Elgar Parishad Case: आरोपी महेश करेंगे कानूनी पढ़ाई, बॉम्बे HC ने कहा- कारावास नहीं छीन सकता शिक्षा का अधिकार
महेश राउत को साल 2018 के एल्गार परिषद भीमा कोरेगांव हिंसा में कथित माओवादियों के साथ संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए सिद्धार्थ कॉलेज ऑफ लॉ में कानून डिग्री पाठ्यक्रम में प्रवेश का निर्देश देने की मांग की थी।
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एल्गार परिषद मामले में जेल में बंद आरोपी महेश राउत कानून की पढ़ाई करेंगे। बॉम्बे हाईकोर्ट ने महेश राउत की लॉ डिग्री पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने की अनुमति देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि कारावास किसी भी व्यक्ति का शिक्षा का अधिकार नहीं छीन सकता। न्यायमूर्ति एएस गडकरी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने कहा कि शहर के कॉलेज में सीट आवंटित होने के बाद अभ्यर्थी को प्रवेश लेने से रोकना उसके मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगा।
महेश राउत को साल 2018 के एल्गार परिषद भीमा कोरेगांव हिंसा में कथित माओवादियों के साथ संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए मुंबई विवि के 2024-25 के शैक्षणिक वर्ष के लिए दक्षिण मुंबई के सिद्धार्थ कॉलेज ऑफ लॉ में कानून डिग्री पाठ्यक्रम में प्रवेश का निर्देश देने की मांग की थी।
याचिका पर सुनवाई के दौरान महेश के वकील मिहिर देसाई ने अदालत को बताया कि 2023 में राउत को हाईकोर्ट ने जमानत दे दी थी, लेकिन वह जेल में ही रहे क्योंकि अभियोजन पक्ष ने जमानत आदेश को चुनौती दी थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने जमानत आदेश पर रोक लगा दी जो जारी है। वहीं मुंबई विवि और सिद्धार्थ कॉलेज ने महेश राउत की याचिका के विरोध में कहा कि कानून एक पेशेवर पाठ्यक्रम है। इसके लिए उम्मीदवार की 75 प्रतिशत की उपस्थिति अनिवार्य है। इसे राउत पूरा नहीं कर पाएंगे।
इस पर कोर्ट ने कहा कि जब राउत ने कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) में शामिल होने की अनुमति मांगी तो किसी ने विरोध नहीं किया। सीईटी में शामिल होने से साफ था कि उनको कानून डिग्री पाठ्यक्रम में प्रवेश लेना था। हाईकोर्ट ने राउत को 2024-27 बैच के लिए सिद्धार्थ कॉलेज में कानून डिग्री पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने कहा कह कॉलेज को दस्तावेजों के सत्यापन के लिए उम्मीदवार की भौतिक उपस्थिति की आवश्यकता है, लेकिन उम्मीदवार तो जेल में है। इसलिए हम कॉलेज इसे कॉलेज पर छोड़ते हैं कि वह याचिकाकर्ता के अधिकृत प्रतिनिधि/परिजनों को शारीरिक रूप से कॉलेज में उपस्थित होने और दस्तावेजों को सत्यापित करने पर विचार करे।
पीठ ने कहा कि हमने राउत को कोई अन्य छूट नहीं दी है। वह अन्य उम्मीदवारों की तरह सभी नियमों और विनियमों का पालन करेंगे। कोर्ट ने कहा कि अगर राउत विश्वविद्यालय और कॉलेज के न्यूनतम उपस्थिति मानदंड या किसी अन्य पात्रता मानदंड को पूरा करने में विफल रहते हैं तो कॉलेज और विवि उनको परीक्षा में बैठने की अनुमति देने से इनकार करने के लिए स्वतंत्र हैं। आरोपी राउत कोर्ट के आदेश के आधार पर किसी भी राहत का दावा नहीं करेंगे।
आरोपी महेश राउत एक विशेष अदालत की अनुमति के बाद महाराष्ट्र सीईटी कानून परीक्षा में शामिल हुए थे और राज्य के उम्मीदवारों की मेरिट सूची में 95 वें स्थान पर थे। उन्हें सिद्धार्थ कॉलेज में एक सीट आवंटित की गई थी और उनकी बहन ने सीट फ़्रीज करने के लिए शुल्क का भुगतान किया है। साल 2018 में पुणे में एल्गार परिषद का आयोजन किया गया। पुलिस का आरोप है कि सम्मेलन के दौरान भड़काऊ भाषण दिए गए। इसके चलते अगले दिन पुणे में भीमा-कोरेगांव में हिंसा भड़क गई।
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