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अगले दो-तीन वर्षों में यूएई को खाद्य पदार्थों का निर्यात तीन गुना होगा

Tue, 05 Mar 2019 04:45 AM IST
Avdhesh Kumar शिशिर चौरसिया, नई दिल्ली
शिशिर चौरसिया, नई दिल्ली Published by: Avdhesh Kumar Updated Tue, 05 Mar 2019 04:45 AM IST
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In the next two-three years, the export of food items to the UAE will be three times
फाइल फोटो
भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद दे रहा संयुक्त अरब अमीरात -यूएई- अब यहां से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भागीदारी चाह रहा है। यदि ऐसा होता है तो इससे न सिर्फ यूएई को गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थों की निश्चित आपूर्ति हो सकेगी, बल्कि अगले दो-तीन साल में भारत का वहां होने वाला निर्यात भी तीन गुना बढ़ जाएगा। ऐसा होने पर भारत को हर साल करीब 2.2 अरब डॉलर की अतिरिक्त आमदनी होगी।
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सरकार से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर यूएई की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने पर एक कार्य योजना को मंजूरी मिली है। विदेशी मंत्रालय की अगुवाई में बनी इस कार्य योजना पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय को अमल करने की जिम्मेदारी मिली है और इस पर काम शुरू हो चुका है। इस बारे में इन मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों की कुछ बैठक भी हो चुकी है, जिसमें आबू धाबी के फूड सिक्योरिटी सेंटर के महानिदेशक एम. अल अली की गुवाई में वहां का एक प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हुआ था। 
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बाय, कांट्रेक्ट एंड मेक मॉडल पर होगा काम

भारत से खाद्य पदार्थों का यूएई को सीधे निर्यात नहीं होगा बल्कि बाय, कांट्रेक्ट एंड मेक मॉडल पर होगा। इसका मतलब है कि यूएई द्वारा अधिकृत कंपनी यहां या तो किसानों से कांट्रेक्ट फार्मिंग कराएगी या यहां खुद जमीन लेकर खेती करेगी और उसका प्रसंस्करण उनके मानकों के अनुरूप यहीं होगा। उसके बाद तैयार उत्पाद का निर्यात किया जाएगा। इसके लिए कई राज्यों ने अपने यहां काम शुरू करने का निमंत्रण दिया है। ओडिशा समेत कई राज्यों ने तो इसके लिए विशेष रूप से तैयार फूड पार्क देने का पस्ताव भी दिया है। फूड पार्क के निर्माण में प्रत्यक्ष विदेशी -एफडीआई- का तो प्रवाह होगा ही, स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
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स्ट्रेटेजिक बिजनेस पार्टचर का हो चुका है चयन

भारत और यूएई के बीच कारोबार को बढ़ावा देने के लिए करीब आठ बिजनेस भागीदारी का चयन हो चुका है। ये बिजनेस पार्टनर ही भारत में खाद्य पदार्थों के संग्रहण से लेकर आपूर्ति की जिम्मेदारी संभालेंगे। ये थोक में खरीदारी करेंगे और यूएई के सरकारी विभागों को भेजेंगे। वहां की सरकार की योजना है कि किसी भी आपात स्थिति के लिए चावल, दाल, पाल्ट्री उत्पाद, अंडे-मुर्गे आदि का प्रसंस्करण कर उसे सुरक्षित रखा जाए। ये बिजनेस भागीदार अपने हिसाब से चावल या दाल की खेती करवाएंगे। उसका प्रसंस्करण भी उनके मानक के अनुसार होगा। यदि पाल्ट्री उत्पाद की बात करें तो अंडे-मुर्गे का उत्पादन भी नियंत्रित वातारण में होगा और उसका तरीका भी वही होगा जो यूएई प्रशासन तय करेगा।


यूपी, पंजाब और हरियाणा के किसानों को होगा फायदा

यूएई की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भारत को जिम्मेदारी मिलती है तो गेहूं, चावल, गन्ना आदि के उत्पादन में नंबर वन स्थान रखने वाले उत्तर प्रदेश के किसानों को फायदा तो होगा ही, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों के किसानों को भी लाभ होगा। बीते जनवरी में ग्रेटर नोएडा में आयोजित हुए इंडस फूड्स कार्यक्रम के दौरान तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित फूड पार्क में एक विशेष क्षेत्र इनकी कंपनियों को आवंटित करने का प्रस्ताव दिया था। यही नहीं, यदि यूएई के बिजनेस पार्टनर कांट्रेक्ट फार्मिंग के जरिये सीधे किसानों से संपर्क करना चाहते हैं तो सरकार इसमें भी उनको मदद करेगी।
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