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गोरक्षा और गोमांस के नाम पर हो रही है इंसानों की हत्याएं

Tue, 24 Jul 2018 05:44 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 24 Jul 2018 05:44 PM IST
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In India humans are being killed in mob lynching in the name of protecting cows cow vigilantism

राजस्थान के अलवर जिले में गाय का दूध बेचकर और मजदूरी करके बमुश्किल परिजनों का पेट भर पाने की जद्दोजहद में जुटा रहा था रकबर। दूध-घी ज्यादा हो तो परिवार का गुजारा सही से हो जाएगा, यही सोचकर रकबर राजस्थान के गांव खानपुर से 60 हजार रुपए में दुधारू गाय खरीदकर 20 जुलाई को कोल गांव आ रहा था। रास्ते में रामगढ़ में कथित गौरक्षकों ने उसकी पिटाई की, जिससे बाद में उसकी मौत हो गई।



रामगढ़ में शुक्रवार देर रात गाय ले जाते वक्त भीड़ हिंसा के शिकार हुए हरियाणा के रकबर उर्फ अकबर की मौत की जांच के लिए गठित राजस्थान पुलिस की उच्चस्तरीय समिति ने माना कि मामले में पुलिस से गंभीर चूक हुई है। जांच समिति ने सोमवार को छानबीन और पूछताछ के बाद रामगढ़ थाना प्रभारी एएसआई मोहन सिंह को निलंबित और तीन कांस्टेबल को लाइन हाजिर कर दिया है। 

कथित गोरक्षकों के आतंक से मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले साल 2017 में भी अलवर जिले में तथाकथित गोरक्षकों ने ऐसी ही घटना को अंजाम दिया था। इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। अलवर के राजमार्ग पर गाय ले जा रहे 15 मुस्लिम लोगों के समूहों पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया था। इन्हें शक था कि यह लोग गायों की तस्करी कर रहे हैं। इस घटना में जख्मी हुए पहलू खान की स्थानीय अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। पुलिस के मुताबिक पहलू खान अपने साथियों के साथ अपने घर हरियाणा लौट रहे थे जिस दौरान भीड़ ने उनकी गाड़ी रोक दी थी। 

पुलिस ने पहलू खान हत्या केस में नौ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। मगर बाद में पुलिस ने जांच में इनमें से छह लोगों को यह कह कर क्लीन चिट दे दी कि उनके खिलाफ सबूत नहीं मिले।  राजस्थान में पिछले पांच दिन में कथित गोरक्षकों के हाथों मौके पर ही न्याय करने की यह दूसरी घटना है। इसके पहले कोटा में ऐसे ही कथित गोरक्षकों ने मध्यप्रदेश में दूध की डेरी चलाने वाले प्रवीण पंडित और उसके ड्राइवर अहमद को घेर का पीटा। प्रवीण अपनी डेरी के लिए जयपुर से गाय खरीद कर देवास ले जा रहे थे। 

पीएम ने तथाकथित गोरक्षकों के खिलाफ की थी कार्रवाई की बात

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : amar ujala

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ही ऐसी घटनाओं पर अफसोस जताया था और राज्य सरकारों से ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कहा था। इसके पहले सुप्रीम कोर्ट भी राज्यों से भीड़ द्वारा हो रही हिंसक घटनाओं पर रोक के निर्देश दे चुका है। 

साल 2017 में प्रधानमंत्री मोदी महात्मा गांधी के पूर्व निवास साबरमती आश्रम के 100 साल पूरा होने के समारोह में हिस्सा लेने पहुंचे थे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि गायों की रक्षा के नाम पर किसी की भी हत्या अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा था कि देश में किसी को यह अधिकार नहीं कि वह कानून अपने हाथ में ले। उन्होंने कहा, "गोभक्ति के नाम पर हो रही हत्याएं स्वीकार्य नहीं है। यह ऐसी चीज नहीं है जिससे महात्मा गांधी सहमत होते।" मोदी ने कहा था, "हम कैसे लोग हैं गाय के नाम पर इंसान को मारते हैं।" 
 




इससे पहले साल 2016 में अगस्त के महीने में प्रधनमंत्री मोदी ने कथित गोरक्षकों की आलोचना करते हुए धर्म के नाम पर अपराध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात की थी। मोदी ने कहा था कि गोरक्षा की आड़ में आपराधिक पृष्ठभूमि के लोग वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। लेकिन गोहत्या और गोमांस खाने के शक में मुसलमानों को निशाना बनाये जाने की घटनाएं तब भी जारी रहीं। 

देश में बहुसंख्यक आबादी हिंदुओं के लिए गाय पवित्र है और कई राज्यों में गोहत्या पर प्रतिबंध है। देश के विभिन्न इलाकों और खासतौर पर उत्तर और पश्चिमी क्षेत्रों में खुद को गोरक्षक बताने वाले समूह घूम-घूम कर आती-जाती गाड़ियों की जांच करते हैं। 

भारत में करीब 8 करोड़ लोग बीफ खाते हैं

In India humans are being killed in mob lynching in the name of protecting cows cow vigilantism

राष्ट्रीय सैंपल सर्वे ऑफिस एनएसएसओ के 2011-12 के आंकड़ें दिखाते हैं कि भारत में करीब 8 करोड़ लोग बीफ या भैंस का मीट खाते हैं। आंकड़ों के अनुसार बीफ यानि गोमांस और भैंस का मीट खाने वाले ये लोग सभी धर्मों और राज्यों में पाए जाते हैं। 

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पिछले कुछ सालों के दौरान मांस की खपत बढ़ी

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एनएसएसओ के आंकड़ों के अध्ययन से पिछले कुछ सालों के दौरान मांस की खपत बढ़ने का पता चलता है। इस सर्वे में करीब एक लाख लोगों को शामिल कर यह आंकड़ें इकट्ठा किए गए। इस सर्वे में यह पता लगया गया कि हफ्ते और महीने की औसत अवधि में एक परिवार खाने की किन चीजों पर कितना खर्च करता है। 

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विश्व औसत के मुकाबले भारत में बीफ की खपत कम

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विश्व में मांस की खपत का लेखाजोखा रखने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था एफएओ की साल 2007 में जारी 177 देशों की सूची में भारत आखिरी स्थान पर था। 43 किलो के विश्व औसत के मुकाबले भारत में प्रति व्यक्ति सालाना मांस की खपत सिर्फ 3.2 किलो दर्ज की गई। 

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