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ISRO: आईआईटी मद्रास-इसरो को मिली बड़ी सफलता, बनाया स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर 'शक्ति'

Tue, 11 Feb 2025 10:10 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Tue, 11 Feb 2025 10:10 PM IST
सार

शक्ति एक खास तरह का सिस्टम कस्टम प्रोसेसर है जिसका डिजाइन रिस्क-5, एक ओपन-सोर्स इंस्ट्रक्शन सेट आर्किटेक्चर (आईएसए) पर आधारित हैं। ‘शक्ति’ को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से ‘डिजिटल इंडिया रिस्क-5’ पहल (डीआईआर-5) के तहत तैयार कराया जा रहा है।

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IIT Madras, ISRO develop and successfully boot indigenous micro processor to aid space technologies
माइक्रोप्रोसेसर - फोटो : एडोव

विस्तार

आईआईटी मद्रास और इसरो ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में मदद के लिए स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘शक्ति’ विकसित किया है। इसका इस्तेमाल बाहरी अंतरिक्ष में कमांड और नियंत्रण प्रणालियों और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में किया जा सकता है। शक्ति माइक्रोप्रोसेसर परियोजना का नेतृत्व आईआईटी मद्रास के निदेशक वी कामकोटि कर रहे हैं। इसे कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग में प्रताप सुब्रह्मण्यम सेंटर फॉर डिजिटल इंटेलिजेंस एंड सिक्योर हार्डवेयर आर्किटेक्चर में किया जा रहा है।
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क्या है शक्ति में खास?
शक्ति एक खास तरह का सिस्टम कस्टम प्रोसेसर है जिसका डिजाइन रिस्क-5, एक ओपन-सोर्स इंस्ट्रक्शन सेट आर्किटेक्चर (आईएसए) पर आधारित हैं। ‘शक्ति’ को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से ‘डिजिटल इंडिया रिस्क-5’ पहल (डीआईआर-5) के तहत तैयार कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य माइक्रोप्रोसेसर आधारित उन उत्पादों के स्वदेशी विकास को बढ़ावा देना है जो रिस्क-5 तकनीक को अपनाने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए सर्वश्रेष्ठ-इन-क्लास सुरक्षा और दृश्यता प्रदान करते हैं।
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आईआईटी मद्रास के निदेशक वी कामकोटि ने कहा, स्वदेशी आरआईएससीवी कंट्रोलर फॉर स्पेस एप्लीकेशन (आईआरआईएस) चिप को शक्ति प्रोसेसर बेसलाइन से विकसित किया गया है। इसका इस्तेमाल आईओटी से लेकर रणनीतिक जरूरतों के लिए कंप्यूट सिस्टम तक के विविध क्षेत्रों में किया जा सकता है। यह विकास इसरो की ओर से अपने अनुप्रयोगों, कमांड और कंट्रोल सिस्टम और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए उपयोग किए जाने वाले सेमीकंडक्टरों को स्वदेशी बनाने के प्रयास का हिस्सा था। यह अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों में ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में आगे बढ़ने को गति देगा।
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