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Maharashtra: एलोपैथिक डॉक्टरों ने हड़ताल की दी धमकी, महाराष्ट्र में 18 सितंबर को 24 घंटे बंद रहेंगे अस्पताल
Wed, 17 Sep 2025 07:08 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: पवन पांडेय
Updated Wed, 17 Sep 2025 07:08 PM IST
सार
महाराष्ट्र में 18 सितंबर को स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पर खासा असर पड़ सकता है। दरअसल एलोपैथिक डॉक्टरों ने हड़ताल की धमकी दी है, इस कड़ी में 18 सितंबर को 24 घंटे अस्पताल बंद रहेंगे। जानें क्या है विवाद और क्यों हड़ताल करेंगे डॉक्टर?
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- फोटो : IMA।
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विस्तार
महाराष्ट्र में लगभग 1.8 लाख एलोपैथिक डॉक्टर 18 सितंबर को सुबह 8 बजे से 24 घंटे की हड़ताल करेंगे। यह हड़ताल राज्य सरकार के उस फैसले के खिलाफ है, जिसमें होम्योपैथिक डॉक्टरों को एक विशेष कोर्स के बाद एलोपैथिक दवाइयां लिखने की अनुमति दी गई है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) महाराष्ट्र के अध्यक्ष डॉ. संतोष कदम ने बुधवार को कहा कि सभी सरकारी और निजी अस्पतालों के डॉक्टर और मेडिकल छात्र इस हड़ताल में शामिल होंगे। हालांकि, आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी।
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क्या है विवाद की वजह?
राज्य सरकार ने हाल ही में महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (एमएमसी) को निर्देश दिया था कि जो होम्योपैथिक डॉक्टर एक साल का सर्टिफिकेट कोर्स इन मॉडर्न फार्माकोलॉजी (सीसीएमपी) पूरा कर चुके हैं, उन्हें एमएमसी में पंजीकृत किया जाए। इसके बाद वे सीमित मामलों में एलोपैथिक दवाइयां लिख सकेंगे। 5 सितंबर को इस संबंध में नया सरकारी आदेश (जीआर) जारी किया गया, जिससे एलोपैथिक डॉक्टर नाराज हो गए।
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क्या है डॉक्टरों की आपत्ति?
डॉ. संतोष कदम का कहना है कि यह फैसला मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। आईएमए ने अपनी चिट्ठी में सरकार को चेताया है कि ऐसे डॉक्टरों के पास पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं होगा। इससे गलत इलाज, गलत दवाइयां, एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस और मरीजों की मौत जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं, खासकर ग्रामीण इलाकों में। आईएमए ने यह भी कहा कि इस फैसले से लोगों के मन में भ्रम और अविश्वास पैदा होगा, महाराष्ट्र के मेडिकल सेक्टर की अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता पर असर पड़ेगा और अन्य वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों के डॉक्टर भी इसी तरह की मांग कर सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था में अराजकता फैल जाएगी।
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बढ़ सकता है हड़ताल का दायरा
सेंट्रल मार्ड (एमएआरडी) और बीएमसी मार्ड, जो सरकारी और बीएमसी मेडिकल कॉलेजों के रेजिडेंट डॉक्टरों के संगठन हैं, उन्होंने भी हड़ताल में शामिल होने का एलान किया है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशंस के अध्यक्ष डॉ. अक्षय डोंगर्डीवे ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया तो डॉक्टर सड़क पर उतरकर देशव्यापी आंदोलन करेंगे। बता दें कि महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (एमएमसी) ही राज्य में डॉक्टरों का पंजीकरण और नियमों की निगरानी करती है।
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क्या है विवाद की वजह?
राज्य सरकार ने हाल ही में महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (एमएमसी) को निर्देश दिया था कि जो होम्योपैथिक डॉक्टर एक साल का सर्टिफिकेट कोर्स इन मॉडर्न फार्माकोलॉजी (सीसीएमपी) पूरा कर चुके हैं, उन्हें एमएमसी में पंजीकृत किया जाए। इसके बाद वे सीमित मामलों में एलोपैथिक दवाइयां लिख सकेंगे। 5 सितंबर को इस संबंध में नया सरकारी आदेश (जीआर) जारी किया गया, जिससे एलोपैथिक डॉक्टर नाराज हो गए।
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क्या है डॉक्टरों की आपत्ति?
डॉ. संतोष कदम का कहना है कि यह फैसला मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। आईएमए ने अपनी चिट्ठी में सरकार को चेताया है कि ऐसे डॉक्टरों के पास पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं होगा। इससे गलत इलाज, गलत दवाइयां, एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस और मरीजों की मौत जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं, खासकर ग्रामीण इलाकों में। आईएमए ने यह भी कहा कि इस फैसले से लोगों के मन में भ्रम और अविश्वास पैदा होगा, महाराष्ट्र के मेडिकल सेक्टर की अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता पर असर पड़ेगा और अन्य वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों के डॉक्टर भी इसी तरह की मांग कर सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था में अराजकता फैल जाएगी।
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बढ़ सकता है हड़ताल का दायरा
सेंट्रल मार्ड (एमएआरडी) और बीएमसी मार्ड, जो सरकारी और बीएमसी मेडिकल कॉलेजों के रेजिडेंट डॉक्टरों के संगठन हैं, उन्होंने भी हड़ताल में शामिल होने का एलान किया है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशंस के अध्यक्ष डॉ. अक्षय डोंगर्डीवे ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया तो डॉक्टर सड़क पर उतरकर देशव्यापी आंदोलन करेंगे। बता दें कि महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (एमएमसी) ही राज्य में डॉक्टरों का पंजीकरण और नियमों की निगरानी करती है।