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बड़ी खबर: कोरोना के सभी 5500 म्यूटेंट भारत में मौजूद...तो इसलिए तेजी से फैल रहा है नया वैरिएंट

Tue, 06 Apr 2021 08:19 PM IST
Harendra Chaudhary राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली
राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 06 Apr 2021 08:19 PM IST
सार

आईआईटी इंदौर के बायोसाइंस के प्रोफेसर हेमचंद्र झा ने बताया, कोविड के आने के बाद से ही आईआईटी की वायरोलॉजी लैब कोविड-19 के अध्ययन में लगी है। रिसर्च में सामने आया कि कोरोना के लिए जिम्मेदार वायरस सार्स कोविड-19 में तीन प्रमुख तरह के प्रोटीन होते हैं...

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IIT Indore research said, More than 5500 mutants of coronavirus have been revealed in India
कोरोना की टेस्टिंग - फोटो : PTI

विस्तार

कोरोना वायरस के अब तक साढ़े पांच हजार से ज्यादा म्यूटेंट (बदला हुआ प्रकार) सामने आ चुके हैं। ताजा अध्य्यन में कहा गया है कि नए म्यूटेंट की बॉन्डिंग क्षमता कमजोर है, इसलिए ये ज्यादा फैल रहा है। हालांकि कमजोर बॉन्डिंग के चलते ही इससे मृत्यु दर और गंभीर प्रभाव के मामले भी कम हैं। ये शोध आईआईटी इंदौर की ओर से प्रकाशित हुआ है।

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इससे पहले आईआईटी इंदौर शरीर के एस-2 रिसेप्टर के चलते कोविड वायरस संक्रमण फैलने और वायरस के मस्तिष्क पर असर को लेकर भी नतीजे दे चुका है। आईआईटी इंदौर ने अपने ताजा शोध में दावा किया है कि वायरस में मौजूद प्रोटीन में बदलाव से उसका स्वरूप बदलता है। इसी प्रोटीन का जुड़ाव या बंधन बदलने से वायरस का प्रकोप और प्रभाव भी बदल रहा है। अब तक मिले 5500 से ज्यादा वैरिएंट में से लगभग सभी भारत के मरीजों में मिल चुके हैं। आईआईटी इंदौर के बायोसाइंस और बायोमेडिकल साइंस विभाग के इस शोध को अंतरराष्ट्रीय रिसर्च जर्नल 'हेलियान' ने प्रकाशित भी किया है।

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आईआईटी के बायोसाइंस के प्रोफेसर हेमचंद्र झा ने अमर उजाला को बताया कि कोविड के आने के बाद से ही आईआईटी इंदौर की वायरोलाजी लैब कोविड-19 के अध्ययन में लगी है। रिसर्च में सामने आया कि कोरोना के लिए जिम्मेदार वायरस सार्स कोविड-19 में तीन प्रमुख तरह के प्रोटीन होते हैं। एम, ई और एस नाम से पहचाने वाले इन प्रोटीन में से किसी एक या एक से ज्यादा का स्वरूप समय के साथ बदल जाता है।

उन्होंने कहा कि अपनी रिसर्च में आईआईटी ने दुनियाभर में वायरस के 22 हजार प्रोटीन आइसोलेट (नमूनों) का अध्ययन किया। इनमें यूके, अमेरिका, भारत सहित कई देशों के नमूने शामिल हैं। जुलाई 2020 तक दुनियाभर की लैब में पहुंचे वायरस के नमूनों से ये पृथक किए गए थे। नमूनों के अध्ययन में पता चला कि कोरोना वायरस के कुल 5,647 म्यूटेंट वैरिएंट सामने आ चुके हैं।

उन्होंने आगे बताया कि वायरस के ई-प्रोटीन के 42 म्यूटेंट, एम-प्रोटीन के 156 म्यूटेंट और एस प्रोटीन यानी स्पाइक प्रोटीन के 5449 म्यूटेंट पहचाने गए। सबसे ज्यादा एस यानी स्पाइक प्रोटीन में म्यूटेशन (उत्परिवर्तन या बदलाव) हो रहा है। वायरस के बाहरी आवरण पर कांटों की तरह दिखने वाले प्रोटीन को ही स्पाइक प्रोटीन कहा जाता है।

म्यूटेंट में प्रोटीन में बदलाव होता है तो उसकी बॉन्डिंग यानी जुड़ने की क्षमता भी बदल जाती है, इसीलिए हर वैरिएंट का वायरस अलग तरह से असर करता है। वायरस का प्रोटीन ही मानव शरीर में पाए जाने वाले एस-2 रिसेप्टर से जुड़कर उसे संक्रमित करता है।

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