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मोदी सरकार के अहम निर्णयों का 2020 में सुप्रीम कोर्ट में होगा लिटमस टेस्ट

Wed, 01 Jan 2020 06:00 AM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Wed, 01 Jan 2020 06:00 AM IST
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Important decisions of Modi government will be litmus test in Supreme Court in 2020
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए), अनुच्छेद-370 को हटाने सहित लिए गए अन्य अहम निर्णयों को वर्ष 2020 में सुप्रीम कोर्ट केलिटमस टेस्ट से गुजरना होगा। ये कुछ ऐसे मसले हैं जो शुरुआत से ही भाजपा के एजेंडे में रहा था और इन मसलों को सत्तारूढ दल और विपक्षी दलों में रार मची हुई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2019 राफेल सौदे को लेकर दिए गए फैसले से केंद्र सरकार को बड़ी राहत मिली थी क्योंकि इस मसले को लोकसभा चुनाव में विपक्षी दलों द्वारा जोर-शोर से उठाया गया था और इसे लेकर सत्तारुढ़ दल पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था। 

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वहीं वर्ष 2019 अयोध्या मामले को लेकर भी याद किया जाएगा। कई दशकों से चल रहे इस विवाद का सुप्रीम कोर्ट ने निपटारा किया था। इस मसले को भी केंद्र की सत्ता में काबिज सरकार केसाथ जोड़कर देखा जा रहा था। भीषण ठंड के बाद शुरू हुए नए साल को सुप्रीम कोर्ट से 'राजनीतिक गर्माहट’ मिल सकती है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट सीएए जैसे गंभीर मसले पर सुनवाई करेगा। इस मसले को लेकर देश के कई प्रांतों में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। 
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जहां समाज का एक धरा सीएए के सख्त खिलाफ है वहीं केंद्र सरकार इस मसले पर अपने कदम खिंचने को कतई तैयार नहीं है। इस मसले को लेकर 60 से अधिक याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है। अब देखने वाली बात होगी कि सुप्रीम कोर्ट इस पर क्या निर्णय लेगा। इसके अलावा इस वर्ष सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद-370 को हटाने व जम्मू व कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने जैसे संवेदनशील मुद्दे का भी परीक्षण करेगा। वहीं आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट इस पर भी फैसला सुनाएगा कि अनुच्छेद-370 को हटाने के बाद कश्मीर घाटी में लगी पाबंदियां कहां तक जायज है?
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इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट 103वें संविधान संशोधन बिल का भी परीक्षण करेगा। इस अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को नौकरी व शिक्षण संस्थानों में 10 फीसदी आरक्षण दिया गया है। इसके खिलाफ दायर याचिकाओं में सरकार के इस निर्णय को असंवैधानिक बताया गया है।


साथ ही सुप्रीम कोर्ट ट्रिपल तलाक को दंडनीय अपराध बनाने के सरकार के निर्णय का भी परीक्षण करेगा। इस कानून केतहत तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। इस मसले को लेकर भी कई याचिकाएं दायर की गई हैं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार द्वारा इलेक्ट्रॉल बांड लाने के निर्णय का भी परीक्षण करेगा।

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