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ED: आबकारी विभाग के अफसरों के नाम पर अवैध ठेकेदारों ने बेची शराब, 13 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त

Thu, 25 Jun 2026 08:09 PM IST
Rahul Kumar डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rahul Kumar Updated Thu, 25 Jun 2026 08:09 PM IST
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Illegal contractors sold liquor in the names of Excise Department officials family members or in officials own
ईडी - फोटो : अमर उजाला

ईडी के बंगलूरू जोनल ऑफिस ने पीएमएलए, 2002 की धारा 17 के तहत 24 जून को कर्नाटक के बेंगलुरु, मैसूरु और बेलगावी में 14 जगहों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई राज्य के आबकारी विभाग में बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार और सरकारी अधिकारियों द्वारा अवैध रूप से संपत्ति जमा करने के आरोपों के आधार पर की गई है। आबकारी विभाग के अफसरों के परिजनों या उनके नाम पर अवैध ठेकेदारों ने जमकर शराब बेची। अफसरों ने अपने परिजनों या जानकार ठेकेदारों को ही शराब बेचने का लाइसेंस दिया। ईडी ने इस मामले में अभी तक 13 करोड़ रुपये की संपत्ति 'अपराध की आय' जब्त की है। 

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कर्नाटक में आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जो केस दर्ज किया गया, उसमें आरोप लगा है कि उन्होंने अलग-अलग आबकारी लाइसेंस जारी करने या उनकी प्रक्रिया पूरी करने के लिए अवैध रूप से पैसे लिए। उस पैसे का इस्तेमाल अपनी निजी संपत्ति बढ़ाने के लिए किया। एफआईआर से मिली जानकारी की कई ऐसी शिकायतों और दस्तावेजों से पुष्टि की गई। ये शिकायतें और दस्तावेज डायरेक्टोरेट को आरोपी सरकारी कर्मचारियों द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों/प्रक्रियाओं के बारे में मिले थे। इन गतिविधियों में अचल/चल संपत्ति खरीदना, बेनामी लेनदेन और अवैध रूप से कमाए गए पैसे से अपने परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के जरिए व्यवसायों में निवेश करना शामिल था। तलाशी अभियान में जिन मुख्य आरोपियों के यहां छापेमारी की गई, उनमें आबकारी अधिकारी जगदीश नायक, के.एम. थम्मन्ना और वाई.डी. मंजूनाथ के साथ-साथ उनके परिवार के सदस्य, बिजनेस पार्टनर और सहयोगी शामिल थे।
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आरोपियों के काम करने का तरीका 
1. राज्य का आबकारी विभाग रिश्वत वसूलने के लिए सरकारी अधिकारियों, उनके सहयोगियों और निजी व्यक्तियों के एक संगठित सिंडिकेट नेटवर्क की तरह काम कर रहा है।
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2. यह नेटवर्क एक अच्छी तरह से काम करने वाली मशीन की तरह  है, जो अलग-अलग आबकारी दुकानों से मिलने वाले भ्रष्टाचार के पैसे से चलता है। 
3. ये दुकानें फील्ड अधिकारियों को हर महीने एक तय रिश्वत देती हैं। 
4. लाइसेंस के नवीनीकरण/स्थानांतरण और नए लाइसेंस जारी करने के दौरान भी पैसा इकट्ठा किया जाता है। 
5. इकट्ठा की गई रिश्वत को एक जगह जमा किया जाता है और बिचौलियों व सहयोगियों की मदद से बांटा जाता है। 
6. ये लोग एक अनौपचारिक कैश बुक (जो एक जगह से जब्त की गई थी) में मिले और दिए गए पैसे का हिसाब रखते हैं।
7. इस तरह से इकट्ठा किए गए अवैध पैसे (यानी अपराध से हुई कमाई) का इस्तेमाल अधिकारी अपने निजी खर्च, प्रॉपर्टी और बिजनेस में निवेश के लिए करते हैं।
8. जांच के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग का एक अनोखा तरीका सामने आया है, जिससे पता चला है कि आबकारी विभाग के ज़्यादातर अधिकारियों ने अपने परिवार के सदस्यों या उनके नियंत्रण वाली संस्थाओं के नाम पर शराब के लाइसेंस लिए हैं और वे अवैध रूप से शराब का कारोबार चला रहे हैं। 
10. इन कारोबारों से होने वाली कमाई को कानूनी कारोबार से हुई कमाई के तौर पर दिखाया जाता है, जिससे अपराध से हुई कमाई को मुख्य अर्थव्यवस्था में शामिल कर लिया जाता है।

तलाशी की कार्रवाई के दौरान, अलग-अलग जगहों से डिजिटल डिवाइस, रिश्वत बांटने से जुड़ी कैश बुक, प्रॉपर्टी के कागज़ात वगैरह जैसे सबूत ज़ब्त किए गए हैं। तलाशी के दौरान वाईडी मंजूनाथ, उनके ड्राइवर, परिवार के सदस्यों और उनके साथियों के ठिकानों से अपराध से कमाई गई रकम के तौर पर लगभग 5.5 करोड़ रुपये नकद, लगभग 7.8 करोड़ रुपये की सोने की ज्वेलरी और 3.3 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा ज़ब्त की गई। इस तरह, इस मामले में अब तक ज़ब्त की गई अपराध से कमाई गई कुल रकम 13.3 करोड़ रुपये है।






 

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