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आरबीआई के परिपत्र का अनुपालन नहीं हुआ तो उसकी स्वायत्तता खत्म मानी जाएगी: कांग्रेस

Mon, 27 Aug 2018 03:28 PM IST
नई दिल्ली, भाषा
नई दिल्ली, भाषा Updated Mon, 27 Aug 2018 03:28 PM IST
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If the RBI circular does not comply, its autonomy will be over: Congress

कांग्रेस ने आज कहा कि बैंक ऋण की अदायगी के संदर्भ में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के छह महीने पुराने परिपत्र का अगर अनुपालन नहीं किया गया तो इसका यह अर्थ होगा कि सरकार ने इस संस्था की स्वायत्तता खत्म कर दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आरबीआई की ओर से 12 फरवरी, 2018 को जारी उस परिपत्र का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि एक मार्च से 180 दिनों के भीतर अगर दो हजार करोड़ से अधिक की कर्ज वाली कंपनियों ने ऋण अदायगी नहीं की तो दिवाला प्रक्रिया आरंभ की जाएगी।

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उन्होंने ‘गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कारपोरेशन’ (जीएसपीसी) पर बैंकों के 12 हजार करोड़ रुपये के कर्ज का हवाला दिया और संवाददाताओं से कहा, ‘‘आरबीआई के परिपत्र में जो समयसीमा दी गई थी उसकी मियाद आज पूरी हो गई है। अब देखना होगा कि भारतीय स्टेट बैंक जीएसपीसी के कर्ज को लेकर क्या करता है?’’ कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘इस सरकार ने पहले ही नोटबंदी के जरिए आरबीआई को कमजोर करने का काम किया। अगर अब उसके परिपत्र का अनुपालन नहीं होता है तो समझा जाएगा कि सरकार ने आरबीआई की स्वयत्तता खत्म कर दी।’’ 
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उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात में जीएसपीसी से संबंधित ‘दीनदयाल उपाध्याय केजी बेसिन’ की परियोजना के नाम पर ‘महाघोटाला’ किया गया है। 
रमेश ने कहा, ‘‘केजी बेसिन में नया तेल स्त्रोत मिलने पर जून 2005 में दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर प्राकृतिक गैस बेसिन नाम रखा गया। दुर्भाग्य से उसमे 20 हजार करोड़ का घोटाला हुआ है । ये कांग्रेस की नहीं, बल्कि कैग की विधानसभा में रखी रिपोर्ट में लिखा है।’’ 
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पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘ कैग की रिपोर्ट के अनुसार, जीएसपीसी ने 15 बैंकों से 20 हजार करोड़ ऋण लिया और मनपसन्द लोगों को ठेके दिये गये। आजतक उसमें से गैस नहीं निकाली गयी। आज जीएसपीसी इस हालत में पहुंच गई है कि उसको दिवालिया घोषित करने की आवश्यकता पड़ गयी है। उस पर 12 हजार करोड़ रुपये का बकाया है।’’ कांग्रेस नेता ने दावा किया कि पिछले साल अगस्त माह में ओएनजीसी को केन्द्र के दबाव में सीएसपीसी को आठ हजार करोड़ रूपये की सहायता देनी पड़ी। इसके बावजूद 12 हजार करोड़ रुपये आज भी बकाया हैं।

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