मायावती प्रकरण और गुजरात दलित उत्पीड़न पर डैमेज कंट्रोल में जुटी भाजपा
बसपा प्रमुख मायावती के खिलाफ भाजपा नेता द्वारा आपत्तिजनक टिप्पणी से बैकफुट पर आई पार्टी अब डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। रणनीति के तहत भाजपा ने अम्बेडकरवादी नेता और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले को पलटवार के लिए मैदान में उतार दिया।
अठावले ने राज्यसभा में केंद्र सरकार और भाजपा का बचाव किया और अब उनके दौरे उत्तर प्रदेश में भी होंगे। भाजपा अपने दलित नेताओं के साथ सहयोगी दलों के दलित नेताओं को पूरे उत्तर प्रदेश के सभी हिस्सों में उतारेगी। रिपब्लिकन पार्टी के नेता और केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता राज्य मंत्री अठावले ने इसके संकेत दिए हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा उनका सहयोगी दल है और केंद्र सरकार में वे हिस्सेदार हैं। इस कारण असलियत बताना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी दलितों की पुरानी पार्टी है। यह बहुजन समाज पार्टी से भी अधिक पुरानी है।
अम्बेडकर के सिद्धांतों के लिए पार्टी समर्पित रही है। बसपा प्रमुख मायावती पर गलत टिप्पणी की निन्दा की जानी चाहिए लेकिन भाजपा ने संबधित व्यक्ति को पार्टी और सभी पदों से हटाकर त्वरित कार्रवाई की है। इस कार्रवाई का स्वागत भी होना चाहिए। अठावले ने कहा कि राहुल गांधी गुजरात के उना में पीड़ित दलितों से मिले और दलों के लोग भी मिलें।
दलित मुद्दों का राजनीतिकरण उचित नहीं है
पीड़ित से मिलकर सांत्वना देना ठीक है लेकिन दलित मुद्दों का राजनीतिकरण उचित नहीं है। सभी एकजुट होकर सच्चे मन से दलित उत्पीडन के खिलाफ माहौल बनाएं तभी अत्याचार बंद होगा। कांग्रेस के शासनकाल में भी दलितों पर अत्याचार हुए हैं। इसलिए इस मुद्दे पर सिर्फ एनडीए सरकार पर आरोप गलत है। समाज की मानसिकता बदलने की जरुरत है।
उन्होंने कहा कि उन्हें मंत्री पद देना भी दलितों का सम्मान है। दलित की बेटी कुछ हासिल करती है तो उन्हें दौलत की बेटी कहना भी गलत है। अठावले ने केंद्र और गुजरात सरकार का बचाव करते हुए कहा कि दलितों पर अत्याचार हुए तो आरोपियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई भी हुई। इस कार्रवाई की सराहना होनी चाहिए।
दलित मुद्दे पर वोट की राजनीति होती रही तो समस्या का समाधान नहीं निकलेगा। इसके लिए सामाजिक परिवर्तन और सोच में बदलाव जरूरी है।भाजपा सूत्रों का कहना है कि अगले महीने अठावले का उत्तर प्रदेश दौरा संभव है।
विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सहयोगी दलों के दलित नेताओं के सहयोग से अम्बेडकर के सिद्दांतों के प्रसार और अम्बेडकर से जुड़े स्थलों को पंच तीर्थ घोषित करने जैसे सरकार के फैसले को प्रचारित करेगी। साथ ही कांग्रेस और मायावती के शासनकाल में दलितों के उत्पीडन को आंकड़ों के आधार पर जनता के समक्ष रखेगी।