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उत्तर प्रदेश में बढ़ी खाद्यान्न की पैदावार, लेकिन नहीं है भंडारण की जगह, केंद्र से मांगी मदद

Wed, 04 Sep 2019 03:42 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला
शशिधर पाठक, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 04 Sep 2019 03:42 PM IST
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Increased foodgrain production in Uttar Pradesh, but no storage space, help sought from center
Surya Pratap Shahi Minister - फोटो : AmarUjala
उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही का कहना है कि उत्तर प्रदेश बदल रहा है। राज्य सरकार की खरीद नीति और न्यूनतम समर्थन मूल्य अब किसानों की जिंदगी बदल रहा है। अमर उजाला के साथ विशेष बातचीत में शाही ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश से किसानों के आत्महत्या की खबरें नहीं आ रही हैं। उन्होंने राज्य सरकार को इसका श्रेय देते हुए कहा कि गोरखपुर से लेकर गाजियाबाद तक मक्का अब 1900 से 2100 रुपये क्विंटल बिक रहा है।
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मक्का का एमएसपी 1750 रुपये

शाही का कहना है कि मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1750 रुपये हैं, लेकिन सरकार ने थोड़ा सा मक्का क्या खरीदा, बाजार में इसका भाव बढ़ गया है। अब यह उत्तर प्रदेश में कहीं भी 1900 रुपये से नीचे मक्का नहीं मिलने वाला है। इसी तरह से जिन किसानों का गेहूं सरकार की खरीद प्रक्रिया तक नहीं आ पाया है, वह पछता रहे हैं। शाही का कहना है कि राज्य सरकार ने किसानों से खाद्यान्न खरीद की एक नीति बनाई है, उसकी अनुपालना शुरू की और जिसका रिजल्ट साफ नजर आ रहा है।

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खाद्यान्न का उत्पादन बढ़ा

कृषि मंत्री का कहना है कि प्रदेश सरकार को पीडीएस (सार्वजनिक वितरण) के तहत करीब 50 लाख मीट्रिक टन गेहूं की जरूरत होती है। राज्य सरकार इसे लक्षित करके गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीददारी करती है। इससे किसानों को अब बाजार में अच्छा भाव मिलने लगा है। शाही का कहना है कि राज्य में खाद्यान्न का उत्पादन पिछले सालों की तुलना में 36 लाख टन बढ़ चुका है। गन्ने की खरीददारी 35 हजार करोड़ रुपये, तो चावल और गेहूं की खरीददारी 11-12 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

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नहीं है पर्याप्त भंडारण क्षमता

कृषि मंत्री ने माना कि राज्य सरकार के पास अन्न भंडारण की क्षमता काफी कम है। राज्य सरकार के पास करीब 20 लाख मिट्रिक टन भंडारण की क्षमता है। शाही ने केन्द्र सरकार से खाद्यान्न भंडारण क्षमता को विकसित करने में सहयोग मांगा है। राज्य सरकार की मांग है कि 20 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न भंडारण की क्षमता विकसित करने में केन्द्र सरकार अपना सहयोग दे।

 

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