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आईआईटी: शैक्षणिक सत्र 2021-22 में एमटेक प्रोग्राम की फीस में नहीं होगी बढ़ोतरी
Tue, 23 Feb 2021 03:43 AM IST
Kuldeep Singh
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Tue, 23 Feb 2021 03:43 AM IST
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Ramesh pokhariyal nishank
- फोटो : social media
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देश के सभी 23 आईआईटी में शैक्षणिक सत्र 2021-22 में एमटेक प्रोग्राम की फीस में बढ़ोतरी नहीं होगी। रोजगार और शोध के तहत एमटेक प्रोग्राम में नए कोर्स भी शामिल किए जाएंगे। आईआईटी एमटेक प्रोग्राम की पांच से दस हजार रुपये सालाना फीस बीटेक प्रोग्राम के समानांतर दो लाख रुपये सालाना करना चाहते हैं। काउंसिल एमटेक फीस बढ़ोतरी का प्रस्ताव पास कर चुकी है पर सरकार उसकी अनुमति नहीं दे रही है।
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की अध्यक्षता में आईआईटी कांउसिल की सोमवार को बैठक आयोजित हुई। इसमें फैसला लिया गया है फिलहाल एमटेक प्रोग्राम की फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी।
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दरअसल, आईआईटी काउंसिल का कहना है कि एमटेक प्रोग्राम की फीस पांच से दस हजार रुपये सालाना है। जबकि छात्रों को हर महीने 12400 रुपये स्टाइपेंड मिलता है। इसके अलावा आईआईटी के अकेडमिक सीनेट समेत चार अन्य प्रस्तावों के लिए चार कमेटी भी गठित की गई है।
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शिक्षकों के पांच साल प्रोबेशन पर दूसरी कमेटी गठित:
काउंसिल बैठक में टेन्योर ट्रैक सिस्टम को मंजूरी दी गई है। इसके आधार पर नए प्रोफेसरों के परफॉर्मेंस की हर 5 साल पर समीक्षा होगी। एक एक्सटर्नल कमिटी रिसर्च और संस्थान को उनकी सेवा के आधार पर प्रफेसरों का मूल्यांकन करेगी। इस मूल्यांकन के आधार पर नए प्रोफेसरों का असोसिएट प्रोफेसर के तौर पर प्रमोशन होगा या फिर उनकी छुट्टी कर दी जाएगी। हालांकि इसके लिए अब दूसरी कमेटी गठित कर दी है।
ग्लेशियर और समुद्र पर पाठ्यक्रम व शोध
उत्तराखंड आपदा को देखते हुए अब आईआईटी अपने -अपने इलाकों में ग्लेशियर और समुद्र पर पाठ्यक्रम व शोध करेंगे। आईआईटी जम्मू, आईआईटी मंडी, आईआईटी रुढ़की, आईआईटी रूपनगर को अब ग्लोबल वार्मिंग के तहत ग्लेशियर के पिघलने के कारणों को जानने के लिए बीटेक, एमटेक में विषय और शोध होगा। वहीं, आईआईटी गोवा, आईआईटी मद्रास, आईआईटी बॉम्बे समुद्र पर मंथन करेगा। इसमें सुनामी, तुफान आदि शामिल है।
पूर्व इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन वाली कमेटी इंडस्ट्री संग करेगी काम
आत्मनिर्भर भारत अभियान में आईआईटी से पासआउट होने वाले छात्रों को भारत में रोकने के मकसद से अब इंडस्ट्री, आईआईटी, पावर, मैन्यूफैक्चरिंग मिलकर काम करेगी। इस रिसर्च एंड डेवलेपमेंट योजना की जिम्मेदारी इसरो के पूर्व इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली कमेटी को दी गई है।