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कर्नाटक: गोवध रोधी कानून में मवेशी की परिभाषा बदली, भैंस को भी किया शामिल

Sat, 12 Dec 2020 03:25 PM IST
Tanuja Yadav न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: Tanuja Yadav Updated Sat, 12 Dec 2020 03:25 PM IST
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impact of cow slaughter law in bjp owned states slaughter cases are decreasing
cow - फोटो : अमर उजाला

कर्नाटक विधानसभा में गोवध विरोधी कानून पास किया जा चुका है। हालांकि इस कानून पर विचार किए बिना ही विधान परिषद ने इसे अनिश्चिकाल के लिए स्थगित कर दिया था लेकिन मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने शुक्रवार को कहा कि सरकार इसे प्रभाव में लाने के लिए अध्यादेश लाएगी। 

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बता दें कि मुख्यमंत्री ने विधान परिषद की ओर से इस फैसले को अनिश्चितकाल तक स्थगित करने पर ऐतराज जताया था। कर्नाटक भाजपा शासित नया राज्य हैं, जहां मवेशियों के वध के खिलाफ सख्त विधेयक बना है। इस विधेयक की खासियत इसकी बताई गई मवेशी की परिभाषा है।
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मवेशी में भैंस को भी जोड़ा
मवेशी में गाय, बैल और बछड़े ही नहीं बल्कि नर और मादा भैंस भी शामिल हैं। इस विधेयक से समस्त गोवंश को काटने पर रोक लग जाएगी। हालांकि गौर करने वाली बात यह है कि जिन राज्यों में गोवध निषेध कानून प्रभावी ढंग से लागू है, वहां इनकी संख्या लगातार कम हो रही है।
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एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आधिकारिक पशुधन गणना के आंकड़े बताते हैं कि साल 2012-2019 के बीच उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र (जहां एक साल पहले तक भाजपा की सरकार थी) में मवेशियों की आबादी में कमी देखी गई। हालांकि ये राज्य भैंस की पशुगणना में आगे हैं।

कर्नाटक में लाया गया बिल ज्यादा कठोर है

वहीं उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, पंजाब और आंध्र प्रदेश में भी आज गायों की तुलना में भैंस ज्यादा हैं। 2019 की पशुगणना के मुताबिक पश्चिम बंगाल गायों के मामले में यूपी से आगे निकलकर नंबर एक हो गया है। कर्नाटक में बिल लाया गया है, वो दूसरे राज्यों में बने कानूनों के विपरीत है। 

कर्नाटक से पहले महाराष्ट्र में जब देवेंद्र फडणवीस की सरकार थी, तो पशुवध विरोधी सबसे कठोर कानून बनाया गया था। महाराष्ट्र पशु संरक्षण अधिनियम 2015 ने सांडों और बैलों के वध को अपराध बना दिया है। ऐसा करने पर पांच साल की सजा हो सकती है। हालांकि इससे पहले का कानून केवल गायों तक सीमित था, जिसमें मात्र छह महीने की जेल थी। 

वहीं यूपी और मध्यप्रदेश में अब तक भैंस का वध करने का अपराध नहीं बताया गया है। कर्नाटक के कानून के मुताबिक अगर किसी मवेशी की उम्र 13 साल से ज्यादा है तो उसे मारा जा सकता है, हालांकि डेयरी उद्योग वाले लोग इसे ठीक नहीं मान रहे हैं।

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