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आपराधिक मामलों की जांच में आधार डाटा के इस्तेमाल की अनुमति नहीं : यूआईडीएआई

Sat, 23 Jun 2018 12:45 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 23 Jun 2018 12:45 AM IST
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in investigation of criminal cases not allowed to use data, uidai

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने स्पष्ट कर दिया है कि आधार कानून के तहत आपराधिक मामलों की जांच में बायोमीट्रिक डाटा का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इस आधार पर यूआईडीएआई ने अपराध रिकॉर्डस ब्यूरो (एनसीआरबी) के साथ बॉयोमीट्रिक डाटा साझा करने से इनकार कर दिया है। बृहस्पतिवार को एनसीआरबी ने बॉयोमीट्रिक डाटा साझा करने पर जोर दिया था।

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यूआईडीएआई ने कहा कि आधार कानून की धारा-29 के तहत लिया गया डाटा केवल आधार धारकों की पहचान प्रमाणित करने के लिए किया जा सकता।

इसका इस्तेमाल किसी दूसरे काम के लिए नहीं हो सकता है। प्राधिकरण ने बताया कि उसने कभी किसी भी जांच एजेंसी के साथ बायोमीट्रिक डाटा साझा नहीं किया है। हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में आधार कानून की धारा-33 के तहत इसे साझा किया जा सकता है। बृहस्पतिवार को 19वें ऑल इंडिया कांफ्रेंस ऑफ डायरेक्टर्स ऑफ फिंगरप्रिंट ब्यूरो में बोलते हुए एनसीआरबी निदेशक इश कुमार ने कहा था कि देश भर में करीब 50 लाख मामले हर साल दर्ज होते हैं।
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इनमें करीब 80-85 प्रतिशत लोग पहली बार अपराध करते हैं, जिनका पुलिस के पास कोई रिकॉर्ड नहीं होता है। इसके अलावा हर साल करीब 40,000 शव बरामद होते हैं, जिनकी शिनाख्त नहीं हो पाती है। कुमार ने कहा कि आधार डाटा के जरिये इन शवों की शिनाख्त कर परिजनों को सौंपा जा सकता है। 

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