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Monsoon: मानसून के केरल पहुंचने में हो रही देरी, पहले कब-कब ऐसा हुआ, इसका असर क्या होगा?

Mon, 05 Jun 2023 08:16 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Mon, 05 Jun 2023 08:16 PM IST
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सार
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने रविवार को केरल में मानसून के पहुंचने की तारीख से तीन से चार दिन की देरी की आशंका जताई है। मानसून का समय पर आगमन भारत के फसल उत्पादन और आर्थिक विकास के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले साल कम बारिश ने अन्न उत्पादन को प्रभावित किया था। 
 
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IMD: Delay in arrival of monsoon in Kerala, what will Its effect and possible consequences
मानसून का हाल - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

मौसम हर पल करवट बदल रहा है। कहीं बारिश की फुहारें पड़ रही हैं तो दूसरी जगहों में गर्मी लोगों को परेशान कर रही है। एक जून की तारीख गुजरने के साथ ही लोग अब बेसब्री से मानसून का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने रविवार को कहा कि केरल में मानसून के पहुंचने की तारीख से तीन से चार दिन की देरी हो सकती है।


सामान्य तौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून राज्य में एक जून को करीब सात दिनों के मानक विचल के साथ दस्तक देता है। विभाग (आईएमडी) ने मई के मध्य में कहा था कि यह चार जून तक केरल पहुंच सकता है। आईएमडी ने मानसून को लेकर क्या जानकारी दी है? मानसून में देरी की वजह क्या है? लेट मानसून का असर क्या होगा? कब-कब देरी से पहुंचा मानसून? आइए जानते हैं...

हिमाचल से विदा हुआ मानसून
हिमाचल से विदा हुआ मानसून - फोटो : अमर उजाला
आईएमडी ने मानसून को लेकर क्या जानकारी दी है?
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने रविवार को एक बयान में कहा, दक्षिण अरब सागर के ऊपर पछुआ हवाओं के बढ़ने से परिस्थितियां अनुकूल हो रही हैं। साथ ही, पछुआ हवाओं की गहराई धीरे-धीरे बढ़ रही है और इन हवाओं की गहराई औसत समुद्र तल से 2.1 किलोमीटर तक पहुंच गई है। मानसून को केरल तट में टकराने में तीन से चार दिन का समय और लग सकता है।

विभाग ने कहा, दक्षिण-पूर्वी अरब सागर में बादलों का द्रव्यमान भी बढ़ रहा है। हमें उम्मीद है कि केरल में मानसून की शुरुआत के लिए इन अनुकूल परिस्थितियों में अगले तीन-चार दिनों के दौरान और सुधार होगा। इसकी लगातार निगरानी की जा रही है। 

मानसून
मानसून - फोटो : अमर उजाला।
कब-कब देरी से पहुंचा मानसून?
दक्षिण-पूर्व मानसून 2022 में समय से दो दिन पहले 29 मई को पहुंचा था। इससे पहले 2021 में समय से तीन दिन देरी से  तीन जून को, 2020 में एक जून,  2019 में आठ जून को केरल पहुंचा। आईएमडी ने पहले कहा था कि अल नीनो की स्थिति के बावजूद दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम के दौरान भारत में सामान्य बारिश होने की उम्मीद है। उत्तर पश्चिम भारत में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है।

बारिश की कमी के कारण धान की खेत में दरार
बारिश की कमी के कारण धान की खेत में दरार - फोटो : अमर उजाला
मानसून में देरी का असर क्या होगा?
दक्षिण-पश्चिम मानसून देश के आधे से अधिक कृषि भूमि को सींचता है और इसमें देरी का सबसे ज्यादा असर देश के कृषि क्षेत्र पर पड़ेगा। कई राज्यों के किसान आमतौर पर जून के पहले सप्ताह में अपने खेतों को बुवाई के लिए तैयारी करना शुरू कर देते हैं, लेकिन उन कार्यों में देरी हो सकती है। चावल, गन्ना, दलहन और तिलहन जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई जून में मानसून की बारिश के आगमन के साथ शुरू होती है। खरीफ फसलें भारत के खाद्य उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा हैं और देरी से या खराब मानसून से आपूर्ति की समस्याएं और खाद्य मुद्रास्फीति में तेजी देखने को मिल सकती है। 

मानसून में देरी से पानी की कमी के साथ-साथ देश के कई हिस्सों में सूखे का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून में देरी या देरी से प्रगति देश के उन क्षेत्रों की जल और खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न कर सकती है जो पहले से ही कम बारिश और लू से प्रभावित हैं।

खेतों पर धान की रोपाई करते किसान
खेतों पर धान की रोपाई करते किसान - फोटो : अमर उजाला
समय पर मानसून का आना क्यों जरूरी है? 
भारत में मानसून के मौसम की समय पर शुरुआत अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा साबित होती है, खासकर उन किसानों के लिए जिनकी भूमि सालाना दक्षिण-पश्चिम मानसून से सिंचित होती है। भारत के कृषि परिदृश्य के लिए सामान्य वर्षा महत्वपूर्ण है, जिसमें शुद्ध खेती क्षेत्र का 52 फीसदी इस पर निर्भर है। यह देश भर में बिजली उत्पादन के अलावा पीने के पानी के लिए महत्वपूर्ण जलाशयों की भरपाई के लिए भी महत्वपूर्ण है। देश के कुल खाद्य उत्पादन में वर्षा सिंचित कृषि का योगदान लगभग 40 फीसदी है, जो इसे भारत की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बनाता है।

मानसून का समय पर आगमन भारत के फसल उत्पादन और आर्थिक विकास के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले साल कम बारिश ने अन्न उत्पादन को प्रभावित किया था। भारत अपनी वार्षिक वर्षा का लगभग 70% जून से सितंबर के मानसून के मौसम में प्राप्त करता है, जिससे यह करीब 26 करोड़ किसानों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।

गोरखपुर में बारिश।
गोरखपुर में बारिश। - फोटो : अमर उजाला।
इस बार कितनी बारिश की उम्मीद
पूर्वी और पूर्वोत्तर, मध्य और दक्षिण प्रायद्वीप में 87 सेंटीमीटर के दीर्घकालिक औसत के 94-106 फीसदी पर सामान्य बारिश होने की उम्मीद है। लंबी अवधि के औसत से 90 फीसदी से कम बारिश को 'कम', 90 फीसदी से 95 फीसदी के बीच 'सामान्य से कम', 105 फीसदी से 110 फीसदी के बीच 'सामान्य से अधिक' और 110 फीसदी से अधिक को 'अतिरिक्त' वर्षा माना जाता है।
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