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भाजपा: इलाहाबाद में मिलेगा यूपी के चेहरे का संकेत
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 07 Jun 2016 01:31 AM IST
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कार्यकारिणी की बैठक में उत्तर प्रदेश पर होगा विशेष मंथन
- फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद में 12 और 13 जून को होने जा रही राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भाजपा उत्तर प्रदेश में अपने चुनावी चेहरे के संबंध में स्पष्ट संदेश देगी। बैठक में पेश किए जाने वाले राजनीतिक और आर्थिक प्रस्ताव के जरिए पार्टी मोदी सरकार की दो साल की उपलब्धियां गिनाते हुए खासतौर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पीठ थपथपाएगी।
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बैठक में खासतौर पर उत्तर प्रदेश की भावी चुनावी रणनीति पर मंथन होगा। कार्यकारिणी के अंतिम दिन होने वाली प्रधानमंत्री की रैली में उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी का विकास मॉडल पेश किया जाएगा। बीते दिनों सरकार के दो साल पूरा होने पर सहारनपुर में रैली के जरिए पहले ही चुनावी बिगुल फूंक चुके प्रधानमंत्री इसी रैली के जरिए पार्टी के चुनाव अभियान को गति देंगे।
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पार्टी सूत्रों ने बताया कि यूपी विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार और चुनाव अभियान समिति के लिए अलग-अलग चेहरे पर मंथन का सिलसिला लंबे समय से जारी है। बीते दो हफ्तों में मंथन का सिलसिला तेज हुआ है। ऐसे में कार्यकारिणी की बैठक के बाद इन दो जिम्मेदारियों से जुड़े चेहरों का एलान तो नहीं होगा, मगर निश्चित रूप से स्पष्ट संकेत जरूर दिए जाएंगे। चूंकि उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव नजदीक है, इसलिए कार्यकारिणी की बैठक मुख्य रूप से मोदी सरकार की दो साल की उपलब्धियां गिनाने और इसके व्यापक प्रचार-प्रसार की रणनीति बनाने पर केंद्रित होंगी।
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खास बात यह है कि पार्टी की योजना इस बैठक में राम मंदिर मुद्दे से खुद को दूर रखने की है। राजनीतिक प्रस्ताव में पार्टी हमेशा की तरह अयोध्या में सर्वसम्मति या अदालत के फैसले से राम मंदिर निर्माण की इच्छा व्यक्त करेगी।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा सोशल इंजीनियरिंग, हिंदुत्व और सुशासन को एकसाथ भुनाने की तैयारी में है। पार्टी की योजना सोशल इंजीनियरिंग के तहत विभिन्न जिम्मेदारियां बांटने के बाद प्रदेश की खराब कानून व्यवस्था और पिछड़ेपन को मुद्दा बनाने की है। जातिगत समीकरण साधने केलिए पार्टी पहले ही पिछड़ी जाति के केशव प्रसाद मौर्य को संगठन की कमान दे चुकी है। जिला अध्यक्ष एवं संगठन के अन्य दायित्वों के बंटवारे में गैरजाटव दलित और गैरयादव ओबीसी का खास ध्यान रखे जाने की योजना है।