स्वच्छ भारत मिशन- ग्रामीण: दूसरे चरण में देश में बनेंगे 51 लाख टॉयलेट, दो लाख गांवों में होगी कचरा प्रबंधन की व्यवस्था
केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि खुले में शौच मुक्त भारत का जो लक्ष्य हासिल किया गया है, उसे कायम रखना और नए घरों व बढ़ी हुई आबादी के लिए शौचालयों की व्यवस्था करना जरूरी है...
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मोदी सरकार के स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के पहले चरण का शौच मुक्त (ओडीएफ) गांवों का सपना साकार होता हुआ नजर आ रहा है। अब इस उपलब्धि को बरकरार रखने के लिए दूसरे चरण में देशभर के करीब 51 लाख नए घरेलू शौचालयों का निर्माण किया जाएगा।
राजधानी में बुधवार को केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय में दूसरे चरण में राज्यों की सहायता के लिए तैयार पांच मैनुअल जारी करते हुए केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि खुले में शौच मुक्त भारत का जो लक्ष्य हासिल किया गया है, उसे कायम रखना और नए घरों व बढ़ी हुई आबादी के लिए शौचालयों की व्यवस्था करना जरूरी है। इसी बात को ध्यान में रखकर राष्ट्रीय योजना मंजूरी समिति ने मिशन के दूसरे चरण में 51 लाख घरेलू शौचालयों के अलावा करीब एक लाख सामुदायिक स्वच्छता कॉम्प्लेक्स, करीब दो लाख गांव में ठोस कचरा प्रबंधन योजना, एक लाख 82 हजार गांव में ग्रे-वॉटर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट, करीब 2500 ब्लॉक में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन यूनिट और 386 जिलों में गोबर धन प्रबंधन संयंत्र लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
उन्होंने आगे कहा, इस योजना के तहत कोशिश है कि रसोई और स्नानघर से निकलने वाला ग्रे-वॉटर रिसाइकिल होने के बाद कृषि या कमर्शियल क्षेत्र में इस्तेमाल किया जा सके। अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो उसका उपयोग भूगर्भ भरण के काम में हो। इसी तरह प्लास्टिक अपशिष्ट और गोबरधन संयंत्र एक बिजनेस मॉडल बने, इस बात पर जोर दिया जा रहा है।
हर ग्रामीण परिवार को 53 हजार का हुआ सालाना फायदा
जलशक्ति मंत्री ने कहा कि लाल किला से जब मोदी ने स्वच्छता और खुले में शौच पर बात की थी, तब लोगों ने ऐसा सोचा भी नहीं था कि हम इतनी जल्दी इतनी व्यापक सफलता हासिल कर सकेंगे। उस समय देश में स्वच्छता का कवरेज 39 फीसदी था लेकिन दो अक्तूबर, 2019 को जब खुले में शौच मुक्त गांव की घोषणा प्रधानमंत्री ने गांधी नगर में की, तब तक 10 करोड़ से अधिक नए शौचालयों का निर्माण करने का श्रेय हासिल किया जा चुका था।
उन्होंने आगे कहा कि मिशन के पहले चरण से स्वास्थ्य लाभ और समय की बचत को लेकर एक वैश्विक अध्ययन की रिपोर्ट में यह सामने आया कि हर ग्रामीण परिवार को करीब 53 हजार रुपये का सालाना लाभ इससे हुआ है। मिशन के दूसरे चरण को संपूर्ण स्वच्छता से जोड़ा गया है। केंद्रीय मंत्री ने इस कार्यक्रम में मिशन के दूसरे चरण को भी जनभागीदारी और पांच-पी के सिद्धांत पर चलकर सफल बनाने का आह्वान किया। पांच-पी में राजनीतिक इच्छाशक्ति, सरकार की तरफ से निरंतर खर्च, अनुभवी व विशेषज्ञों की साझेदारी, जनभागदारी और व्यवहार में बदलाव का निरंतर आग्रह करना शामिल है।
परियोजनाओं पर करीब 41 हजार करोड़ रुपये होंगे खर्च
राष्ट्रीय समिति ने जिन परियोजनाओं को मंजूरी दी है, उन पर करीब 41 हजार करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है। इसमें केंद्र सरकार 13,982 करोड़ की हिस्सेदारी करेगी जबकि राज्य सरकार का हिस्सा 8332 करोड़ रुपये है। इसके अलावा 15वें वित्त आयोग की तरफ से ग्रामीण स्थानीय निकायों को मिले अनुदान से 12730 करोड़ और मनरेगा से 4138 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे। बाकी के 1522 करोड़ रुपये राज्यों द्वारा अन्य स्रोतों से निवेश किए जाएंगे।
एक साल में कई गांव ठोस व तरल कचरे से होंगे मुक्त
केंद्रीय जलशक्ति मंत्री ने कहा, जनभागीदारी और इनोवेटिव तरीके से परियोनाओं पर काम होगा, जिससे एक साल के कालखंड में देश के ज्यादा से ज्यादा गांवों को ठोस व तरल कचरे से मुक्त करने की दिशा में हम आगे बढ़ेंगे। इसके साथ हर घर नल की योजना पर तेजी से काम हो रहा है। दोनों लक्ष्य को प्राप्त करने के बाद देश के जीडीपी में हम बड़ा योगदान कर पाएंगे।