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चिंताजनक: मां धूम्रपान की आदी तो नवजात के फेफड़े हो सकते हैं छोटे, WHO ने कहा- जन्म से अस्थमा का खतरा
Thu, 01 Aug 2024 06:04 AM IST
विशांत श्रीवास्तव
अमर उजाला, नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला, नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: विशांत श्रीवास्तव
Updated Thu, 01 Aug 2024 06:04 AM IST
सार
डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि अगर मां धूम्रपान की आदी तो नवजात के फेफड़े छोटे हो सकते हैं। साथ ही बच्चा जन्म से ही अस्थमा का रोगी हो सकता है।
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धूम्रपान का खतरा
- फोटो : istock
विस्तार
गर्भवती महिलाओं के लिए धूम्रपान अत्यंत हानिकारक है। धूम्रपान करने वाली माताओं से पैदा होने वाले शिशुओं के फेफड़े छोटे होते हैं और बचपन में अस्थमा विकसित होने का जोखिम अधिक होता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से जारी नॉलेज समरी के अनुसार, गर्भवती महिलाओं और माता-पिता को अपने बच्चों को अस्थमा और अन्य श्वसन स्थितियों से बचाने के लिए तम्बाकू का उपयोग छोड़ देना चाहिए। किशोरावस्था और वयस्कता के दौरान धूम्रपान करने से अस्थमा होने का जोखिम बढ़ जाता है और स्थिति बिगड़ जाती है। ध्रूमपान करने वाले अस्थमा पीड़ितों पर दवाएं और उपचार का असर कम होता जाता है। खासतौर से धूम्रपान करने वाली माताओं से जन्मे बच्चे जीवन भर फेफड़े संबंधी बीमारियों से जूझते रहते हैं। इसका असर उनके स्टैमिना पर भी पड़ता है और यहां तक की उनकी जीवन प्रत्याशा कम हो जाती है।
ई-सिगरेट भी खतरनाक
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, ई-सिगरेट से भी पारंपरिक तम्बाकू उत्पादों के समान अस्थमा का जोखिम अधिक होता है। एजेंसी ने सिफारिश की है कि सरकारें ऐसी नीतियां लागू करें जो सभी सार्वजनिक स्थानों, कार्यस्थलों को पूरी तरह से धूम्रपान मुक्त बनाती हों। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के बीच धूम्रपान और सेकेंड हैंड धुएं के संपर्क में आने के जोखिमों के बारे में जागरूकता बढ़ानी चाहिए।
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हर साल बढ़ रहे 26.2 करोड़ अस्थमा रोगी
अस्थमा एक प्रमुख वैश्विक स्वास्थ्य चिंता है। यह दुनिया भर में प्रतिवर्ष लगभग 26.2 करोड़ लोग अस्थमा की चपेट में आ रहे हैं और हर साल 4 लाख 55 हजार लोगों की मृत्यु का कारण बनती है। डब्ल्यूएचओ की इस समरी का मकसद तम्बाकू के उपयोग और अस्थमा के बीच महत्वपूर्ण संबंध के बारे में बताना है। समरी में अस्थमा से पीड़ित व्यक्तियों पर तम्बाकू के उपयोग से होने वाली बीमारियों व शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बताया गया है। साथ ही तम्बाकू नियंत्रण उपायों की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से जारी नॉलेज समरी के अनुसार, गर्भवती महिलाओं और माता-पिता को अपने बच्चों को अस्थमा और अन्य श्वसन स्थितियों से बचाने के लिए तम्बाकू का उपयोग छोड़ देना चाहिए। किशोरावस्था और वयस्कता के दौरान धूम्रपान करने से अस्थमा होने का जोखिम बढ़ जाता है और स्थिति बिगड़ जाती है। ध्रूमपान करने वाले अस्थमा पीड़ितों पर दवाएं और उपचार का असर कम होता जाता है। खासतौर से धूम्रपान करने वाली माताओं से जन्मे बच्चे जीवन भर फेफड़े संबंधी बीमारियों से जूझते रहते हैं। इसका असर उनके स्टैमिना पर भी पड़ता है और यहां तक की उनकी जीवन प्रत्याशा कम हो जाती है।
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ई-सिगरेट भी खतरनाक
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, ई-सिगरेट से भी पारंपरिक तम्बाकू उत्पादों के समान अस्थमा का जोखिम अधिक होता है। एजेंसी ने सिफारिश की है कि सरकारें ऐसी नीतियां लागू करें जो सभी सार्वजनिक स्थानों, कार्यस्थलों को पूरी तरह से धूम्रपान मुक्त बनाती हों। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के बीच धूम्रपान और सेकेंड हैंड धुएं के संपर्क में आने के जोखिमों के बारे में जागरूकता बढ़ानी चाहिए।
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हर साल बढ़ रहे 26.2 करोड़ अस्थमा रोगी
अस्थमा एक प्रमुख वैश्विक स्वास्थ्य चिंता है। यह दुनिया भर में प्रतिवर्ष लगभग 26.2 करोड़ लोग अस्थमा की चपेट में आ रहे हैं और हर साल 4 लाख 55 हजार लोगों की मृत्यु का कारण बनती है। डब्ल्यूएचओ की इस समरी का मकसद तम्बाकू के उपयोग और अस्थमा के बीच महत्वपूर्ण संबंध के बारे में बताना है। समरी में अस्थमा से पीड़ित व्यक्तियों पर तम्बाकू के उपयोग से होने वाली बीमारियों व शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बताया गया है। साथ ही तम्बाकू नियंत्रण उपायों की आवश्यकता पर बल दिया गया है।