोक लगा दी। यहां जनता ने भी सरकार के नियमों का पालन किया और सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनने को आदत बनाया।
भारत में मृत्यु दर दूसरे देशों की तुलना में काफी कम
कोरोना से अब तक दुनिया में साढ़े सात लाख के करीब लोगों की जान जा चुकी है। कोरोना के कुल मामलों की बात करें तो दुनिया में अमेरिका, ब्राजील और भारत शीर्ष स्थान पर है। वहीं मरने वालों की बात करें तो अमेरिका में अब तक कोरोना से 1,67,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
इसके अलावा ब्राजील में 1,03,000 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और इसके बाद सक्रिय मामलों में दुनिया के तीसरे नंबर पर आने पर भारत में कोविड-19 से मरने वालों की संख्या 46,000 के पार पहुंच गई है।
प्रति दस लाख जनसंख्या पर कोरोना से होने वाली मृत्यु का आंकड़ा देखें तो अमेरिका में ये संख्या 506 और ब्राजील में 485 है लेकिन तीसरे नंबर पर होने के बावजूद भी भारत में ये संख्या मात्र 33 है। ये सभी आंकड़े वर्ल्डोमीटर की वेबसाइट से लिए गए हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय भी इस बात को कई बार कह चुका है कि भारत में कोरोना की मृत्यु दर बाकी देशों के मुकाबले कम है। मौजूदा समय में भारत में कोरोना की मृत्यु दर 1.98 फीसदी है।
अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों से स्वास्थ्य सेवाओं की तुलना
अमेरिका और दूसरे विकसित देशों में स्वास्थ्य सुविधाएं भारत से बेहतर हैं। साल 2019 के वैश्विक स्वास्थ्य सूचकांक की बात करें तो कुल 195 देशों में भारत का स्थान 57वें नंबर पर है। इस सूची में केवल 13 देश है जो शीर्ष पर हैं।
वैश्विक स्वास्थ्य सूचकांक के मुताबिक स्वास्थ्य सुविधाओं में पहले नंबर पर अमेरिका आता है। ये सूचकांक स्वास्थ्य स्थितियों को रोकने और उनका निराकरण करने के लिए हर देश की क्षमता का आकलन करता है।
2018 मेडिकल जर्नल लैंसेट के एक अध्ययन के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और लोगों तक उनकी पहुंच के मामले में भारत विश्व के 195 देशों में 145वें पायदान पर है। इस शोध का सबसे चौंकाने वाला पक्ष यह है कि भारत 195 देशों की सूची में अपने पड़ोसी देश चीन, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान से भी पीछे है।
भारत की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं पर जीडीपी का 1.15 फीसदी हिस्सा ही खर्च किया जाता है जबकि वैश्विक स्तर इसे छह फीसदी माना गया है। हालांकि नई स्वास्थ्य नीति में सरकार ने इसे बढ़ाकर 2.5 फीसदी करने का लक्ष्य रखा है। साल 2020-21 के बजट में सरकार ने स्वास्थ्य के लिए 69,000 करोड़ रुपये रखे।
इसके अलावा ब्रिटेन ने साल 2020-21 के लिए अपना स्वास्थ्य बजट 129 बिलियन यूरो यानि कि 11,362 करोड़ से ज्यादा रखा है। हालांकि ब्रिटेन में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं मुफ्त हैं लेकिन इसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। वहीं चीन ने साल 2019-20 में स्वास्थ्य बजट के लिए 1.46 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया था।
इसके अलावा ब्राजील स्वास्थ्य सेवाओं पर 46 फीसदी, चीन 56 फीसदी, इंडोनेशिया 39 फीसदी, अमेरिका 48 फीसदी और ब्रिटेन 83 फीसदी खर्च करते हैं। ध्यान देने की बात यह है कि इन देशों में प्रति व्यक्ति आय दर भी भारत के मुकाबले कहीं ज्यादा है।
यहां की सरकारें सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर ज्यादा खर्च करती हैं। भारत में एक बड़ी आबादी गरीबी रेखा के नीचे आती है लेकिन फिर भी यहां सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं पर इतना खर्च नहीं किया जाता।
कोरोना से लड़ने में आगे रहा भारत, कैसे बना मिसाल
कोरोना से इस समय पूरी दुनिया लड़ रही है। दुनिया के लगभग 200 देशों में कोरोना फैल चुका है। कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला देश भी अमेरिका है, उसके बाद ब्राजील और तीसरे नंबर पर भारत है।
भारत में कोरोना का पहला मामला 30 जनवरी को आया था। केरल में तब तीन लोगों में ही कोरोना की पुष्टि हुई थी लेकिन भारत सरकार ने मामलों को बढ़ता देख 25 मार्च को ही देश में संपूर्ण लॉकडाउन लगा दिया था।
भारत में जब सख्त लॉकडाउन लगा था, तब पूरे देश में करीब 500 कोरोना के मरीज थे लेकिन लॉकडाउन लगने के बाद देश में कोरोना के मामले तेजी से बढ़े। भारत में कोरोना को लेकर एक राहत की बात यह रही कि यहां बीमारी से ठीक होने वाले मरीजों की दर काफी बेहतर है।
मौजूदा समय में यह दर 70 फीसदी है। एक तरफ जहां देश में कोरोना के मामले 21 लाख के पास हो गए हैं तो वहीं महामारी से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या भी 16 लाख से ज्यादा है। शुरुआती समय में गोवा और केरल ने काफी अच्छा प्रदर्शन दिखाया लेकिन बाद में यहां पर भी कोरोना के मामले बढ़ते गए।
दूसरे विकसित और विकासशील देशों की तुलना में भारत में कोविड-19 से लड़ने के लिए बेहतर तरीको और रणनीतियों को अपनाया गया। सरकार ने कोरोना टेस्टिंग की क्षमता बढ़ाई, जिससे बीमारी से संक्रमित ज्यादा मरीजों के बारे में जानकारी मिली।
भारत में लगभग ढाई महीने संपूर्ण लॉकडाउन की स्थिति रही और कोरोना के मामलों स्थिरता देखने बाद सरकार ने एक जून से अनलॉक-1 की शुरुआत कर दी। लॉकडाउन की वजह से देश की अर्थव्यवस्था पर काफी नकारात्मक और गहरा असर पड़ा था।
भारत में कोरोना से मरने वालों मरीजों की संख्या भी दूसरे देशों के मुकाबले काफी कम है। प्रति दस लाख जनसंख्या पर भारत में कोरोना वायरस से मरने वाले मरीजों की संख्या केवल 33 है।