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चिंताजनक: भारत सहित कई देशों में अवैध खनन बना संगठित अपराध का अड्डा, वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर खतरा

Sun, 20 Jul 2025 07:07 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sun, 20 Jul 2025 07:07 AM IST
सार

झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब और महाराष्ट्र से लेकर हिमालयी राज्यों तक फैले खनन माफिया नेटवर्क सरकार की आंखों के सामने समानांतर सत्ता चला रहे हैं। इस वैश्विक जांच रिपोर्ट में अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और एशिया के उन देशों की पड़ताल की गई है जहां खनन अब जंगलों और समुदायों को निगलता जा रहा है।

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Illegal mining become hub of organized crime in many countries including India
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत सहित दुनिया के कई देशों में अवैध खनन अब न केवल पर्यावरणीय आपदा का रूप ले चुका है बल्कि यह संगठित अपराध, मानवाधिकार उल्लंघन और हिंसक संघर्षों की बड़ी वजह भी बन गया है। भारत में कोयले से लेकर रेत तक खनिजों की बेहिसाब लूट ने इस संकट को और गंभीर बना दिया है।

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संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) और पर्यावरण समूह ग्रीनपीस व रेनफॉरेस्ट एक्शन नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब और महाराष्ट्र से लेकर हिमालयी राज्यों तक फैले खनन माफिया नेटवर्क सरकार की आंखों के सामने समानांतर सत्ता चला रहे हैं। इस वैश्विक जांच रिपोर्ट में अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और एशिया के उन देशों की पड़ताल की गई है जहां खनन अब जंगलों और समुदायों को निगलता जा रहा है।
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भारत में अवैध खनन न सिर्फ एक पारिस्थितिक संकट है बल्कि यह भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मिलीभगत की जीती-जागती मिसाल भी बन चुका है। झारखंड के रांची, चतरा और दुमका में कोयला और लौह अयस्क की अवैध खुदाई हो रही है जबकि ओडिशा के क्योंझर और सुंदरगढ़ जैसे जिलों में करोड़ों के लौह अयस्क की चोरी सामने आई है। कर्नाटक के बेल्लारी में रेड्डी बंधुओं के कोयला घोटाले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। मध्य प्रदेश की नर्मदा, चंबल और बेतवा नदियों में अवैध रेत खनन इतना प्रचलित है कि इन्हें खनन युद्धभूमि कहा जाता है।

उत्तर प्रदेश के यमुना और घाघरा किनारों पर खनन माफिया खुलेआम हथियारबंद होकर शासन को चुनौती देते थे, हालांकि पिछले कुछ वर्षों से इस पर लगाम कसी गई है।

महाराष्ट्र में पर्यावरण को पहुंच रहा गंभीर नुकसान
महाराष्ट्र में रायगढ़ और पालघर जिलों में समुद्री रेत का अवैध दोहन पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचा रहा है, जबकि राजस्थान में संगमरमर और चूना पत्थर के खनन से पहाड़ियां बिखरती जा रही हैं। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में नदी घाटियों में मशीनों से की जा रही खुदाई हिमालयी पारिस्थितिकी पर खतरे का संकेत है। वर्ष 2024 की एक स्वतंत्र रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल लगभग 10,000 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य के खनिज अवैध रूप से निकाले जाते हैं।


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माना जाए सिस्टमिक करप्शन  
रेनफॉरेस्ट एक्शन नेटवर्क और ग्रीनपीस के पर्यावरण विश्लेषकों के मुताबिक भारत में कोयला, बॉक्साइट, ग्रेनाइट और बालू के अवैध खनन को सिस्टमिक करप्शन का अंग माना जाना चाहिए क्योंकि यह स्थानीय नेताओं, अधिकारियों और ठेकेदारों के गठजोड़ से पनपता है। सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी की सख्ती के बावजूद जमीनी हालात में कोई ठोस बदलाव नहीं आया है।

कांगो गणराज्य में हालात बेहद चिंताजनक
कांगो कोबाल्ट, सोना और टैंटलम जैसे दुर्लभ खनिजों का बड़ा भंडार है। किंतु यहां के अधिकांश खनिज असंगठित और अवैध खनन के माध्यम से निकाले जाते हैं, जहां बच्चे और महिलाएं खतरनाक परिस्थितियों में काम करते हैं।

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