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पहले सत्र में मोदी सरकार ने बनाया इतिहास, मुश्किल विधेयक भी चुटकियों में हुए पास

Tue, 06 Aug 2019 09:14 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 06 Aug 2019 09:14 PM IST
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In First session of 17th Lok Sabha Narendra Modi Govt Passed Major Bills in parliament
संसद (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में संसद के दोनों सदनों की हर बड़ी बाधा को बेहद आसानी से पार कर लिया। जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांटने वाले जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक विधेयक जैसे मुश्किल विधेयक को न केवल संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिली, वहीं सूचना का अधिकार (संशोधन) विधेयक और तीन तलाक बिल को पारित कराने में सरकार के चेहरे पर शिकन तक नहीं आई। विपक्ष जहां बिखरा नजर आया, वहीं सरकार का आत्मविश्वास अपनी बुलंदियों को छूता रहा। खास बात यह रही कि छह अगस्त की शाम तक लोकसभा ने जहां 35 विधेयकों को पारित कर दिया, वहीं राज्यसभा ने भी 30 बिलों को मंजूरी दे दी।

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संसदीय इतिहास में पहली बार इतने बिलों को मंजूरी

संसदीय कार्य राज्यमंत्री प्रह्लाद जोशी के मुताबिक संसद का सत्र सात अगस्त तक चलेगा। इससे पहले केन्द्र सरकार को 99 फीसदी विधायी कार्यों को पूरा करने में सफलता मिली है। लोकसभा में अब पारित होने के लिए केवल तीन विधेयक ही लंबित हैं। कई जटिल विधेयक ऐसे भी रहे, जिन्हें जिस दिन सदन में पेश किया गया, उसी दिन पारित भी हो गए। इतना ही नहीं कोई भी विधेयक संसद की सेलेक्ट कमेटी या स्थायी कमेटी के पास नहीं भेजा गया। लोकसभा सचिवालय के अनुसार देश के संसदीय इतिहास में पहली बार इतने बिलों को मंजूरी मिली है। पहली बार लोकसभा बिना स्थगित हुए लगातार चली है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला भी सदन को स्थगित न करने के प्रति अडिग रहे और सदन के कामकाज को सुचारु रूप से चलाया।

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भाजपा में शामिल हुए दूसरे दलों के राज्यसभा सांसद

संसदीय इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब 23 मई 2019 को लोकसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद से अब तक कांग्रेस पार्टी के दो राज्यसभा सांसद संजय सिंह और भुबनेश्वर कलिता ने पार्टी तथा सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। संजय सिंह भाजपा में शामिल हो गए और राज्यसभा में कांग्रेस पार्टी के व्हिप प्रमुख कलिता भी जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं। वहीं समाजवादी पार्टी के तीन सांसद नीरज शेखर, सुरेन्द्र नागर और अखिलेश यादव के करीबी कहे जाने वाले संजय सेठ ने भी राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। नीरज शेखर भाजपाई हो चुके हैं। जल्द ही सुरेन्द्र नागर और सेठ के भी भाजपा के साथ जुडऩे की संभावना है।

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आंध्र विधानसभा में भाजपा शून्य, लेकिन राज्यसभा सदस्य चार

आंध्र प्रदेश अकेला ऐसा राज्य है, जहां विधानसभा चुनावों में भाजपा का एक भी विधायक नहीं है, लेकिन भाजपा के पास चार राज्यसभा सांसद हैं। चंद्रबाबू नायडू की तेलगू देशम पार्टी के चार सांसदों ने अपनी पार्टी को छोड़कर एक साथ भाजपा का दामन थाम लिया। यह भी अपने आप में एक इतिहास है। भाजपा के नेता इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के प्रति देश की जनता का विश्वास बता रहे हैं।

जमकर हुई क्रॉस वोटिंग, विपक्ष में पड़ी फूट

संसद सत्र के दौरान विपक्षी राजनीतिक दलों के भीतर जमकर फूट देखने को मिली। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक-2019 को लेकर कांग्रेस पार्टी दो गुटों में बंट गई। दीपेन्द्र हुड्डा, अदिती सिंह, रंजीता रंजन, पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार समेत तमाम नेताओं ने अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने का समर्थन किया। वहीं गुलाम नबी आजाद और लोकसभा में पार्टी के संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने इसका विरोध किया। यहां तक कि विपक्ष के साथ रहने वाली आम आदमी पार्टी ने भी जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक का समर्थन किया। इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी भी इस विधेयक पर केन्द्र सरकार के साथ खड़ी नजर आई। तीन तलाक विधेयक और सूचना का अधिकार जैसे विधेयक भी विपक्ष की कमजोर रणनीति और राज्यसभा में सांसदों के अनुपस्थित रहने के चलते पारित हुए। विपक्ष का फ्लोर प्रबंधन जहां अस्त-व्यस्त दिखा, वहीं सत्ता पक्ष का फ्लोर प्रबंधन शानदार रहा।
 

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