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West Bengal: मतदाता सूची पर उठे विवाद पर चुनाव आयोग ने दी सफाई, कहा- TMC द्वारा दिए गए नाम गलती से कटे

Mon, 05 Jan 2026 10:25 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: हिमांशु चंदेल Updated Mon, 05 Jan 2026 10:25 PM IST
सार

मतदाता सूची विवाद पर चुनाव आयोग ने कहा कि तीन मतदाताओं के नाम अनजाने में हुई गलतियों से हटे थे, जानबूझकर नहीं। जांच के बाद घर जाकर सत्यापन हुआ और नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई। टीएमसी ने एसआईआर में खामियों का आरोप लगाया है।

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Inadvertent errors led to deletion of voters names flagged by TMC says EC
चुनाव आयोग। - फोटो : ANI

विस्तार

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर उठे विवाद पर चुनाव आयोग ने सफाई दी है। आयोग ने कहा है कि तृणमूल कांग्रेस द्वारा जिन तीन मतदाताओं के नाम मृत बताए जाने का आरोप लगाया गया था, वे अनजाने में हुई प्रशासनिक गलतियों के कारण सूची से हटे थे। आयोग के अनुसार, यह कार्रवाई किसी भी तरह से जानबूझकर नहीं की गई थी और नियमों के तहत आवश्यक सुधार शुरू कर दिए गए हैं।

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तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में एक जनसभा के दौरान तीन मतदाताओं को मंच पर पेश कर आरोप लगाया था कि मसौदा मतदाता सूची में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है। आरोप सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने बूथ लेवल ऑफिसरों और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी, जो तीन दिनों के भीतर आयोग को सौंप दी गई।
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चुनाव आयोग की सफाई
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मणिरुल मोल्ला, माया दास और हरेकृष्ण गिरी। इन तीनों मामलों में नाम हटाने की वजह अनजानी त्रुटियां थीं। अधिकारी के मुताबिक, मणिरुल मोल्ला और हरेकृष्ण गिरी के नाम शुरू में बूथ स्तर पर तैयार की गई डिलीशन लिस्ट में नहीं थे, लेकिन वेबसाइट पर अपलोड हुई सूची में वे शामिल पाए गए। यह तकनीकी और मानवीय चूक मानी गई।
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घर जाकर भरा गया फॉर्म
मामला सामने आते ही संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर ने दोनों मतदाताओं के घर जाकर सत्यापन किया। मौके पर ही फॉर्म भरे गए और नाम दोबारा जोड़ने के लिए आवेदन जमा किए गए। अधिकारी ने यह भी बताया कि इन दोनों के फॉर्म-छह आवेदन अभिषेक बनर्जी की जनसभा से काफी पहले दाखिल हो चुके थे। माया दास के मामले में भी दस्तावेजों की जांच के बाद नियमों के अनुसार कार्रवाई की गई।


टीएमसी के आरोप और दावे
अभिषेक बनर्जी ने 2 जनवरी को आरोप लगाया था कि दक्षिण 24 परगना जिले में ऐसे कम से कम 24 मामले हैं, जहां जीवित लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। उन्होंने कहा था कि दो मतदाता मेटियाब्रुज के और एक काकद्वीप की निवासी है। टीएमसी का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं।

सुधार या रोक की मांग
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 3 जनवरी को मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर एसआईआर में आई कथित गड़बड़ियों को तुरंत ठीक करने या राज्य में इस प्रक्रिया को रोकने की मांग की थी। आयोग ने कहा है कि सभी दस्तावेजों की जांच कर नियमों के मुताबिक कदम उठाए गए हैं। राज्य में विधानसभा चुनाव मार्च-अप्रैल में संभावित हैं, ऐसे में मतदाता सूची की शुद्धता पर सियासी और प्रशासनिक निगरानी बढ़ गई है।

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