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Supreme Court: 'अवैध रोहिंग्याओं को भारत में बसने का अधिकार नहीं', केंद्र ने शीर्ष अदालत में दायर किया हलफनामा

Thu, 21 Mar 2024 06:28 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 21 Mar 2024 06:28 AM IST
सार

Supreme Court: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को शीर्ष कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा कि रोहिंग्या अवैध अप्रवासी हैं और उन्हें शरणार्थी के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत देश में सिर्फ भारतीय नागरिकों को ही बसने का मौलिक अधिकार है। 

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Illegal Rohingyas have no right to settle in India: Center in Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि अवैध रोहिंग्या मुस्लिम प्रवासियों को भारत में रहने और बसने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है।

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सरकार ने यह भी कहा कि न्यायपालिका अवैध रूप से भारत में घुसपैठ करने वालों को शरणार्थी का दर्जा देने के मकसद से एक अलग श्रेणी बनाने के लिए संसद व कार्यपालिका के विधायी और नीतिगत क्षेत्र में दखल नहीं दे सकती। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को शीर्ष कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा, रोहिंग्या अवैध अप्रवासी हैं और उन्हें शरणार्थी के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत, देश में सिर्फ भारतीय नागरिकों को ही बसने का मौलिक अधिकार है। 

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विदेशी अधिनियम के तहत निपटा जाएगा...
सरकार ने कहा, अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वालों से विदेशी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार निपटा जाएगा। भारत, 1951 के शरणार्थी सम्मेलन और शरणार्थियों की स्थिति, 1967 से संबंधित प्रोटोकॉल का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है, इसलिए रोहिंग्याओं से अपने घरेलू कानून के अनुसार निपटेगा।

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